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Ajit Pawar Profile: शरद पवार के लिए इकलौती सांसदी छोड़ने से विरोध तक, ऐसा रहा अजीत पवार का सफर

Ajit Pawar Profile: अपने चाचा शरद पवार के लिए एकमात्र संसदीय जीत को भी छोड़ने से लेकर शरद पवार के विरोध तक अजीत पवार का केंद्र और राज्य की राजनीति में लगातार मजबूत दखल रहा। वह लगातार सत्ता में बने रहे और अलग-अलग विचारधारा वाली सरकार में चार बार डिप्टी सीएम का पद संभाला। जानिए उनका 67 वर्षों की पूरी जिंदगी का सफर कैसा रहा?

Edited By: Jeevan Deep Vishawakarmaअपडेटेड Jan 28, 2026 पर 11:07 AM
Ajit Pawar Profile: शरद पवार के लिए इकलौती सांसदी छोड़ने से विरोध तक, ऐसा रहा अजीत पवार का सफर
Ajit Pawar Profile: महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार की बारामती में प्लेन लैंडिंग के दौरान हुए हादसे में मौत हो गई।

Ajit Pawar Profile: महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार की बारामती में प्लेन लैंडिंग के दौरान हुए हादसे में मौत हो गई। चार मुख्यमंत्रियों- पृथ्वीराज चह्वण, देवेंद्र फडणवीस, उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के साथ महाराष्ट्र में सबसे लंबे समय तक डिप्टी सीएम का पद संभालने वाले अजीत पवार का अपने राज्य की राजनीति में करीब चार दशकों तक अच्छा-खासा दखल रहा है। अपने समर्थकों के बीच वह 'दादा' के रूप में मशहूर थे। 'दादा' का मतलब बड़ा भाई। पहली बार उन्होंने 1982 में उन्होंने चुनावी जीत का स्वाद चखा, जब वह कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्री के बोर्ड में चुने गए। उसके बाद से इस्तीफे और पक्ष-विपक्ष; हर तरीके से न सिर्फ राज्य बल्कि केंद्र की राजनीति पर प्रभाव डाला। उनकी मौत के बाद उनके परिवार में उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार और उनके दो बच्चे जय और पार्थ पवार हैं। सुनेत्रा पवार राज्यसभा सांसद हैं।

शरद पवार के लिए सांसदी छोड़ने से लेकर शरद पवार के विरोध तक

एनसीपी में अपने चाचा शरद पवार के कदमों पर चलते हुए अजीत पवार ने 1982 में कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्री के बोर्ड में जगह बनाकर चुनावी राजनीति में एंट्री की। इसके बाद वर्ष 1991 में वह पुणे जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष चुने गए और अगले 16 वर्षों तक इस पद पर बने रहे। इस दौरान पहली बार बार 1991 के लोकसभा चुनाव में बारामती सीट से जीत हासिल कर वह लोकसभा पहुंचे। हालांकि बाद में उन्होंने अपनी सीट छोड़ दी ताकि अपने चाचा शरद पवार के लिए जगह बना सकें जिसके बाद पीवी नरसिम्हा राव की सरकार में शरद पवार रक्षा मंत्री बने थे। खास बात ये है कि जिन शरद पवार के लिए अजीत पवार ने अपनी सांसदी छोड़ दी, उन्हीं के खिलाफ वर्ष 2019 से रास्ता अलग कर विरोधी दल से जुड़ गए।

अब तक ऐसा रहा है सफर

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