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Justice Swarna Kanta Vs Kejriwal: 'न्याय मिलने की उम्मीद टूट गई..'; जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की कोर्ट में अरविंद केजरीवाल नहीं होंगे पेश, 'सत्याग्रह' का किया ऐलान

Justice Sharma Vs Kejriwal: आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को पत्र लिखकर कहा कि वह आबकारी मामले में व्यक्तिगत रूप से या वकील के माध्यम से उनकी अदालत में पेश नहीं होंगे। दिल्ली के पूर्व सीएम ने कहा कि वह महात्मा गांधी के सत्याग्रह का अनुसरण करेंगे

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Apr 27, 2026 पर 10:43 AM
Justice Swarna Kanta Vs Kejriwal: 'न्याय मिलने की उम्मीद टूट गई..'; जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की कोर्ट में अरविंद केजरीवाल नहीं होंगे पेश, 'सत्याग्रह' का किया ऐलान
Justice Sharma Vs Kejriwal: अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के आदेश के खिलाफ वह सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे

Justice Swarna Kanta Sharma Vs Arvind Kejriwal: आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को एक लेटर लिखकर कहा कि वह दिल्ली एक्साइज पॉलिसी केस की सुनवाई के लिए व्यक्तिगत रूप से या किसी वकील के माध्यम से उनके समक्ष पेश नहीं होंगे। केजरीवाल ने लेटर में लिखा, "जस्टिस स्वर्ण कांता से न्याय मिलने की मेरी उम्मीद टूट गई है। इसलिए, मैंने महात्मा गांधी के सत्याग्रह के मार्ग का अनुसरण करने का निर्णय लिया है।"

AAP प्रमुख केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने यह निर्णय अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर लिया है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा कि वह जस्टिस शर्मा के फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का अधिकार है।

केजरीवाल ने कहा, "मैंने अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनने के बाद यह फैसला लिया है। मैं जस्टिस स्वर्ण कांता के फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार सुरक्षित रखूंगा।" कुछ दिनों पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने केजरीवाल की उस अर्जी को मंजूरी देने से मना कर दिया था जिसमें जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को दिल्ली एक्साइज पॉलिसी मामले की सुनवाई से अलग करने की मांग की गई थी।

अर्जी में अरविंद केजरीवाल ने दावा किया कि इस बात की गंभीर, सच्ची और वाजिब आशंका थी कि उनके सामने इस मामले की सुनवाई निष्पक्ष और न्यूट्रल नहीं होगी। हालांकि, जस्टिस शर्मा ने साफ किया कि सोच या बेबुनियाद आशंका के आधार पर सुनवाई से अलग नहीं किया जा सकता। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी कोशिशों से ज्यूडिशियरी में लोगों का भरोसा कम होने का खतरा है।

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