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Ajit Pawar Plane Crash: जिस बारामती ने अजित पवार को बनाया 'दादा', वही बना उनकी आखिरी मंजिल

कई दशकों तक बारामती का नाम पवार परिवार से जुड़ा रहा। 1967 से यह सीट परिवार के पास रही- पहले शरद पवार और फिर 1991 के बाद अजित पवार के पास। अजित पवार ने राजनीति की शुरुआत कांग्रेस से की थी और 1999 में NCP बनने के बाद वे उस पार्टी में शामिल हुए

Shubham Sharmaअपडेटेड Jan 28, 2026 पर 8:57 PM
Ajit Pawar Plane Crash: जिस बारामती ने अजित पवार को बनाया 'दादा', वही बना उनकी आखिरी मंजिल
Ajit Pawar Plane Crash: जिस बारामती ने अजीत पवार को बनाया 'दादा', वही बना उनकी आखिरी मंजिल

बारामती, जो पवार परिवार का गढ़ माना जाता है और जहां से शरद पवार के प्रभाव में अजित पवार का राजनीतिक सफर शुरू हुआ, वही शहर बुधवार को उनके जीवन का अंतिम पड़ाव भी बना। विमान हादसे में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का निधन बारामती में ही हुआ। यह एक गहरी विडंबना है कि जिस क्षेत्र ने उन्हें बड़ा राजनीतिक नेता बनाया, वही उनकी आखिरी कहानी का गवाह भी बना।

कई दशकों तक बारामती का नाम पवार परिवार से जुड़ा रहा। 1967 से यह सीट परिवार के पास रही- पहले शरद पवार और फिर 1991 के बाद अजित पवार के पास। अजित पवार ने राजनीति की शुरुआत कांग्रेस से की थी और 1999 में NCP बनने के बाद वे उस पार्टी में शामिल हुए। बारामती में उनका जमीनी स्तर पर किया गया काम उनकी लोकप्रियता की सबसे बड़ी वजह बना और समय के साथ उन्होंने मजबूत जनसमर्थन तैयार किया।

2024 में कड़ी परीक्षा से गुजरा बारामती

यह समर्थन नवंबर 2024 में कड़ी परीक्षा से गुजरा। बारामती के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ, जब शरद पवार की बात अंतिम नहीं रही। मतदाताओं ने अजित पवार को उनके भतीजे युगेंद्र पवार (NCP-SP उम्मीदवार) के खिलाफ 1,00,899 वोटों से बड़ी जीत दिलाई।

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