Debate on Waqf bill in the Lok Sabha: लोकसभा में बुधवार (2 अप्रैल) को वक्फ (संशोधन) विधेयक पर गरमागरम बहस के बीच समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीच हल्की-फुल्की नोकझोंक देखने को मिली। लोकसभा में बोलते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी ने अभी तक अपना अध्यक्ष नहीं चुना है। इस पर अमित शाह ने कटाक्ष करते हुए कहा कि हमारे सामने जो पार्टियां हैं, ये लोग तो परिवार के पांच सदस्यों से ही अध्यक्ष चुन लेते हैं। अखिलेश यादव अगले 25 साल तक सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने रहेंगे।
दरअसल, सपा मुखिया अखिलेश यादव ने कहा, "BJP में एक मुकाबला चल रहा है कि कौन बड़ा है। जो पार्टी यह कहती हो कि यह दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है। वह अपना राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं चुन पाई है अभी तक...। भारतीय जनता पार्टी क्या है?"
इस पर गृह मंत्री अमित शाह अपनी सीट से उठे और हंसते हुए कहा, "अखिलेश जी ने हंसते हुए अपनी बात कही, इसलिए मैं भी उसी अंदाज में जवाब दूंगा। सामने जितनी पार्टियां हैं, उनका राष्ट्रीय अध्यक्ष सिर्फ 5 लोगों को ही चुनना है, परिवार को...। हमारे यहां करोड़ों सदस्य हैं। हमारे यहां अध्यक्ष चुनने में वक्त लगेगा।"
शाह ने आगे कहा, "हमारी पार्टी में हमें 12-13 करोड़ सदस्यों को शामिल करते हुए एक प्रक्रिया चलानी होती है। इसलिए स्वाभाविक रूप से इसमें समय लगता है आपको यहां जरा भी देर नहीं लगेगी। मैं कहता हूं आप अगले 25 साल तक अध्यक्ष रहोगे।" इस पर अखिलेश भी हंसने लगे।
2024 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की तीसरी बार जीत के बाद मौजूदा जेपी नड्डा को नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने के बाद अगले बीजेपी अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया 10 महीने से लंबित है। बीजेपी को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष इसी महीने मिले की संभावना है। अब बीजेपी प्रमुख के चुनाव के लिए चुनावी प्रक्रिया तेज हो गई है।
सरकार ने बुधवार को कहा कि अगर वह वक्फ संशोधन विधेयक नहीं लाती तो संसद भवन समेत कई इमारतें दिल्ली वक्फ बोर्ड के पास चली जातीं। कांग्रेस के शासनकाल में वक्फ संपत्तियों का सही से प्रबंधन होता तो केवल मुसलमानों की ही नहीं, बल्कि देश की तकदीर भी बदल जाती।
केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को चर्चा और पारित कराने के लिए रखते हुए यह भी कहा कि इसके माध्यम से सरकार और वक्फ बोर्ड मस्जिद समेत किसी धार्मिक संस्था के किसी धार्मिक कामकाज में हस्तक्षेप नहीं करेंगे।
उन्होंने वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ विपक्षी दलों के दावों को खारिज करते हुए कहा कि 1995 में जब कई संशोधनों के साथ व्यापक कानून बनाया गया था। तब किसी ने नहीं कहा था कि यह असंवैधानिक और गैरकानूनी है।