Bharat Bandh 12 February: बैंक, स्कूल और ऑफिस... 12 फरवरी को भारत बंद के दौरान क्या खुलेगा और क्या रहेगा बंद?

Bharat Bandhi: यूनियनों ने सरकारी विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों और निजी संस्थानों को हड़ताल की नोटिस दी है। ग्रामीण और शहरी इलाकों में जिला और ब्लॉक स्तर पर अभियान भी चलाए गए हैं। यूनियनों का दावा है कि भाजपा शासित राज्यों में भी बंद का असर दिखेगा

अपडेटेड Feb 11, 2026 पर 6:30 PM
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Bharat Bandh 12 February: बैंक, स्कूल और ऑफिस... 12 फरवरी को भारत बंद के दौरान क्या खुलेगा और क्या रहेगा बंद?

10 से ज्यादा ट्रेड यूनियन और किसान संगठनों ने 12 फरवरी को भारत बंद का आह्वान किया है। यह बंद केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ बुलाया गया है। यूनियनों का दावा है कि इस हड़ताल में देशभर से करीब 30 करोड़ मजदूर शामिल हो सकते हैं। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) की महासचिव अमरजीत कौर ने कहा कि इस बार भागीदारी पिछले आंदोलनों से ज्यादा हो सकती है। उन्होंने बताया कि 9 जुलाई 2025 के प्रदर्शन में करीब 25 करोड़ लोग शामिल हुए थे।

यूनियनों के मुताबिक, 600 से ज्यादा जिलों में बंद का असर पड़ सकता है। पिछले साल यह असर लगभग 550 जिलों तक सीमित था।

यह हड़ताल केंद्र की “मजदूर विरोधी, किसान विरोधी और कॉरपोरेट समर्थक नीतियों” के खिलाफ बुलाई गई है। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM), कृषि मजदूर संगठन, छात्र और युवा संगठन भी इस बंद का समर्थन कर रहे हैं।


क्यों बुलाया भारत बंद और क्यों हो रही हड़ताल?

अलग-अलग ट्रेड यूनियनों (मजदूर संगठनों) ने सरकार की कुछ नीतियों के खिलाफ देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। उनका मुख्य उद्देश्य चार नए लेबर कोड को रद्द करवाना और किसानों व मजदूरों को प्रभावित करने वाली नीतियों को वापस लेना है।

उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

  • लेबर कोड की वापसी: मजदूर संगठनों का मानना है कि नए चार लेबर कोड मजदूरों के अधिकारों को कम करते हैं, इसलिए इन्हें तुरंत वापस लिया जाए।
  • मनरेगा (MGNREGS) में सुधार: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को फिर से मजबूत करने और इसमें बजट बढ़ाने की मांग।
  • सिविल सर्विस नीतियों का विरोध: उन सरकारी नीतियों को वापस लेना, जिन्हें सिविल सेवाओं को कमजोर करने वाला माना जा रहा है।
  • पुरानी पेंशन योजना (OPS): नई पेंशन योजना की जगह पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme) को फिर से लागू करने की मांग।
  • नई शिक्षा नीति (NEP 2020) का विरोध: शिक्षा नीति 2020 को वापस लेने की मांग।

इसके अलावा, संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) जैसे किसान संगठनों ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर भी चिंता जताई है। उनका आरोप है कि इस समझौते की शर्तों से भारतीय किसानों के हितों को नुकसान पहुंच सकता है।

क्या रह सकता है बंद?

  • सरकारी बैंक और बीमा कार्यालय
  • कुछ राज्यों में राज्य परिवहन बस सेवाएं
  • सरकारी दफ्तर और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयां
  • औद्योगिक इकाइयां और मैन्युफैक्चरिंग हब
  • कोयला, स्टील और दूसरे प्रमुख सेक्टर (स्थानीय भागीदारी पर निर्भर)
  • विरोध वाले इलाकों में MGNREGA के तहत ग्रामीण रोजगार कार्य

इन सेवाओं पर नहीं पड़ेगा भारत बंद का असर

  • अस्पताल और इमरजेंसी सेवाएं
  • एंबुलेंस और जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं
  • मेट्रो सर्विस (स्थानीय प्रशासन के फैसले पर निर्भर)
  • प्राइवेट ऑफिस और IT कंपनियां
  • स्कूल और कॉलेज (राज्य सरकार के निर्णय पर निर्भर)
  • दूध, दवाइयों और अन्य जरूरी सामान की सप्लाई

यूनियनों ने सरकारी विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों और निजी संस्थानों को हड़ताल की नोटिस दी है। ग्रामीण और शहरी इलाकों में जिला और ब्लॉक स्तर पर अभियान भी चलाए गए हैं।

यूनियनों का दावा है कि भाजपा शासित राज्यों में भी बंद का असर दिखेगा। उन्होंने कहा कि ओडिशा और असम में व्यापक असर की संभावना है।

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