Women’s Reservation Bill: महिला आरक्षण बिल और परिसीमन पर सरकार-विपक्ष में क्यों है तकरार? संसद में आज टकराव के आसार
Women’s Reservation Bill: महिला आरक्षण बिल और परिसीमन से जुड़े विधेयकों को लेकर आज (16 अप्रैल) से होने वाले संसद के विशेष सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव देखने को मिलेगा। विपक्षी पार्टियों ने इस कदम की मंशा पर सवाल उठाए। जबकि सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विपक्ष पर अतीत में महिलाओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया
Womens Reservation Bill: महिला आरक्षण विधेयक पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं
Women’s Reservation Bill and Delimitation 2026: आज यानी गुरुवार (16 अप्रैल) से शुरू हो रहे संसद का तीन दिन का विशेष सत्र काफी हंगामेदार रहने वाला है। इसमें केंद्र सरकार महिला आरक्षण अधिनियम को लागू करने के लिए जरूरी संशोधनों को पास करवाने की कोशिश करेगी। वहीं, विपक्ष परिसीमन के लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाने का मुद्दा उठाएगा। कांग्रेस, AAP, RJD और DMK जैसी विपक्षी पार्टियां इस प्रक्रिया को तब तक टालने की मांग कर सकती हैं, जब तक 2021 की जनगणना के आंकड़े उपलब्ध नहीं हो जाते। समाजवादी पार्टी और RJD भी "कोटे के अंदर कोटा" की अपनी पुरानी मांग को उठा सकती हैं।
इन पार्टियों ने मांग की है कि प्रस्तावित कानून के तहत दिए जा रहे आरक्षण के भीतर ही OBC महिलाओं को भी एक अलग कोटा दिया जाए। वहीं, सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस कदम को ऐतिहासिक बताते हुए समर्थन दिया। महिला आरक्षण कानून (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को 2029 के आम चुनाव से पहले लागू करने के लिए परिसीमन करके लोकसभा सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर लगभग 850 तक की जा सकती है।
आज पेश होगा बिल
लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को मूर्त रूप देने के लिए बृहस्पतिवार को एक विधेयक संसद में पेश किया जाएगा, जिसमें संसद के निचले सदन में सदस्यों की मौजूदा संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही, सरकार परिसीमन आयोग के गठन के लिए भी एक विधेयक तथा इनसे संबंधित केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक), 2026 लाने की तैयारी में है।
संविधान संशोधन विधेयक के मसौदे के अनुसार, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए सीटें बढ़ाई जाएंगी। 16 से 18 अप्रैल तक संसद का तीन-दिवसीय विशेष सत्र में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (महिला आरक्षण कानून) में संशोधन लाकर 2029 से इसके क्रियान्वयन का रास्ता साफ किया जाएगा।
परिसीमन के प्रावधानों के खिलाफ वोट करेगा विपक्ष
कांग्रेस सहित विपक्ष के कई प्रमुख दलों ने लोकसभा में महिला आरक्षण लागू करने से संबंधित संवैधानिक संशोधन विधेयक को पेश किए जाने से एक दिन पहले बुधवार को कहा कि वे महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के पक्ष में हैं। लेकिन इस विधेयक के परिसीमन के प्रावधानों का पुरजोर विरोध करेंगे क्योंकि ये खतरनाक हैं।
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर हुई विपक्षी दलों की बैठक में नारीशक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन और परिसीमन संबंधी विधेयक पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान सर्वसम्मति से यह फैसला किया गया कि वे परिसीमन के प्रावधानों के खिलाफ एकजुट होकर वोट करेंगे।
बैठक मे इन नेताओं ने लिया हिस्सा
बैठक में खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल और जयराम रमेश, समाजवादी पार्टी के रमाशंकर राजभर और सनातन पांडेय, द्रमुक नेता टी. आर. बालू, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला, तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद सागरिका घोष, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव, शिवसेना (UBT) के संजय राउत एवं अरविंद सावंत, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले, आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह सहित अन्य विपक्षी नेता शामिल हुए। समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव, शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने डिजिटल माध्यम से बैठक में भाग लिया।
क्या है विपक्ष की मांग?
