Bageshwar Dham Sarkar: केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश के छतरपुर में स्थित बाबा बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की संस्था को FCRA (Foreign Contribution Regulation Act) के तहत विदेशी फंड लेने की अनुमति दे दी है। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बागेश्वर धाम जन सेवा समिति को फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट के तहत इसके लिए रजिस्ट्रेशन दे दिया है। यह समिति मशहूर धर्मगुरु पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की धार्मिक संस्था है। इस मंजूरी के बाद उनकी संस्था अब विदेशों से आधिकारिक रूप से दान ले सकेगी।
भारत समेत दुनियाभर में बागेश्वर धाम के लाखों भक्त हैं। बागेश्वर धाम जन सेवा समिति एक धार्मिक संस्था है जिसका नेतृत्व धर्मगुरु धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री करते हैं। वह देश में 'हिंदू राष्ट्र' स्थापित करना चाहते हैं। 29 साल के शास्त्री को अक्सर राजनेता अपने पक्ष में करने की कोशिश करते हैं। वे धार्मिक मामलों पर अपने भड़काऊ बयानों के लिए जाने जाते हैं। उनकी वेबसाइट पर भारत के अंदर से दान इकट्ठा करने के लिए एक अलग सेक्शन है।
विदेशी दान पर क्या है नियम?
अगर कोई गैर-सरकारी संगठन (NGO) या कोई संस्था विदेशी दान लेना चाहती है, तो उसके लिए FCRA के तहत रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी होता है। इसके बाद ही NGO सामाजिक, शैक्षिक, धार्मिक, आर्थिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए विदेशी फंड ले सकते हैं। कम से कम एक या एक से ज्यादा कैटेगरी के लिए रजिस्टर्ड हो सकते हैं।
मध्य प्रदेश के छतरपुर में स्थित 'श्री बागेश्वर जन सेवा समिति गढ़ा' को सांस्कृतिक, आर्थिक, शैक्षिक और सामाजिक कैटैगरी के अलावा 'धार्मिक (हिंदू)' कार्यक्रम के तहत रजिस्टर्ड किया गया है। 15 अप्रैल तक, 38 NGO को FCRA रजिस्ट्रेशन दिया गया है। इनमें से छह ने 'धार्मिक (हिंदू)' को उन कार्यक्रमों में से एक बताया है जिनके लिए विदेशी फंड की जरूरत है।
इन संस्थाओं को भी मिली मंजूरी
'द हिंदू' के मुताबिक, बागेश्वर धाम के अलावा, इस कैटेगरी के तहत रजिस्टर्ड अन्य संस्थाओं में पश्चिम बंगाल के बोलपुर और बिहार के पूर्णिया में रामकृष्ण मिशन, दिल्ली में 'दिव्य ज्योति जागृति संस्थान', कर्नाटक के धर्मस्थल में 'द इंस्टीट्यूशन' और उत्तर प्रदेश के आगरा में 'राधा स्वामी सत्संग' शामिल हैं।
FCRA रजिस्ट्रेशन पांच साल के लिए वैध होता है, जिसके बाद NGO को इसे रिन्यू करवाने के लिए आवेदन करना होता है। 2015 से अब तक 18,000 से ज्यादा NGO के FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द किए जा चुके हैं। 15 अप्रैल तक, देश में 14,538 FCRA-रजिस्टर्ड NGO सक्रिय हैं।
नए विधेयक पर सरकार को झटका
संसद के बजट सत्र के दौरान केंद्र सरकार ने 2010 के अधिनियम में संशोधन करने के लिए 'फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) संशोधन विधेयक, 2026' पेश करने का प्रस्ताव रखा। हालांकि, विपक्षी दलों के हंगामे के बाद, इस पर चर्चा और इसे पारित करने का काम टाल दिया गया।
चुनावी राज्यों तमिलनाडु और केरल के मुख्यमंत्रियों एवं ईसाई समूहों ने इस विधेयक का विरोध किया। यह मंत्रालय को किसी NGO की संपत्ति और परिसंपत्तियों को अपने कब्ज में लेने का अधिकार देता है, यदि उस NGO का FCRA पंजीकरण रद्द या निलंबित कर दिया जाता है।