भारत खरीदेगा 5 नए S-400...सैन्य ताकत में होगा इजाफा, 2.38 लाख करोड़ के रक्षा सौदों पर मुहर

भारतीय वायु सेना ने एस-400 एयर डिफेंस सिस्टनम की पांच और स्क्वाड्रन खरीदने को मंजूरी दे दी है। यह अत्याधुनिक मिसाइल सिस्टम लगभग 400 किलोमीटर दूर तक दुश्मन के लक्ष्यों को मार गिराने में सक्षम है। बताया जा रहा है कि इसका इस्तेमाल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भी किया गया था, जहां इसने करीब 300 किलोमीटर दूर एक पाकिस्तानी विमान को निशाना बनाया था

अपडेटेड Mar 27, 2026 पर 6:44 PM
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भारत ने अपनी सैन्य शक्ति और समुद्री निगरानी क्षमताओं को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है।

भारत ने अपनी सैन्य शक्ति और समुद्री निगरानी क्षमताओं को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को दो महत्वपूर्ण रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।  रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने शुक्रवार को विभिन्न प्रस्तावों को मंजूरी दी है, जिसके तहत लगभग 2.38 लाख करोड़ रुपये की लागत के सैन्य हार्डवेयर खरीदे जाएंगे।

देश के एयर डिफेंस में शामिल होगी तुंगुस्का मिसाइल

रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना के लिए  एयर डिफेंस मिसाइल प्रणाली खरीदने को लेकर रूस की कंपनी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के साथ 445 करोड़ रुपये का समझौता किया है। मंत्रालय के अनुसार, भारतीय नौसेना के पी-8आई लंबी दूरी के समुद्री निगरानी विमान के रखरखाव के लिए बोइंग इंडिया डिफेंस प्राइवेट लिमिटेड के साथ 413 करोड़ रुपये का एक अलग अनुबंध किया गया है। सरकार ने बताया कि भारतीय सेना के लिए ‘तुंगुस्का’ वायु रक्षा मिसाइल सिस्टम खरीदे जाएंगे, जो विमान, ड्रोन और क्रूज मिसाइल जैसे हवाई खतरों से बचाव में मदद करेंगे। इससे भारत की हवाई सुरक्षा और मजबूत होगी, साथ ही भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग भी और गहरा होगा।


वहीं, पी-8आई विमानों के रखरखाव से जुड़ा यह समझौता ‘बाय इंडियन’ श्रेणी के तहत किया गया है, जिसमें 100 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल होगा। इससे इन विमानों की मरम्मत और देखभाल देश में ही बेहतर तरीके से हो सकेगी। पी-8आई एक आधुनिक और बहु-उद्देश्यीय लंबी दूरी का समुद्री निगरानी विमान है, जो पनडुब्बियों की पहचान और समुद्री सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता है। फिलहाल भारतीय नौसेना ऐसे 12 विमानों का इस्तेमाल कर रही है।

एमटीए (मध्यम परिवहन विमान) भारतीय वायु सेना के पुराने हो चुके मुख्य परिवहन विमान एएन-32 की जगह लेगा। यह नया विमान 18 से 30 टन तक का भार ले जाने में सक्षम होगा। इसके आने से आईएल-76 और एएन-32 के बीच जो क्षमता का अंतर है, उसे पूरा करने में मदद मिलेगी। इस नए विमान की दौड़ में सबसे आगे ब्राज़ील की कंपनी एम्ब्रेयर का सी-390 विमान है, जिसकी भार उठाने की क्षमता करीब 26 टन है। इसके अलावा यूरोप की कंपनी एयरबस का ए400एम विमान भी एक मजबूत दावेदार है, जो लगभग 37 टन तक का भार ले सकता है। वहीं, लॉकहीड मार्टिन का सी-130जे विमान भी इस प्रतिस्पर्धा में शामिल है। यह वही विमान है जिसे भारतीय वायु सेना पहले से इस्तेमाल कर रही है।

S-400 के पांच नए स्क्वाड्रन खरीदने की मंजूरी

भारतीय वायु सेना ने एस-400 एयर डिफेंस सिस्टनम की पांच और स्क्वाड्रन खरीदने को मंजूरी दे दी है। यह अत्याधुनिक मिसाइल सिस्टम लगभग 400 किलोमीटर दूर तक दुश्मन के लक्ष्यों को मार गिराने में सक्षम है। बताया जा रहा है कि इसका इस्तेमाल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भी किया गया था, जहां इसने करीब 300 किलोमीटर दूर एक पाकिस्तानी विमान को निशाना बनाया था। फिलहाल वायु सेना के पास एस-400 की तीन स्क्वाड्रन हैं और दो अन्य स्क्वाड्रन इस साल मिलने की उम्मीद है।

इसके अलावा, रक्षा मंत्रालय की शीर्ष खरीद संस्था ने स्वदेशी ‘धनुष’ तोप प्रणाली की 300 और इकाइयों की खरीद को भी मंजूरी दी है। यह पहले दिए गए ऑर्डर का अगला हिस्सा है। इससे पहले भारतीय सेना के पास ऐसी 114 तोपें मौजूद थीं। साथ ही टैंकों के लिए कवच-भेदी (आर्मर-पियर्सिंग) गोला-बारूद की खरीद को भी पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अलग-अलग तरह के ड्रोन की खरीद, सुखोई-30 एमकेआई बेड़े के लिए एएल-31 जेट इंजनों की मरम्मत (ओवरहॉल), और तटरक्षक बल के लिए भारी होवरक्राफ्ट खरीदने का रास्ता भी साफ कर दिया है।

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