भारत में खुलेगी दुनिया की पहली वाइल्‍डलाइफ यूनिवर्सिटी, अपने जन्मदिन पर अनंत अंबानी ने रखी 'वनतारा यूनिवर्सिटी' की नींव

Vantara University : अनंत अंबानी ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि हम लोगों को कितनी करुणा, ज्ञान और कौशल के साथ तैयार करते हैं, ताकि वे हर जीव की सेवा कर सकें। उन्होंने बताया कि “वनतारा यूनिवर्सिटी” का विचार उनके निजी अनुभव से जुड़ा है

अपडेटेड Apr 10, 2026 पर 7:28 PM
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वनतारा यूनिवर्सिटी का खास ध्यान ऐसे रिसर्च पर होगा, जो सीधे जमीन पर काम आए।

Vantara University : भारत में वन्यजीव संरक्षण और पशु चिकित्सा (वेटरनरी) शिक्षा को नई दिशा देने के लिए वनतारा ने एक बड़ी पहल की है। अनंत अंबानी द्वारा स्थापित ग्लोबल वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन ऑर्गनाइजेशन, वनतारा ने जामनगर गुजरात में वनतारा यूनिवर्सिटी शुरू करने की घोषणा की है। अनंत अंबानी द्वारा स्थापित वैश्विक वन्यजीव संरक्षण संगठन वनतारा ने गुजरात के जामनगर में “वनतारा यूनिवर्सिटी” शुरू करने की घोषणा की है। यह दुनिया की पहली ऐसी यूनिवर्सिटी होगी, जो पूरी तरह वन्यजीव संरक्षण और पशु चिकित्सा विज्ञान को समर्पित होगी। वनतारा यूनिवर्सिटी की नींव पशु कल्याण, वैज्ञानिक विकास और वन्यजीवों के बेहतर भविष्य पर रखी गई है। इस संस्थान का मकसद पशु चिकित्सा, संरक्षण और वन्यजीव देखभाल के क्षेत्र में नए और सक्षम लीडर्स तैयार करना है। यह यूनिवर्सिटी अपने पाठ्यक्रम में भारत की प्राचीन ज्ञान परंपराओं को भी शामिल करेगी, ताकि शिक्षा को आधुनिक और भविष्य के हिसाब से उपयोगी बनाया जा सके।

भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का होगा मेल

वहीं इस मौके पर अनंत अंबानी ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि हम लोगों को कितनी करुणा, ज्ञान और कौशल के साथ तैयार करते हैं, ताकि वे हर जीव की सेवा कर सकें। उन्होंने बताया कि “वनतारा यूनिवर्सिटी” का विचार उनके निजी अनुभव से जुड़ा है। जब उन्होंने जानवरों को मुश्किल हालात में देखा, तो उन्हें महसूस हुआ कि उनकी देखभाल के लिए और बेहतर सुविधाओं और विशेषज्ञों की जरूरत है। अनंत अंबानी ने कहा कि यह यूनिवर्सिटी प्राचीन नालंदा यूनिवर्सिटी की भावना और “आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः” जैसे विचारों से प्रेरित है, जिसका मतलब है कि हर दिशा से अच्छे विचार हमारे पास आएं। इसका मकसद ऐसी नई पीढ़ी तैयार करना है, जो हर जीव की रक्षा और देखभाल के लिए पूरी तरह समर्पित हो।


वन्यजीव संरक्षण है असली मकसद

इस खास मौके को ध्यान में रखते हुए शिलान्यास स्थल के डिज़ाइन में ‘बिजोलिया बलुआ पत्थर’ का इस्तेमाल किया गया। ये पत्थर प्राचीन विंध्यन संरचना से लिए गए हैं और इन्हें उस भू-आधार से जोड़ा जाता है, जिसका संबंध आज के बिहार में स्थित प्राचीन नालंदा यूनिवर्सिटी से माना जाता है। यह भारत की ज्ञान और शिक्षा की पुरानी परंपरा का प्रतीक है। हिंदू परंपरा के अनुसार हुए इस शिलान्यास समारोह में शिक्षा, विज्ञान, संरक्षण और सार्वजनिक जीवन से जुड़े कई लोग शामिल हुए। इस दौरान एक खास रस्म भी की गई, जिसमें मिट्टी, पानी और पत्थरों को विधि-विधान से स्थापित किया गया। इसे शिलान्यास का प्रतीकात्मक हिस्सा माना जाता है। ये मिट्टी, पानी और पत्थर देश के अलग-अलग प्राकृतिक क्षेत्रों—जैसे जंगल, घास के मैदान, आर्द्रभूमि, सूखे इलाके और हिमालयी क्षेत्रों—से लाए गए थे। यह भारत की समृद्ध प्रकृति और जैव विविधता को दर्शाता है। वनतारा यूनिवर्सिटी का उद्देश्य अलग-अलग विषयों को एक साथ जोड़कर एक ऐसा शिक्षा सिस्टम बनाना है, जो असली दुनिया में वन्यजीव संरक्षण के काम आए। यहां फील्ड में मिले अनुभव को पढ़ाई, प्रोफेशनल ट्रेनिंग और वैश्विक स्तर पर उपयोगी तरीकों में बदला जाएगा। करुणा, विज्ञान और संरक्षण को साथ लेकर यह यूनिवर्सिटी ऐसे प्रोफेशनल तैयार करेगी, जो वन्यजीवों और पर्यावरण से जुड़ी बदलती चुनौतियों का सही तरीके से सामना कर सकें।

यूनिवर्सिटी में शामिल होंगे ये प्रोग्राम

वनतारा यूनिवर्सिटी अलग-अलग विषयों में अंडरग्रेजुएट, पोस्टग्रेजुएट, फेलोशिप और स्पेशल प्रोग्राम शुरू करेगी। इन कोर्स में वाइल्डलाइफ मेडिसिन और सर्जरी, न्यूट्रिशन, बिहेवियरल साइंस, जेनेटिक्स, एपिडेमियोलॉजी, वन हेल्थ, कंजर्वेशन पॉलिसी और एनिमल केयर एनवायरनमेंट डिजाइन जैसे विषय शामिल होंगे। यह यूनिवर्सिटी आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को स्कॉलरशिप भी देगी, ताकि वे आसानी से पढ़ाई कर सकें। यहां आधुनिक पढ़ाई की सुविधाएं, क्लिनिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और रेजिडेंशियल कैंपस जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

वनतारा यूनिवर्सिटी का खास ध्यान ऐसे रिसर्च पर होगा, जो सीधे जमीन पर काम आए। इसका एजुकेशन मॉडल जंगलों में (इन-सीटू) और बाहर (एक्स-सीटू) दोनों तरह के संरक्षण को जोड़कर तैयार किया जाएगा, ताकि प्राकृतिक आवास और वैज्ञानिक देखभाल के बीच संतुलन बना रहे। इसका मकसद ऐसे प्रोफेशनल तैयार करना है, जो वन्यजीवों की सेहत, उनकी देखभाल और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी चुनौतियों को समझकर उनका समाधान निकाल सकें। यह यूनिवर्सिटी शिक्षा, रिसर्च और नई सोच को एक साथ जोड़कर लंबे समय तक काम आने वाला ज्ञान विकसित करेगी।

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