गंगा में नॉनवेज फेंकने के 14 में 5 आरोपियों को बेल देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पढ़ाया ये पाठ!

कोर्ट ने माना कि गंगा नदी केवल हिंदू समुदाय ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए आस्था और सांस्कृतिक महत्व रखती है। अदालत ने यह भी कहा कि अगर कुछ लोगों के कार्यों से धार्मिक सौहार्द प्रभावित होता है, तो इससे गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है

अपडेटेड May 17, 2026 पर 9:48 PM
Story continues below Advertisement
वाराणसी में रमजान के पाक मौके पर गंगा नदी में इफ्तार करने को लेकर विवाद हो गया था।

वाराणसी में रमजान के पाक मौके पर गंगा नदी में इफ्तार करने को लेकर विवाद हो गया था। इस मामले में पुलिस ने 14 मुस्लिम नौजवानों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था। वहीं अब इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गिरफ्तार किए गए 14 लोगों में से पांच को जमानत दे दी है। इन लोगों पर गंगा नदी में एक नाव पर इफ्तार पार्टी करने और नदी में हड्डियां फेंकने का आरोप था। शुक्रवार (15 मई) को जमानत का आदेश जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला और जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा ने अलग-अलग सुनवाई के दौरान दिया।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि गंगा नदी में मांसाहारी भोजन का कचरा फेंकने जैसी गतिविधियां हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत कर सकती हैं। जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला ने 15 मई को यह टिप्पणी उस दौरान की, जब वे मार्च महीने में गंगा नदी में नाव पर इफ्तार पार्टी आयोजित करने और धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में गिरफ्तार 14 मुस्लिम युवकों में से पांच को जमानत दे रहे थे। कोर्ट ने माना कि गंगा नदी केवल हिंदू समुदाय ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए आस्था और सांस्कृतिक महत्व रखती है। अदालत ने यह भी कहा कि अगर कुछ लोगों के कार्यों से धार्मिक सौहार्द प्रभावित होता है, तो इससे गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है।

गंगा नदी में इफ्तार पार्टी करने का मामला


इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “इस मामले में मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग रोज़ा इफ्तार पार्टी कर रहे थे। आरोप है कि इफ्तार पार्टी के दौरान मांसाहारी भोजन किया गया और उसका बचा हुआ हिस्सा गंगा नदी में फेंक दिया गया। कोर्ट की निष्पक्ष राय में यह माना जा सकता है कि इससे हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।” हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि आरोपियों और उनके परिवारों ने “समाज को हुई पीड़ा” के लिए पछतावा व्यक्त किया है। कोर्ट के अनुसार, ज़मानत पर फैसला लेते समय आरोपियों के इस रवैये और पछतावे को भी ध्यान में रखा जा सकता है।

5 युवकों इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी जमानत

जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला ने कहा कि सामाजिक और धार्मिक सौहार्द बनाए रखना सभी समुदायों की जिम्मेदारी है। यह मामला वाराणसी में गंगा नदी पर नाव में आयोजित एक इफ्तार पार्टी से जुड़ा था। भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) की वाराणसी इकाई के अध्यक्ष रजत जायसवाल द्वारा दर्ज कराई गई FIR में आरोप लगाया गया कि 14 लोगों ने नाव पर चिकन बिरयानी खाई और उसका बचा हुआ हिस्सा गंगा नदी में फेंक दिया, जिससे हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। शुरुआत में आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत पूजा स्थल को अपवित्र करने, समुदायों के बीच दुश्मनी बढ़ाने और सार्वजनिक उपद्रव फैलाने जैसे आरोप लगाए गए थे। बाद में पुलिस ने मामले में और गंभीर धाराएं भी जोड़ दीं। इनमें जान से मारने की धमकी देकर वसूली करने का आरोप शामिल था। यह कार्रवाई नाव मालिकों के उस बयान के बाद की गई, जिसमें उन्होंने दावा किया कि आरोपियों ने उनकी नाव जबरन कब्जे में लेकर इस्तेमाल की थी।

कोर्ट ने कही ये बात

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने आदेश में माना कि आरोपियों ने अपने कृत्यों के लिए वास्तविक पछतावा व्यक्त किया है। अदालत ने यह भी कहा कि जमानत पर फैसला करते समय इस बात को ध्यान में रखा जा सकता है। साथ ही, कोर्ट ने नाव मालिक द्वारा लगाए गए जबरदस्ती वसूली और नाव छीनने के आरोपों पर भी सवाल उठाए। जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला ने कहा, “यह बताना पर्याप्त होगा कि केस दर्ज होने से पहले नाविक ने कथित जबरदस्ती वसूली को लेकर कोई शिकायत या रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई थी। अदालत की प्रथम दृष्टया राय में, नाविक अनिल साहनी द्वारा इतने समय बाद लगाए गए आरोप उसकी कहानी पर संदेह पैदा करते हैं।” कोर्ट की इस टिप्पणी को मामले में आरोपों की गंभीरता और सबूतों की विश्वसनीयता के संदर्भ में अहम माना जा रहा है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।