16th Finance Commission report: कांग्रेस शासित कर्नाटक 16वें वित्त आयोग (16FC) के हॉरिजॉन्टल डिवोल्यूशन फॉर्मूले का सबसे बड़ा लाभार्थी बनने वाला है। जबकि मध्य प्रदेश को सबसे बड़ा झटका लगने वाला है। यह इसलिए हुआ है क्योंकि पैनल इक्विटी के साथ-साथ इकोनॉमिक एफिशिएंसी पर भी अपना ध्यान केंद्रित कर रहा है। नए फॉर्मूले के तहत केंद्र के टैक्स डिवोल्यूशन में कर्नाटक का हिस्सा 2026-31 के लिए 4.13 प्रतिशत कर दिया गया है। यह 15वें वित्त आयोग के तहत 3.65 प्रतिशत था।
इससे कर्नाटक को 7,387 करोड़ रुपये अधिक मिलेंगे। साथ ही राज्य का आवंटन 63,050 करोड़ रुपये हो जाएगा। जबकि पिछले फॉर्मूले के तहत कर्नाटक को 55,663 करोड़ रुपये मिलते थे। इस बदलाव के पीछे एक अहम वजह डिवोल्यूशन फॉर्मूले में "GDP में योगदान" के लिए 10 फीसदी वेटेज देना है। यह एक ऐसा पैमाना है जिसका मकसद बेहतर आर्थिक प्रदर्शन वाले राज्यों को इनाम देना है। कर्नाटक मैन्युफैक्चरिंग, सर्विसेज और टेक्नोलॉजी के जरिए राष्ट्रीय उत्पादन में बड़ा योगदान देता है। उसे इस बदलाव से बहुत अधिक फायदा हुआ है।
कर्नाटक के बाद केरल दूसरा सबसे बड़ा लाभार्थी राज्य है। उसका आवंटन 6,975 करोड़ रुपये बढ़ गया है। उसका हिस्सा 1.93 प्रतिशत से बढ़कर 2.38% हो गया है। इसके अलावा गुजरात (4,228 करोड़ रुपये) और हरियाणा (4,090 करोड़ रुपये) को भी भारी लाभ हुआ है।
सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले भारतीय राज्य महाराष्ट्र को 1,893 करोड़ रुपये का लाभ हुआ है। उसका हिस्सा मामूली रूप से बढ़कर 6.44 प्रतिशत हो गया है। दूसरी ओर मध्य प्रदेश को सबसे बड़ा नुकसान होने वाला है। एमपी का आवंटन 7,677 करोड़ रुपये घटकर 1.12 लाख करोड़ रुपये हो गया है। सबसे अधिक आबादी वाले राज्यों के आवंटन में भी कमी आई है। उत्तर प्रदेश को 4,884 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
जबकि पश्चिम बंगाल के आवंटन में 4,701 करोड़ रुपये की कटौती हुई है। बिहार को 1,679 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना होगा। अपनी रिपोर्ट में फाइनेंस कमीशन ने साफ तौर पर एफिशिएंसी की ओर बदलाव का बचाव किया। कमीशन ने कहा कि प्रति व्यक्ति GSDP दूरी गरीबी और SDG नतीजों जैसे इक्विटी से जुड़े उद्देश्यों के लिए एक प्रॉक्सी के रूप में काम करती है। यह GDP में योगदान एफिशिएंसी के लिए एक सरोगेट के रूप में काम करता है। यह आर्थिक मैनेजमेंट, वित्तीय अनुशासन और टैक्स के प्रयासों को दिखाता है।
16वीं वित्त आयोग की रिपोर्ट में क्या है?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को लोकसभा में केंद्र और राज्यों के बीच टैक्स रेवेन्यू के बंटवारे के लिए 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट पेश की। भारतीय संविधान के आर्टिकल 280 के तहत स्थापित वित्त आयोग एक संवैधानिक निकाय है। यह केंद्र और राज्य सरकारों के बीच टैक्स रेवेन्यू के बंटवारे की सिफारिश करता है। केंद्र द्वारा लगाए गए सेस और सरचार्ज डिविजिबल पूल का हिस्सा नहीं हैं। वित्त आयोग एक संवैधानिक निकाय है जो केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों पर सुझाव देता है।
बजट पेश करने के बाद सुश्री सीतारमण ने लोकसभा में वित्त विधेयक 2026 पेश किया। उन्होंने राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम 2003 के तहत बयान भी पेश किए। पूर्व नीति आयोग के वाइस चेयरमैन अरविंद पनगढ़िया की अध्यक्षता वाले 16वें वित्त आयोग ने 1 अप्रैल, 2026 से शुरू होने वाली पांच साल की अवधि के लिए केंद्रीय टैक्स में राज्यों की हिस्सेदारी 41 प्रतिशत बनाए रखने की सिफारिश की है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को लोकसभा में 2026-2031 की अवधि के लिए केंद्र और राज्यों के बीच टैक्स रेवेन्यू के बंटवारे पर 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट पेश की। सीतारमण ने कहा, "सरकार ने केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी 41 प्रतिशत रखने की आयोग की सिफारिश को मान लिया है।" केंद्र सरकार ने वित्त आयोग अनुदान के तौर पर वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राज्यों को 1.4 लाख करोड़ रुपये दिए हैं। इसमें ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों और आपदा प्रबंधन के लिए अनुदान शामिल हैं।
संविधान के तहत गठित वित्त आयोग केंद्र और राज्यों के बीच टैक्स के बंटवारे के लिए एक फॉर्मूला देता है। केंद्र द्वारा लगाए गए सेस और सरचार्ज इस बंटवारे वाले पूल का हिस्सा नहीं हैं। 16वें वित्त आयोग का गठन 31 दिसंबर, 2023 को किया गया था।
पनगढ़िया की अध्यक्षता वाले आयोग के सदस्यों में रिटायर्ड नौकरशाह एनी जॉर्ज मैथ्यू, अर्थशास्त्री मनोज पांडा, एसबीआई ग्रुप के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष और भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर टी. रबी शंकर शामिल हैं। आयोग के सचिव ऋत्विक पांडे ने 17 नवंबर, 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को रिपोर्ट सौंपी थी।