IT मंत्रालय ने डीप फेक और AI कंटेंट से निपटने के लिए जारी गाइडलाइंस में यूजर्स की भी जिम्मेदारी तय की है। यूजर्स को बताना होगा कि कंटेंट AI जनरेटेड तो नहीं है। साथ ही कंपनियों को हर 3 महीने में यूजर्स को चेतावनी भी देनी होगी। IT मंत्रालय ने गाइडलाइंस में क्या क्या कहा है, पूरी डिटेल्स बताते हुए सीएनबीसी-आवाज़ संवाददाता असीम मनचंदा ने कहा कि AI और डीप फेक रूल्स पर IT मंत्रालय ने FAQs जारी किए हैं। AI कंटेंट से निपटने के लिए यूजर्स की भी जिम्मेदारी तय की गई है।
यूजर्स को देना होगा कंटेंट AI नहीं होने का डिक्लेरेशन
अब यूजर्स को कंटेंट AI नहीं होने का डिक्लेरेशन देना होगा। कंपनियों को AI डिटेक्शन सॉफ्टवेयर लगाने होंगे। AI से बने कंटेंट की लेबलिंग करनी होगी। कंपनियों को हर 3 महीने में पॉलिसी अपडेट देना होगा। डीप फेक अपलोड करने वाले उपभोक्ता को चेतावनी देनी होगी। वॉइस क्लोन करने पर भी चेतावनी दी जाएगी। शिकायत मिलने पर न्यूड और सेक्शुअल कंटेंट 2 घंटे में हटाना होगा।
भ्रामक और गुमराह करने वाले कंटेंट पर ज्यादा फोकस
आईटी मंत्रालय द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 में किए गए संशोधन के तहत सरकार और नियामक संस्थाएं एआई से बनाए गए कंटेंट, जैसे डीपफेक, पर नजर रख सकेंगी और जरूरत पड़ने पर उसे नियंत्रित कर सकेंगी। इसका उद्देश्य यह है कि लोग किसी भी कंटेंट को समझदारी से देखें और जान सकें कि वह असली है या एआई से बनाया गया है। नए नियम पहले के मसौदे से अलग हैं। अब हर एआई से बनी सामग्री को चिन्हित करने की बजाय केवल भ्रामक और गुमराह करने वाले कंटेंट पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा।
सरकारी अधिकारियों के नोटिस भेजने पर कंटेंट 3 घंटे में हटाना होगा। बाकी मामलों में कंटेंट 36 घंटे में हटाना होगा। उपभोक्ता की शिकायत पर 7 दिन में कार्रवाई होगी। सरकार ने यह भी तय किया है कि अगर किसी एआई से बने डीपफेक कंटेंट को सरकार या अदालत द्वारा गलत बताया जाता है, तो सोशल मीडिया कंपनियों को उसे 3 घंटे के अंदर हटाना होगा। पहले इसके लिए 36 घंटे का समय दिया जाता था।
नए नियमों के अनुसार, एक बार एआई लेबल लगाने के बाद उसे हटाया या छुपाया नहीं जा सकेगा। साथ ही, सोशल मीडिया कंपनियों को ऐसे ऑटोमेटेड टूल्स का इस्तेमाल करना होगा जो गैरकानूनी, अश्लील या धोखाधड़ी वाले एआई कंटेंट को पहचान सकें और उसे फैलने से रोक सके।