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों के आधार पर वर्ष 2029 से महिला आरक्षण लागू किया जाए। बैठक के बाद खड़गे ने कहा, "हम सभी महिला आरक्षण विधेयक के पक्ष में हैं। हालांकि, जिस तरह से इसे लाया गया है वह संदिग्ध है और हमें इस पर गंभीर आपत्ति है। यह राजनीति से प्रेरित है। मोदी सरकार विपक्षी दलों को निशाना बनाने और दबाने के लिए इस तरह से काम कर रही है।"
उनका कहना था, "हमने महिला आरक्षण विधेयक का लगातार समर्थन किया है। इस बात पर जोर दिया है कि इसे पहले पारित संशोधन के आधार पर लागू किया जाना चाहिए।" खड़गे ने आरोप लगाया कि लगता है कि परिसीमन पर सरकार कुछ गलत मंशा के साथ कदम बढ़ा रही है। उन्होंने कहा, "इसलिए सभी विपक्षी दल एकजुट होकर संसद में संघर्ष करने जा रहे हैं। मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि हम महिला आरक्षण विधेयक के खिलाफ नहीं हैं।"
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा, "साल 2023 में अनुच्छेद 334(A) को संविधान में शामिल किया गया था। इसमें सर्वसम्मति से महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देने की बात की गई थी। हम चाहते हैं कि उस प्रावधान को तुरंत लागू किया जाए।" उन्होंने कहा, "हमारी मांग 2023 में भी यही थी कि इस प्रावधान को 2024 के लोकसभा चुनाव से ही लागू किया जाए। लेकिन सरकार ने जनगणना और परिसीमन की शर्त लगा दी थी। लेकिन अब सरकार पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु चुनाव प्रचार के बीच ये तीन विधेयक ला रही है।"
विपक्ष ने परिसीमन को बताया 'खतरनाक'
रमेश ने कहा, "ये परिसीमन बड़ा खतरनाक है। गृह मंत्री और सरकार के मंत्रियों ने कहा है कि लोकसभा में 50 प्रतिशत सीट बढ़ेंगी। ये समानुपातिक तौर पर सभी राज्यों के लिए लागू होगा। लेकिन ये बात इस विधेयक में शामिल नहीं है। इस विधेयक के आने से दक्षिण भारत के राज्यों, उत्तर-पश्चिमी भारत और पूर्वोत्तर के राज्यों का समानुपात घटेगा। बार-बार समानुपात की बात की जा रही है, लेकिन वो परिसीमन के प्रावधानों में कहीं दिख नहीं रहा है।"
उन्होंने दावा किया कि परिसीमन आयोग ने जम्मू-कश्मीर और असम में जैसा काम किया है। उससे साफ है कि यह आयोग एक हथियार है, जिससे वे (BJP) बहुमत हासिल करेंगे। इसके बाद, रमेश ने X पर एक पोस्ट में कहा, "संविधान संशोधन विधेयक को पारित होने से रोकने के लिए विपक्ष हरसंभव कदम उठाएगा, खास तौर पर इस विधेयक के खिलाफ पूरी ताकत झोंकी जाएगी। देश को एक बड़े राजनीतिक भूचाल के लिए तैयार रहना चाहिए।"
कौन सा तीन बिल पेश होगा?
केंद्र सरकार ने साल 2029 तक महिला आरक्षण को लागू करने और लोकसभा में सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने के लिए तीन विधेयकों को गुरुवार को लोकसभा में पेश किए जाने के लिए सूचीबद्ध किया है। बुलेटिन के मुताबिक, 'संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026', 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'केंद्र-शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक), 2026' को बहस के लिए लोकसभा में पेश किया जाएगा।
बुलेटिन के अनुसार, पहले दो विधेयक जहां केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल पेश करेंगे। वहीं, तीसरा विधेयक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन के पटल पर रखेंगे। बुलेटिन में कहा गया है कि लोकसभा की कार्य मंत्रणा समिति ने बहस के लिए 18 घंटे का समय आवंटित किया है। यह बहस शुक्रवार को भी जारी रह सकती है। लोकसभा में पारित होने के बाद ये विधेयक राज्यसभा के पास जाएंगे।