Diabetes and Heart disease: जरा अपनी नींद पर नजर डालिए और डॉक्टर से समझिए कि नौजवानों को भी डायबिटीज, हार्ट की बीमारियों का खतरा क्यों है
Diabetes and Heart disease: यह रिपोर्ट चेतावनी देती है कि हसल कल्चर के कारण युवाओं में बढ़ती नींद की कमी दिल की बीमारियों, डायबिटीज और मोटापे का मुख्य कारण बन रही है।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में 'हसल कल्चर' (हर वक्त काम करने की होड़) एक नया ट्रेंड बन चुका है। देर रात तक जागना, काम करना या स्क्रीन स्क्रॉल करना अब एक लाइफस्टाइल बन गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी रातों की ये चंद घंटों की लापरवाही आपके शरीर को अंदर ही अंदर खोखला कर रही है? CNN-News18 की एक विशेष रिपोर्ट में डॉक्टरों और हेल्थ एक्सपर्ट्स ने भारत के युवाओं में बढ़ती नींद की कमी (Sleep Deprivation) को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। विशेषज्ञों का कहना है कि कम नींद लेना अब केवल थकान का कारण नहीं है, बल्कि यह दिल की बीमारियों, डायबिटीज और मोटापे जैसी गंभीर बीमारियों का सबसे बड़ा जरिया बनता जा रहा है।
नींद कोई आराम नहीं...
अक्सर लोग सोचते हैं कि सोना मतलब शरीर को पूरी तरह बंद कर देना है, लेकिन विज्ञान इसके बिल्कुल उलट कहता है। डॉक्टरों के मुताबिक, नींद हमारे शरीर की एक बेहद सक्रिय जैविक प्रक्रिया (Biological Process) है जो 90-90 मिनट के चक्रों में काम करती है। इसके मुख्य रूप से तीन चरण होते हैं:
* लाइट स्लीप (हल्की नींद): यह नींद की शुरुआत होती है, जहां आपके दिल की धड़कन और शरीर का तापमान धीरे-धीरे कम होने लगता है।
* डीप स्लीप (गहरी नींद): इसे शरीर का 'हैवी लिफ्टिंग फेज' कहा जाता है। इसी दौरान हमारा शरीर टूटे-फूट चुके ऊतकों (Tissues) की मरम्मत करता है, ग्रोथ हार्मोन रिलीज करता है और हमारे इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) को मजबूत बनाता है।
* रेम स्लीप (REM Sleep): यह चरण हमारी मानसिक सेहत के लिए सबसे जरूरी है। यह हमारी भावनाओं को नियंत्रित करने, तनाव को प्रोसेस करने और याददाश्त को मजबूत बनाने का काम करता है।
वीकेंड पर 'नींद का कर्ज' चुकाना मुमकिन नहीं
कई युवाओं की यह आदत होती है कि वे हफ्ते भर कम सोते हैं और सोचते हैं कि शनिवार-रविवार को देर तक सोकर इसकी भरपाई कर लेंगे। एक्सपर्ट्स ने इसे कोरा भ्रम बताया है। उनका कहना है कि 'स्लीप डेट' (Sleep Debt) यानी नींद के कर्ज को इस तरह कभी नहीं चुकाया जा सकता। लगातार कम सोने से शरीर को जो नुकसान होता है, उसकी भरपाई नामुमकिन है:
1. दिमाग पर असर (अल्जाइमर का खतरा): गहरी नींद के दौरान हमारे दिमाग का एक खास सिस्टम (Glymphatic System) बीटा-एमिलॉयड जैसे जहरीले कचरे को बाहर निकालता है। यदि आप नहीं सोएंगे, तो यह जहर दिमाग में जमा होने लगेगा, जिससे आगे चलकर अल्जाइमर जैसी बीमारी हो सकती है।
2. दिल की सेहत पर हमला: सोते समय हमारा ब्लड प्रेशर कुदरती तौर पर थोड़ा कम होता है, जिससे दिल को आराम मिलता है। नींद पूरी न होने पर धमनियां सख्त हो जाती हैं, जिससे हाई ब्लड प्रेशर और अचानक हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
3. मोटापा और डायबिटीज: सिर्फ एक हफ्ते की खराब नींद आपके शरीर की इंसुलिन सेंसिटिविटी को बिगाड़ सकती है। इससे भूख को नियंत्रित करने वाले हार्मोन गड़बड़ हो जाते हैं, जिससे इंसान को मीठा और हाई-कैलोरी खाना खाने की क्रेविंग होने लगती है।
4. कमजोर इम्यूनिटी: जो लोग 6 घंटे या उससे कम सोते हैं, उन्हें सर्दी-खांसी होने का खतरा चार गुना बढ़ जाता है। सिर्फ एक रात की 4 घंटे की नींद आपके शरीर की उन 'नेचुरल किलर सेल्स' को भारी नुकसान पहुंचाती है जो कैंसर कोशिकाओं से लड़ती हैं।
डॉक्टरों की सलाह
डॉ. प्रतिमा मूर्ति और अन्य स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हमें नींद को एक लग्जरी नहीं, बल्कि एक 'अनिवार्य दवा' की तरह देखना होगा। उन्होंने इससे बचने के लिए कुछ बेहद जरूरी टिप्स दिए हैं:
* सोने का पक्का समय: रोज रात को एक ही तय समय पर बिस्तर पर जाएं और सुबह एक ही समय पर उठें, चाहे वीकेंड ही क्यों न हो।
* स्क्रीन से तौबा: सोने से कम से कम एक घंटा पहले अपने मोबाइल, लैपटॉप और टीवी को खुद से दूर कर दें। स्क्रीन से निकलने वाली 'ब्लू लाइट' नींद के हार्मोन को बनने से रोकती है।
* खान-पान में बदलाव: रात के समय भारी खाना, चाय, कॉफी या कैफीन युक्त चीजों का सेवन बिल्कुल बंद कर दें।
* 7 से 9 घंटे की नींद: एक स्वस्थ शरीर और दिमाग के लिए हर दिन कम से कम 7 से 9 घंटे की नींद लेना गैर-परक्राम्य (Non-negotiable) होना चाहिए।