Motion Sickness: सफर शुरू होते ही मतली और चक्कर? यह बीमारी हो सकती है जिम्मेदार

Motion Sickness: कई लोग यात्रा के दौरान उल्टी, चक्कर या बेचैनी महसूस करते हैं। इसे मेडिकल भाषा में मोशन सिकनेस कहते हैं। यह समस्या बहुत आम है और हर तीन में से एक व्यक्ति इसे कभी न कभी अनुभव करता है। बच्चों, युवाओं और बुजुर्ग—किसी भी उम्र में मोशन सिकनेस हो सकती है।

अपडेटेड Jan 11, 2026 पर 9:17 AM
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Motion Sickness: मोशन सिकनेस वो स्थिति है जिसमें सफर के दौरान मतली, उल्टी, चक्कर या सिर दर्द महसूस होता है।

यात्रा करना ज्यादातर लोगों के लिए एक मजेदार और रोमांचक अनुभव होता है, लेकिन कभी-कभी ये मजा उल्टी, चक्कर या बेचैनी में बदल जाता है। चाहे आप कार में हों, बस में सफर कर रहे हों, ट्रेन में यात्रा कर रहे हों, जहाज में हों या हवाई जहाज में—मोशन सिकनेस हर जगह आम समस्या बन सकती है। मेडिकल भाषा में इसे मोशन सिकनेस कहते हैं और हर तीन में से एक व्यक्ति इससे कभी न कभी प्रभावित होता है। मोशन सिकनेस सिर्फ बच्चों या बुजुर्गों तक सीमित नहीं है; ये किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है।

सफर शुरू होते ही मतली, चक्कर, सिर में भारीपन या उल्टी महसूस होने लगती है। इस लेख में हम जानेंगे मोशन सिकनेस क्यों होती है और इसे कैसे रोका जा सकता है।

मोशन सिकनेस क्या है?


मोशन सिकनेस वो स्थिति है जिसमें सफर के दौरान मतली, उल्टी, चक्कर या सिर दर्द महसूस होता है। ये तब होता है जब दिमाग, आंखें और कान एक जैसी जानकारी नहीं भेजते। उदाहरण के लिए, अगर आप कार में बैठकर किताब पढ़ रहे हैं या मोबाइल देख रहे हैं, तो आंखें बताती हैं कि आप स्थिर हैं। लेकिन कान की बैलेंस प्रणाली कहती है कि आप हिल रहे हैं। ये विरोधाभास शरीर को भ्रमित कर देता है और उल्टी का कारण बनता है।

दिमाग और संतुलन का गहरा संबंध

हमारे शरीर में छोटे-छोटे सेंसर (रिसेप्टर्स) होते हैं जो आंखों, कान और शरीर में बदलाव महसूस करते हैं और दिमाग को संदेश भेजते हैं।सफर के दौरान, ये संदेश मेल नहीं खाते। वेस्टिबुलर सिस्टम यानी संतुलन बनाने वाला सिस्टम परेशान हो जाता है। ब्रेन स्टेम और हाइपोथैलेमस सक्रिय हो जाते हैं, जिससे मतली, चक्कर और उल्टी महसूस होती है।

सफर के दौरान उल्टी क्यों होती है?

सिर्फ गाड़ी का हिलना ही कारण नहीं है। पेट की स्थिति और सफर की प्रकृति भी महत्वपूर्ण हैं:

  • खाली पेट सफर से पेट की वोसस नर्व ज्यादा सक्रिय होती है, चक्कर और बेचैनी बढ़ती है।
  • भारी खाना खाने के बाद सफर भी उल्टी का जोखिम बढ़ाता है।
  • ऊबड़-खाबड़ रास्ते, पहाड़ी रास्ते, गाड़ी के झटके या दुर्गंध जैसी चीजें भी मोशन सिकनेस बढ़ा सकती हैं।
  • कान के अंदर का फ्लूइड हिलने से गर्दन और खोपड़ी में कंपन पैदा होता है, जो दिमाग के संतुलन को बिगाड़ता है।

मोशन सिकनेस से बचने के आसान और असरदार उपाय

  1. भारी भोजन से बचें – सफर से पहले हल्का खाना ही खाएं।
  2. खाली पेट सफर न करें – हल्का स्नैक्स या फल साथ रखें।
  3. डॉक्टर की सलाह – जरूरत पड़ने पर दवा डॉक्टर की निगरानी में लें।
  4. चलती गाड़ी में सोने से बचें – सोते समय संतुलन बिगड़ सकता है।
  5. गाड़ी रोकें – मतली महसूस होते ही गाड़ी रोकें और ध्यान भटकाएं।
  6. शरीर की स्थिति स्थिर रखें – सिर, कंधे, कमर और घुटनों की हलचल कम करें।
  7. आगे की सीट पर बैठें या गाड़ी खुद चलाएं – संतुलन बनाए रखना आसान होता है। निकोटीन और धूम्रपान से बचें।
  8. हल्का म्यूजिक सुनें – दिमाग शांत रहता है और मतली कम होती है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

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