'भारत में मुसलमानों के खिलाफ अत्याचार...': एग्जाम में विवादित सवाल पर घमासान, जामिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर सस्पेंड

Delhi News: यह विवाद तब शुरू हुआ जब जामिया यूनिवर्सिटी में BA (ऑनर्स) सोशल वर्क सेमेस्टर I परीक्षा 2025 में "भारत में सामाजिक समस्याएं" नाम के पेपर में एक सवाल पूछा गया। इसमें कहा गया, "भारत में मुस्लिम अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचारों पर उचित उदाहरण देते हुए चर्चा करें" प्रोफेसर वीरेंद्र बालाजी शहारे ने इस परीक्षा पेपर को तैयार किया था

अपडेटेड Dec 24, 2025 पर 3:05 PM
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Delhi News: एग्जाम पेपर तैयार करने वाले प्रोफेसर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है

Delhi News: दिल्ली की मशहूर जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI) यूनिवर्सिटी ने एक सीनियर प्रोफेसर को सस्पेंड कर दिया गया है। यह कार्रवाई तब हुई जब अंडरग्रेजुएट सेमेस्टर परीक्षा में "भारत में मुसलमानों के खिलाफ अत्याचार" से जुड़े एक विवादित सवाल पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। इसके बाद छात्रों ने कई शिकायतें कीं। इसके बाद इस्लामिया में BA(Hons) सोशल वर्क के सेमेस्टर 1 की परीक्षा में पूछे गए एक सवाल से जुड़े विवाद का मामले में यूनिवर्सिटी ने इंटरनल जांच कमेट बनाई है। इस कमेटी ने अपनी जांच शुरू भी कर दिया है। साथ ही पेपर बनाने वाले प्रोफेसर को फिलहाल सस्पेंड कर दिया है।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब BA (ऑनर्स) सोशल वर्क सेमेस्टर I परीक्षा 2025 में "भारत में सामाजिक समस्याएं" नाम के पेपर में एक सवाल पूछा गया। इसमें कहा गया, "भारत में मुस्लिम अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचारों पर उचित उदाहरण देते हुए चर्चा करें" प्रोफेसर वीरेंद्र बालाजी शहारे ने इस परीक्षा पेपर को तैयार किया था। यूनिवर्सिटी को शिकायतें मिलने के बाद उन्हें सस्पेंड कर दिया गया है। साथ ही उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है।

यूनिवर्सिटी ने कहा कि वह इस मामले में पुलिस से FIR दर्ज करने को कहेगी। यह तब सामने आया जब वीरेंद्र बालाजी शहारे की तस्वीरें ऑनलाइन वायरल हुईं। इससे यूजर्स ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और सवाल पूछने के तरीके की आलोचना की। आरोप लगाया गया कि यह राजनीतिक या सांप्रदायिक पूर्वाग्रह को दिखाता है। यह मुद्दा तब और बढ़ गया जब सूचना और प्रसारण मंत्रालय में वरिष्ठ सलाहकार कंचन गुप्ता ने इस सवाल को दुर्भावनापूर्ण इरादे वाला करार दिया।


उन्होंने कहा, "जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने सेमेस्टर 1 के क्वेश्चन पेपर में बेहद भड़काऊ और सांप्रदायिक रूप से ध्रुवीकरण करने वाले सवाल के लिए सोशल वर्क विभाग के प्रोफेसर को सस्पेंड कर दिया है। जांच के आदेश दिए गए हैं। FIR दर्ज की जा रही है। JMI एक केंद्रीय विश्वविद्यालय है जिसमें सभी समुदाय के छात्र पढ़ते हैं। यह सवाल दुर्भावनापूर्ण इरादे को दिखाता है।"

मंगलवार को JMI ने कहा कि एंड-सेमेस्टर पेपर की सामग्री के संबंध में शिकायतें मिली हैं। इसमें कहा गया है, "सक्षम प्राधिकारी, JMI ने सोशल वर्क विभाग के प्रोफेसर वीरेंद्र बालाजी शहारे की ओर से लापरवाही और गैरजिम्मेदारी को गंभीरता से लिया है। इस मामले में पेपर सेटर को अगले आदेश तक सस्पेंड कर दिया गया है। साथ ही नियमों के अनुसार FIR दर्ज की जाएगी।"

बयान में आगे कहा गया है कि शहारे को निलंबन अवधि के दौरान नई दिल्ली में अपने मुख्यालय से बाहर जाने की अनुमति नहीं होगी। जब तक कि उनके खिलाफ जांच पूरी नहीं हो जाती। यूनिवर्सिटी ने अभी तक पेपर पर उठाई गई विशिष्ट आपत्तियों का डिटेल्स आधिकारिक तौर पर जारी नहीं किया है।

प्रोफेसर शहारे कौन हैं?

JMI की वेबसाइट पर शहारे के CV के अनुसार, उन्हें 22 साल से अधिक का टीचिंग और रिसर्च का अनुभव है। उनकी मुख्य रुचियां ग्रामीण और शहरी सामुदायिक विकास, दलित और आदिवासी अध्ययन, सामाजिक बहिष्कार और समावेशन और शिक्षा और सामाजिक विकास हैं। वह वर्तमान में जामिया मिल्लिया इस्लामिया में सोशल वर्क विभाग UGC सेंटर फॉर एडवांस्ड स्टडी में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं।

उन्होंने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली के सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोशल सिस्टम्स, स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज से Ph.D और M.Phil की डिग्री हासिल की है। साथ ही टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज मुंबई से M.A (सोशल वर्क) किया है। उन्होंने पहले जामिया मिल्लिया इस्लामिया, दिल्ली यूनिवर्सिटी और नागपुर यूनिवर्सिटी  में पढ़ाया है।

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शहारे ने कई भूमिकाओं में काम किया है। इसमें जामिया में सोशल वर्क विभाग में PhD कोऑर्डिनेटर का पद भी शामिल है। उनके रिसर्च पेपर सामाजिक बहिष्कार, हाशिए पर पड़े समूहों के खिलाफ हिंसा, प्रवासी मजदूरों, दलित महिलाओं और मानवाधिकारों पर केंद्रित हैं।

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