वक्फ अधिनियम पर पहली बार खुलकर बोले अमित शाह- वक्फ बोर्ड में महिलाओं और पसमांदा मुसलमानों का भी प्रतिनिधित्व हो

Rising Bharat Summit: अमित शाह ने कहा भारत के मुसलमान विभाजन नहीं चाहते थे, लेकिन कांग्रेस ने विभाजन को स्वीकार किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि नीतिया देश के हित में होनी चाहिए, न कि दल के हित में। उन्होंने सीधे तौर पर देश के विभाजन के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया

अपडेटेड Apr 09, 2025 पर 9:02 PM
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वक्फ संशोधन अधिनियम के बाद पहली बार बोले अमित शाह- वक्फ बोर्ड में महिलाओं और पसमांदा मुसलमानों का भी प्रतिनिधित्व हो

राइजिंग भारत समिट 2025 के दूसरे दिन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहुंचे, जहां उन्होंने तु्ष्टिकरण की राजनीति पर निशाना साधते हुए अपनी बात की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि तुष्टिकरण की नीति देश विभाजन के लिए जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि तुष्टिकरण की राजनीति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी चिंतित हैं। उन्होंने कहा, दो राष्ट्र के सिद्धांत पर मुस्लिम लीग खड़ी हुई थी, लेकिन पाकिस्तान में भी उसे हार का मुंह का देखना पड़ा था।

अमित शाह ने कहा भारत के मुसलमान विभाजन नहीं चाहते थे, लेकिन कांग्रेस ने विभाजन को स्वीकार किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि नीतिया देश के हित में होनी चाहिए, न कि दल के हित में। उन्होंने सीधे तौर पर देश के विभाजन के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया।

अमित शाह ने वक्फ संशोधन अधिनियम पर बोलते हैं कहा, "वक्फ के पास पहले 18 लाख एकड़ जमीन थी, 2013 के बाद वक्फ बोर्ड की जमीन 21 लाख एकड़ बढ़ गई।"


उन्होंने कहा कि ये बताता है कि 2013 के कानून में आपने ऐसे व्यवस्था की जो, वो न्यायपूर्ण नहीं है। किसी की भी भूमि को आपने वक्फ घोषित कर दिया। वक्फ बोर्ड ने 1500 साल पुराने मंदिर पर अपना दावा कर दिया था।

शाह ने कहा कि अल्पसंख्यक मुस्लिम संप्रदायों को वक्फ अधिनियम द्वारा सशक्त बनाया गया।

पुराने वक्फ कानून ने मुस्लिम महिलाओं को अधिकारों से वंचित कर दिया। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस ने 2014 के चुनावों से कुछ महीने पहले 2013 में वोट बैंक को खुश करने के लिए वक्फ विधेयक में बदलाव किए थे।

उन्होंने जोर देकर कहा, "इस बिल में मुस्लिम समाज के सभी अंगों का प्रतिनिधित्व है। पसमांदा मुसलमानों का वक्फ में कोई प्रतिनिधित्व नहीं था। वक्फ बोर्ड में महिलाओं को भी हिस्सा मिलना चाहिए।"

वहीं जब उनसे ये पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि इस सब के जरिए BJP मुस्लिम समाज में एक विश्वास पैदा कर पाएगी, ताकि वे भी उन्हें वोट करें, तो इस अमित शाह ने कहा, "हर काम वोट के लिए नहीं होता।" उन्होंने आगे कहा कि अगर ऐसा होता तो अब तक हमने इतने बड़े-बड़े फैसले किए, तो वो न कर पाते।

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