5 बड़ी वजहें जिनकी मदद से बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में भेद दिया ममता बनर्जी और टीएमसी का किला!

West Bengal Election Results: ममता बनर्जी को हमेशा से पश्चिम बंगाल की महिलाओं का अटूट समर्थन मिलता रहा है, लेकिन इस बार तस्वीर बदली हुई नजर आई। रुझानों के अनुसार, उन 39 सीटों में से 35 पर भाजपा आगे है जहां महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से अधिक है

अपडेटेड May 04, 2026 पर 3:51 PM
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अब एक ही सवाल सियासी पंडितों को मथ रहा है कि आखिर बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का अभेद्य समझा जाने वाला ये दुर्ग कैसे भेद दिया?

West Bengal Election Result: इस वक्त देश में सिर्फ पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों और रुझान की चर्चा है। 4 मई को दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर जब हम इस रिपोर्ट पर काम कर रहे हैं, तो उस वक्त पश्चिम बंगाल की 294 सीटों में बीजेपी 194 और तृणमूल कांग्रेस 91 सीटों पर आगे चल रही है। अब यह तय माना जा रहा है कि आजादी के बाद पहली बार बीजेपी पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने जा रही है। अब एक ही सवाल सियासी पंडितों को मथ रहा है कि आखिर बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का अभेद्य समझा जाने वाला ये दुर्ग कैसे भेद दिया? आइए इसे समझते हैं-

पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक ऐसा ऐतिहासिक परिवर्तन हुआ है जिसने दशक भर से चले आ रहे ममता बनर्जी के वर्चस्व को हिलाकर रख दिया है। 2026 के विधानसभा चुनाव के रुझानों और नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) का अभेद्य किला अब दरक चुका है और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्य की सत्ता के शिखर की ओर अपने कदम बढ़ा दिए हैं।

1. महिला मतदाताओं में बीजेपी की सेंधमारी


ममता बनर्जी को हमेशा से पश्चिम बंगाल की महिलाओं का अटूट समर्थन मिलता रहा है, लेकिन इस बार तस्वीर बदली हुई नजर आई। रुझानों के अनुसार, उन 39 सीटों में से 35 पर भाजपा आगे है जहां महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से अधिक है। आरजी कर (RG Kar) और संदेशखली (Sandeshkhali) जैसी घटनाओं के साथ-साथ गिरती कानून-व्यवस्था ने टीएमसी के इस पारंपरिक महिला वोट बैंक में बड़ी सेंध लगाई है।

2. सुरक्षित मतदान का जमीनी मैनेजमेंट

बंगाल के चुनावी इतिहास में हिंसा एक बड़ी बाधा रही है, जिसे पार करने के लिए भाजपा ने इस बार दोहरी रणनीति अपनाई। पार्टी सूत्रों के अनुसार, RSS और बीजेपी ने विचारधारा से परे हटकर आम मतदाताओं को बिना किसी डर के वोट डालने के लिए प्रेरित किया। चुनाव आयोग द्वारा केंद्रीय बलों (CAPF) की भारी तैनाती ने भी मतदाताओं में विश्वास जगाया। आयोग ने निर्देश दिए हैं कि गिनती के बाद भी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 500 कंपनियां राज्य में तैनात रहेंगी।

3. 'SIR' एक्सरसाइज और मतदाता सूची का शुद्धिकरण

भाजपा ने 'बाहरी' मतदाताओं के नैरेटिव और मतदाता सूची में गड़बड़ियों को अपना बड़ा हथियार बनाया। 'SIR' एक्सरसाइज के माध्यम से केवल वास्तविक मतदाताओं की भागीदारी सुनिश्चित की गई। मतदाता सूची से लगभग 27 लाख नाम हटाए गए, जिन्हें 'बाहरी' माना जा रहा। इसके परिणामस्वरूप, 2021 की तुलना में इस बार 30 लाख से अधिक अतिरिक्त वोट पड़े।

4. सरकारी कर्मचारियों और युवाओं को साथ लाना

भाजपा ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों और रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं के बीच अपनी पैठ मजबूत की। एंटी-इंकंबेंसी और सातवें वेतन आयोग (7th Pay Commission) के लाभ से वंचित राज्य कर्मचारियों के बीच भाजपा ने अपनी जगह बनाई। अमित शाह ने चुनाव प्रचार के दौरान वादा किया था कि सत्ता में आने के 45 दिनों के भीतर सातवां वेतन आयोग लागू किया जाएगा और सरकारी नौकरियों के खाली पदों को भरा जाएगा। माना जाता है कि इससे भी लगभग 20 से 50 लाख मतदाता प्रभावित हुए।

5. SC-ST बेल्ट और TMC के गढ़ों में सेंध

भाजपा ने न केवल अपने पुराने मजबूत क्षेत्रों को बरकरार रखा, बल्कि टीएमसी के मजबूत किलों को भी ध्वस्त कर दिया। पार्टी ने अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) बाहुल्य क्षेत्रों में अपना दबदबा बनाया। अनुसूचित जाति की अधिक संख्या वाली 29 सीटों पर बीजेपी आगे है, जबकि टीएमसी के लिए ये आंकड़ा 5 सीटों का है। इसी तरह ST बाहुल्य 15 की 15 सीटों पर बीजेपी आगे चल रही है। इतना ही नहीं, भाजपा ने टीएमसी के सबसे मजबूत किलों में भी करीब 44% की सेंधमारी की और राज्य में अबतक की काउंटिंग में 45.1 फीसदी वोट शेयर हासिल करने में सफल रही है। टीएमसी को अबतक 40.92 फीसदी वोट मिले हैं।

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