Banda Heatwave: 48°C टेंप्रेचर वाला यूपी का बांदा धरती की सबसे गर्म जगहों की लिस्ट में लगातार शामिल, कहीं बंजर न हो जाए! वैज्ञानिकों के होश उड़े ये वजहें जानकर

Banda Heatwave: उत्तर प्रदेश का बुंदेलखंड इलाका इस समय कुदरत की दोहरी मार झेल रहा है। बांदा जिले के मौसमी हालात ने मौसम वैज्ञानिकों को हैरत में डाल दिया है। बांदा सिर्फ भारत का ही नहीं बल्कि इस समय दुनिया की सबसे गर्म जगहों की लिस्ट में टॉप पर है।

अपडेटेड May 21, 2026 पर 9:40 AM
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48°C टेंप्रेचर वाला यूपी का बांदा धरती की सबसे गर्म जगहों की लिस्ट में लगातार शामिल

Banda Heatwave: उत्तर प्रदेश का बुंदेलखंड इलाका इस समय कुदरत और इंसानी गलतियों की दोहरी मार झेल रहा है। बांदा जिले के मौसमी हालात ने मौसम वैज्ञानिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों को हैरत में डाल दिया है। बांदा सिर्फ उत्तर प्रदेश या भारत का ही नहीं बल्कि इस समय दुनिया की सबसे गर्म जगहों की लिस्ट में लगातार टॉप पर बना हुआ है। बुधवार को बांदा का पारा 48 डिग्री सेल्सियस के खौफनाक स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले भी यहां तापमान 47.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। अब आशंका जताई जा रही है कि बांदा जल्द ही 10 जून 2019 को दर्ज किए गए अपने ऑल-टाइम रिकॉर्ड (49.2 डिग्री सेल्सियस) को भी तोड़ सकता है। आखिर बांदा में मौसम का यह जानलेवा मिजाज क्यों बना हुआ है? आइए समझते हैं इसकी पीछे की वजह।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के लखनऊ आंचलिक केंद्र ने बांदा और दक्षिणी उत्तर प्रदेश के कई जिलों के लिए हीटवेव का रेड अलर्ट जारी किया है। मौसम वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों का कहना है कि बांदा में पड़ रही यह गर्मी सिर्फ एक अस्थायी मौसमी घटना नहीं है, बल्कि यह धीरे-धीरे मैन-मेड हीट आइलैंड यानी इंसानों द्वारा निर्मित एक ऐसी भट्टी में तब्दील हो रहा है जहां से गर्मी बाहर नहीं निकल पा रही है।

मौसम एक्सपर्ट्स के होश उड़ाने वाली 5 बड़ी वजहें:


1. वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (पश्चिमी विक्षोभ) का बेअसर होना

IMD लखनऊ केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक मोहम्मद दानिश के मुताबिक इस महीने की शुरुआत में आए पश्चिमी विक्षोभ के कारण उत्तर भारत के कई हिस्सों में आंधी-बारिश हुई और तापमान गिरा, लेकिन बुंदेलखंड का यह इलाका इससे पूरी तरह अछूता रह गया। दानिश ने बताया कि दक्षिणी उत्तर प्रदेश में इसका प्रभाव सबसे तीव्र है क्योंकि राहत देने वाले सिस्टम का बुंदेलखंड पर कोई असर नहीं पड़ा। इसके चलते बांदा जैसे जिले पहले से ही बढ़े हुए तापमान के साथ इस भीषण लू के दौर में दाखिल हुए।

2. थार रेगिस्तान की हवाएं और पथरीली जमीन का डबल अटैक

बांदा की भौगोलिक स्थिति वैसे ही अर्ध-शुष्क है। थार मरुस्थल से आने वाली 20 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार वाली शुष्क और गर्म उत्तर-पश्चिमी हवाएं इस क्षेत्र को और तपा रही हैं। इसके अलावा यहां की पथरीली जमीन दिन के समय सूरज की गर्मी को तेजी से सोखती है और रात में बेहद धीमी गति से छोड़ती है, जिससे रातें भी भयंकर गर्म हो रही हैं।

3. केन नदी में अंधाधुंध बालू खनन (Sand Mining)

बांदा के सुलगने की सबसे बड़ी वजहों में से एक केन नदी बेसिन में बड़े पैमाने पर होने वाला अवैध और अंधाधुंध बालू खनन है। एक अनुमान के मुताबिक, इस इलाके से रोजाना 2,000 से 3,000 ट्रक बालू और मौरंग निकाला जा रहा है। पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित और जल संरक्षण विशेषज्ञ उमा शंकर पांडेय ने बताया कि अत्यधिक खनन ने नदी के प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम को नष्ट कर दिया है। बालू पानी को रोककर रखती थी और भूजल को रिचार्ज करती थी, लेकिन अब उसकी जगह केवल चट्टानें बची हैं जो गर्मी को और बढ़ा रही हैं। इसके चलते गांवों में कुएं सूख गए हैं और वाटर लेवल पाताल में चला गया है।

4. सिर्फ 3% बचा ग्रीन कवर, 15% जंगल गायब

बांदा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, लखनऊ यूनिवर्सिटी, बीएचयू (BHU) और रोहिलखंड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक हालिया संयुक्त अध्ययन में बेहद डराने वाले आंकड़े सामने आए हैं। बांदा में इस समय सिर्फ 3% ग्रीन कवर बचा है, जो पूरे यूपी में सबसे कम है। साल 2005 में जहां यहां 120 वर्ग किलोमीटर में जंगल थे, वो अब घटकर महज 95 वर्ग किलोमीटर (15% से ज्यादा की गिरावट) रह गए हैं।

5. विशियस सर्कल ऑफ हीट यानी गर्मी का दुष्चक्र

लखनऊ यूनिवर्सिटी के जियोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर ध्रुव सेन सिंह के अनुसार, बांदा इस समय 'विशियस सर्कल ऑफ हीट' में फंस चुका है। जंगलों की कटाई, नदियों का सूखना, स्टोन क्रेशर इकाइयों से उड़ने वाली धूल का पेड़-पौधों पर जमना और नमी का स्तर लगभग शून्य हो जाना, इन सबने मिलकर बांदा को एक ऐसा हीट आइलैंड बना दिया है जहां दिनभर सतह तपती है और रात में ठंडी होने से पहले ही अगली खौफनाक सुबह शुरू हो जाती है।

थपकी मारती लू से थम गई जिंदगी

बांदा कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञान विभाग के प्रमुख प्रो. दिनेश साहा ने चेतावनी दी है कि यदि पर्यावरण के इस तरह हो रहे दोहन को तुरंत नहीं रोका गया, तो अगले दो दशकों में बांदा का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह बंजर हो जाएगा। फिलहाल इस झुलसाने वाली गर्मी ने बांदा में जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है। किसानों और मजदूरों को धूप से बचने के लिए अपने काम के घंटे बदलने पड़ रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि दोपहर में फील्ड में निकलना अब पूरी तरह असंभव हो गया है। मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले कई दिनों तक यह टॉर्चर जारी रहेगा और तापमान 44 से 48 डिग्री के बीच बना रहेगा।

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