अगर आप नोएडा में जमीन या घर खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए जरूरी साबित हो सकती है। दरअसल, नोएडा अथॉरिटी ने सलारपुर, भंगेल और हाजीपुर गांवों में अपनी नोटिफाइड जमीन पर अवैध निर्माण और कब्जे के खिलाफ निवासियों को चेतावनी देते हुए एक पब्लिक नोटिस जारी किया है। जिसमें कहा गया है कि इन गांवों में कई नोटिफाइड और अधिग्रहित प्लॉट पर अवैध रूप से कब्जा किया गया है, और इन जगहों पर तोड़-फोड़ और सीलिंग की कार्रवाई की जा रही है। इसलिए लोगों को सलाह दी जाती है कि वे ऐसी प्रॉपर्टी में निवेश न करें।
TOI के मुताबिक, अथॉरिटी ने एक बयान में आम जनता को सूचित करते हुए कहा, "सालारपुर, भंगेल और हाजीपुर गांवों में कुछ व्यक्तियों, भू-माफियाओं और अतिक्रमणकारियों द्वारा अधिसूचित जमीनों पर अवैध निर्माण और कब्जा किया जा रहा है। ऐसे अवैध निर्माणों को गिराने और सील करने के लिए नोएडा अथॉरिटी समय-समय पर कार्रवाई करती रही है।”
अवैध निर्माण हटाने के लिए नोटिस जारी
अथॉरिटी ने यह भी कहा है कि अतिक्रमणकारियों को अवैध निर्माण हटाने के लिए नोटिस भी जारी किए गए हैं। साथ ही, उनके खिलाफ FIR दर्ज कराने के लिए संबंधित पुलिस थानों में शिकायतें दी गई हैं।
अथॉरिटी ने ऐसे कई प्लॉट की पहचान की है जिन पर कब्जा किया गया है। इनमें सलारपुर गांव में प्रभावित जमीन में प्लॉट नंबर 700-711, 723, 724, 728-735 और 745-752 समेत कई भूखंड शामिल हैं। वहीं भंगेल गांव में खसरा संख्या 176, 178, 217, 221, 223, 225, 226, 247, 250 और 251 सहित कई भूखंडों पर अतिक्रमण की जानकारी मिली है। हाजीपुर गांव में खसरा संख्या 412 को भी चिन्हित किया गया है।
नोएडा अथॉरिटी के CEO ने क्या कहा?
नोएडा अथॉरिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) कृष्णा करुणेश ने स्पष्ट किया है कि जिन खसरा और प्लॉट नंबरों की पहचान की गई है, उन पर किसी भी भवन निर्माण योजना को अथॉरिटी की मंजूरी नहीं दी गई है। ऐसे में इन जमीनों पर किया गया कोई भी निर्माण पूरी तरह अवैध माना जाएगा।
उन्होंने लोगों से अपील की है कि चिन्हित भूखंडों से जुड़ी किसी भी जमीन की खरीद, बिक्री या अन्य लेन-देन करने से पहले नोएडा अथॉरिटी से पूरी जानकारी और कानूनी स्थिति की जांच जरूर कर लें, ताकि भविष्य में आर्थिक नुकसान से बचा जा सके।
पिछले कुछ सालों में बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे हुए
अधिकारियों के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में, तेजी से हो रहे शहरीकरण, जमीन की बढ़ती कीमतों और खाली पड़ी अधिग्रहित जमीन की कमजोर निगरानी के कारण नोएडा के गांवों में बड़े पैमाने पर कब्जे हुए हैं, जिससे ऐसे प्लॉट अवैध निर्माण और गैर-कानूनी लेन-देन की चपेट में आ गए हैं।
अधिकारियों ने बताया कि जो लोग शहरी इलाकों में जमीन या फ्लैट नहीं खरीद सकते, वे अक्सर घर बनाने के लिए गांवों में प्राइवेट कॉलोनाइजर के विकसित किए गए प्लॉट खरीदते हैं। हालांकि, ज्यादातर मामलों में खरीदारों को तब आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है जब उन्हें पता चलता है कि उस जमीन पर अवैध कब्जा था।