1 अप्रैल से देश में नया टैक्स सिस्टम लागू, ITR डेडलाइन, STT और TDS समेत ये हुए बड़े बदलाव

1 अप्रैल से नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही आयकर नियमों में कई अहम बदलाव किए गए हैं, जिससे टैक्स देने वालों को कुछ राहत भी मिलेगी, लेकिन नियमों का पालन करना थोड़ा सख्त भी होगा। ध्यान देने वाली बात यह है कि ये नए टैक्स नियम असेसमेंट ईयर 2026-27 से लागू होंगे।

अपडेटेड Apr 01, 2026 पर 2:15 PM
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1 अप्रैल से देश में नया टैक्स सिस्टम लागू, जानिए क्या-क्या हुए बड़े बदलाव

1 अप्रैल से नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही आयकर नियमों में कई अहम बदलाव किए गए हैं, जिससे टैक्स देने वालों को कुछ राहत भी मिलेगी, लेकिन नियमों का पालन करना थोड़ा सख्त भी होगा। ध्यान देने वाली बात यह है कि ये नए टैक्स नियम असेसमेंट ईयर 2026-27 से लागू होंगे। वहीं, मौजूदा असेसमेंट ईयर 2025-26 के लिए लोगों को अभी पुराने टैक्स नियमों (1962) के अनुसार ही ITR भरना होगा और इसकी आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 है।

टैक्स से जुड़े नियमों में जो बदलाव लागू हुए हैं, इनमें TDS और TCS के नियमों में बदलाव, ITR भरने की समय सीमा में बदलाव, शेयर बायबैक पर टैक्स और नए रिपोर्टिंग फॉर्मेट शामिल हैं। इन बदलावों का सीधा असर FY 2026-27 में टैक्स प्लानिंग और नियमों का पालन करने पर पड़ेगा।

खास बात यह है कि इस बार “Tax Year” का नया कॉन्सेप्ट लागू किया गया है, ITR फॉर्म में बदलाव किए गए हैं और कुछ टैक्स छूट की लिमिट में भी बदलाव किए गए हैं। इन बदलावों का मकसद टैक्स सिस्टम को आसान बनाना है, जिससे लोगों को टैक्स जमा करने में आसानी हो।


यहां 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होने वाले आयकर संबंधी प्रमुख अपडेट दिए गए हैं:

ITR दाखिल करने की समय सीमा में बदलाव

  • नौकरी करने वाले लोग (ITR-1 और ITR-2): आखिरी तारीख 31 जुलाई ही रहेगी
  • टैक्स भरने वालों के लिए 31 अगस्त आखिरी तारिख रहेगी।
  • ऑडिट वाले मामलों में यह 31 अक्टूबर रहेगी।

डेरिवेटिव्स पर प्रतिभूति लेनदेन कर (Securities Transaction Tax -STT) बढ़ा

सरकार ने इक्विटी डेरिवेटिव्स पर प्रतिभूति लेनदेन कर (STT) की दरें 1 अप्रैल, 2026 से बढ़ा दी हैं।  इससे इक्विटी डेरिवेटिव्स के व्यापारियों पर असर पड़ेगा और लेनदेन में बढ़ोतरी होगी।

  • फ्यूचर्स: बिक्री पर SATT बढ़कर 0.05% हो गया है (पहले 0.02%)।
  • ऑप्शंस (प्रीमियम): बिक्री पर STT बढ़कर 0.15% हो गया है (पहले 0.10%)।
  • ऑप्शंस (एक्सरसाइज): STT बढ़कर 0.15% हो गया है (पहले 0.125%)।

बजट 2026 में घोषित इन परिवर्तनों का उद्देश्य F&O सेगमेंट में ज्यादा सट्टेबाजी कारोबार को कम करना और सरकार की आय बढ़ाना है।

Form 16 की जगह Form 130 लागू होगा

1 अप्रैल, 2026 से कंपनियों की तरफ से Form 16 जारी नहीं किया जाएगा, जिसे नए आयकर अधिनियम, 2025 के तहत Form 130 से बदल दिया जाएगा। Form 130 का मकसद Form 16 के समान ही है, यानी नौकरी करने वाले लोगों और पेंशन पाने वालों को TDS (टैक्स कटौती) की पूरी जानकारी मिलेगी। इस नए फॉर्म में जानकारी ज्यादा अच्छे से दी जाएगी, जिसमें कंपनी और कर्मचारी के डिटेल्स, सैलरी डिटेल्स, कटौतियां, कुल टैक्सेबल इनकम, कितना टैक्स देना है, TDS/TCS की पूरी जानकारी शामिल है।

TDS न कटने के लिए अब एक ही डिक्लेरेशन काफी

अब निवेशकों को TDS न कटवाने या कम कटवाने के लिए अलग-अलग जगह फॉर्म देने की जरूरत नहीं है। वे अब सिर्फ एक ही फॉर्म (Form 15G या 15H) सीधे NSDL या CDSL में जमा कर सकते हैं। इस एक फॉर्म से उन्हें डिविडेंड, बॉन्ड या सिक्योरिटी पर ब्याज और म्यूचुअल फंड से होने वाली कमाई जैसी कई आय पर राहत मिल जाएगी। यह नियम उन निवेशों पर लागू होगा जो डिमैट अकाउंट में रखे गए हैं।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड कर नियम

1 अप्रैल से सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) पर कर नियमों को सख्त कर दिया गया है। अब कैपिटल गेन टैक्स से छूट सिर्फ उन्हीं लोगों को मिलेगी, जिन्होंने ये बॉन्ड शुरुआत में खरीदे थे और मैच्योरिटी तक होल्ड किए हैं।

जो निवेशक स्टॉक एक्सचेंज के जरिए सेकेंडरी मार्केट से SGB खरीदते हैं, उन्हें अब यह छूट नहीं मिलेगी। साथ ही ऐसे निवेशकों को बॉन्ड रिडीम करने पर कैपिटल गेन टैक्स देना होगा।

डिविडेंड और म्यूचुअल फंड इनकम के नियम

1 अप्रैल से, डिविडेंड या म्यूचुअल फंड से कमाई करने के लिए लिए गए लोन पर दिए गए ब्याज की कोई छूट नहीं मिलेगी। पहले, इस पर 20% तक की लिमिट में छूट मिल जाती थी, लेकिन अब यह पूरी तरह खत्म कर दी गई है। अब इस तरह की पूरी आय पर सीधे टैक्स लगेगा और इसे 'अन्य स्रोतों से आय' में जोड़ा जाएगा। यानी अब उधार लेकर निवेश करने पर टैक्स का फायदा नहीं मिलेगा।

शेयर बायबैक पर टैक्स के नियम

1 अप्रैल से, शेयरधारकों को शेयर बायबैक से मिलने वाला पैसा अब कैपिटल गेन के तौर पर टैक्स किया जाएगा, न कि डिविडेंड माना जाएगा। अब टैक्स केवल लाभ (खरीद कीमत और बेचने की कीमत के अंतर) पर लागू होगा, जिससे लंबे समय तक निवेश करने वाले लोगों को पहले के मुकाबले ज्यादा फायदा मिलेगा।

NRI से प्रॉपर्टी खरीदने पर TDS के नियम आसान

1 अप्रैल, 2026 से, NRI से प्रॉपर्टी खरीदने वाले खरीदार अपने  ही PAN के जरिए TDS काटकर जमा कर सकता है। पहले अलग से TAN (Tax Deduction Account Number) प्राप्त करने की आवश्यकता को समाप्त कर दिया गया है, जिससे प्रक्रिया सरल हो गई है।

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