AAP Crisis: टिकट का ऑफर और मनाने की थी तैयारी, लेकिन केजरीवाल ने कर दी देरी और टूट गई आप!

चौंकाने वाली बात ये भी रही कि केजरीवाल उसी वक्त अशोक मित्तल के घर पर रह रहे थे, जो खुद पार्टी छोड़ने वालों में शामिल थे। शुक्रवार सुबह जब तक केजरीवाल घर खाली करने का ऐलान करते, तब तक सभी 7 सांसद राज्यसभा में मर्जर लेटर जमा कर चुके थे

अपडेटेड Apr 25, 2026 पर 1:52 PM
Story continues below Advertisement
AAP MPs Resign: टिकट का ऑफर और मनाने की थी तैयारी, लेकिन केजरीवाल ने कर दी देरी और टूट गई AAP!

आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए बड़ा झटका तब लगा, जब राज्यसभा के 7 सांसदों ने एक साथ पार्टी छोड़ दी। इनमें राघव चड्ढा के नेतृत्व में कई ऐसे चेहरे भी शामिल थे, जिन्होंने पहले कभी खुलकर नाराजगी नहीं जताई थी। इस अचानक फैसले ने पार्टी नेतृत्व को पूरी तरह चौंका दिया।

खबरों के मुताबिक, पार्टी अंदर ही अंदर नाराज सांसदों को मनाने की कोशिश कर रही थी। प्लान ये था कि पंजाब विधानसभा चुनाव में इन “नाखुश” सांसदों को टिकट देकर हालात संभाले जाएं। लेकिन ये कोशिश ना तो सही समय पर हुई और ना ही पार्टी के अंदर ठीक से सबको इसकी जानकारी दी गई।

सूत्रों के अनुसार, पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने इन सांसदों के साथ बैठक करने का प्लान बनाया था, जिसमें उनकी नाराजगी समझकर उन्हें दूसरी जिम्मेदारियां देने पर बात होनी थी। लेकिन ये मीटिंग हो ही नहीं पाई, क्योंकि केजरीवाल कोर्ट केस और घर बदलने में व्यस्त थे। इससे पहले कि बातचीत होती, सांसदों ने पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया।


चौंकाने वाली बात ये भी रही कि केजरीवाल उसी वक्त अशोक मित्तल के घर पर रह रहे थे, जो खुद पार्टी छोड़ने वालों में शामिल थे। शुक्रवार सुबह जब तक केजरीवाल घर खाली करने का ऐलान करते, तब तक सभी 7 सांसद राज्यसभा में मर्जर लेटर जमा कर चुके थे।

इस पूरे घटनाक्रम को AAP ने ‘ऑपरेशन लोटस’ बताया है। अब हालत ये है कि राज्यसभा में पार्टी के पास सिर्फ 3 सांसद बचे हैं- 2 दिल्ली से और 1 पंजाब से।

इस लिस्ट में विक्रम सहनी, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल और राजिंदर गुप्ता जैसे नाम भी शामिल हैं। दिलचस्प बात ये है कि इनमें से ज्यादातर नेताओं का पार्टी नेतृत्व से कोई बड़ा विवाद भी सामने नहीं आया था।

पार्टी के अंदरूनी सूत्र मानते हैं कि ये पूरा मामला कहीं ना कहीं आपसी तालमेल की कमी और सही समय पर कदम न उठाने की वजह से बिगड़ा। कुछ नेताओं का ये भी कहना है कि जो सांसद गए हैं, वो या तो केंद्रीय एजेंसियों के दबाव से बचना चाहते थे या उनके अपने निजी कारण थे।

अब आने वाले दिन AAP के लिए काफी अहम हैं, क्योंकि पार्टी को न सिर्फ अपनी साख बचानी है, बल्कि पंजाब में अपनी सरकार को भी संभालकर रखना है- जो फिलहाल उसका इकलौता मजबूत गढ़ बचा है।

केजरीवाल को असल झटका राघव चड्ढा ने नहीं बड़ी यूनिवर्सिटी चलाने वाले अशोक मित्तल ने दिया! कौन हैं ये?

 

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।