Ankita Bhandari Murder Case: उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी मर्डर केस में शुक्रवार को कोर्ट का फैसला आया। 19 साल की अंकिता की हत्या के मामले में तीनों आरोपियों को एक स्थानीय अदालत ने दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसमें एक भाजपा नेता का बेटा भी शामिल है। हालांकि, अंकिता के परिवार का कहना है कि उन्हें अभी भी पूरा न्याय नहीं मिला है।
कोटद्वार की एक अदालत ने शुक्रवार को भाजपा से निष्कासित नेता विनोद आर्य के बेटे पुलकित आर्य को रिसॉर्ट मैनेजर सौरभ भास्कर और सहायक मैनेजर अंकित गुप्ता के साथ अंकिता की हत्या का दोषी ठहराया। यह घटना यमकेश्वर के वनतंत्रा रिसॉर्ट की है, जहां अंकिता रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थी। कोर्ट ने पुलकित आर्य पर 72,000 रुपये और बाकी दोनों दोषियों पर 62,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इस फैसले के बाद अंकिता की मां, सोनी देवी ने कहा कि उन्हें इस फैसले से कुछ राहत जरूर मिली है लेकिन यह पूरी तरह न्याय नहीं है। उनकी आंखों में आंसू थे जब उन्होंने कहा, "अब भी बड़ी लड़ाई बाकी है। यह दर्द सिर्फ एक मां ही समझ सकती है। जब तक इन लोगों को फांसी की सजा नहीं मिलती, मैं चैन से नहीं बैठूंगी।"
पहाड़ों को झकझोर देने वाला केस
अंकिता भंडारी ने 18 सितंबर, 2022 को यमकेश्वर के वनतंत्रा रिसॉर्ट में नौकरी शुरू की थी। लेकिन कुछ ही हफ्तों बाद उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस शाम उसकी हत्या हुई, उस दिन अंकिता और आरोपियों के बीच बहस हुई थी। इसके बाद पुलकित आर्य और उसके साथी उसे ऋषिकेश के पास स्थित चीला नहर में फेंककर मारना चाहते थे, ताकि उसका शव कभी न मिल सके। छह दिन बाद अंकिता का शव नहर में मिला। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि उसकी मौत पानी में डूबने से हुई, लेकिन इससे पहले उसके शरीर पर कई चोटों के निशान थे, जो बताते हैं कि उस पर हमला किया गया था।
शुरुआत में इस मामले की जांच में लापरवाही बरती गई। दरअसल, रिसॉर्ट उस इलाके में आता था जो राजस्व पुलिस के अधिकार में था, न कि सामान्य पुलिस के। इस वजह से एफआईआर दर्ज करने में देरी हुई। लेकिन जब मामला जनता में उबाल लाने लगा और दबाव बढ़ा, तब जाकर पुलिस ने कार्रवाई की।
हत्या पर लोगों का गुस्सा फूटा
अंकिता भंडारी की हत्या के बाद उत्तराखंड में लोगों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दिया। जब पुलिस आरोपी को ले जा रही थी, तब गुस्साए लोगों ने पुलिस की गाड़ियों पर हमला कर दिया और उस रिसॉर्ट को भी नुकसान पहुँचाया जहाँ अंकिता काम करती थी। सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से बने उस रिसॉर्ट को गिरा दिया। साथ ही, पुलकित आर्य के पिता विनोद आर्य को बीजेपी से निकाल दिया गया। बढ़ते जनदबाव के चलते मामला एक स्पेशल जांच टीम (SIT) को सौंप दिया गया।
ऑडियो रिकॉर्डिंग में हुआ था बड़ा खुलासा
इस दौरान सरकार की ओर से अंकिता के परिवार को 25 लाख रुपये का मुआवजा देने की पेशकश की गई। लोग तब और नाराज़ हो गए जब यह बात सामने आई कि पुलकित आर्य ने अंकिता पर 'स्पेशल सर्विस' देने का दबाव बनाया था, जो कि वेश्यावृत्ति की ओर इशारा करता है। अंकिता के लापता होने के बाद, उसके एक दोस्त पुष्प के साथ हुई बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग सामने आई, जिससे यह पता चला कि आर्य इस पूरी घटना की सच्चाई को छिपाने की कोशिश कर रहा था।
18 सितंबर 2022 की शाम को तीन आरोपी अंकिता को बहाने से ऋषिकेश ले गए। रात के समय, लौटते वक्त चीला नहर के पास गाड़ी रोकी गई। वहां तीनों आरोपियों ने शराब पी और फिर अंकिता के साथ बहस करने लगे। उसने रिसॉर्ट में चल रहे गलत काम का विरोध किया, जिससे गुस्से में आकर पुलकित ने अपने दोनों साथियों के साथ मिलकर अंकिता को नहर में धकेल दिया।
अंकिता के परिवार को अब भी इंसाफ का इंतज़ार
अपने बेटे पुलकित आर्य को “सीधा-सादा लड़का” बताकर बचाने की कोशिश करने वाले विनोद आर्य को जमकर आलोचना झेलनी पड़ी। बाद में उनका नाम एक अलग आपराधिक मामले में भी दर्ज किया गया। अंकिता की मां ने आरोप लगाया कि उन्हें एक बहाने से अस्पताल ले जाया गया था, जिससे वे अपनी बेटी के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सकीं। माता-पिता का कहना है कि अदालत का फैसला न्याय की दिशा में एक कदम ज़रूर है, लेकिन ये पूरा न्याय नहीं है। अंकिता के पिता वीरेंद्र भंडारी ने कहा, “हमारी बेटी की बेरहमी से हत्या की गई। उम्रकैद की सज़ा काफी नहीं है। हम इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे।” उन्होंने साथ ही एक अनजान “वीआईपी” और यमकेश्वर की बीजेपी विधायक की भूमिका की गहराई से जांच की मांग भी की। परिवार ने साफ कहा है कि वे तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक दोषियों को सबसे कड़ी सज़ा नहीं मिलती।