बिहार के औरंगाबाद जिले में चार लड़कियों ने कथित तौर पर एक साथ आत्महत्या कर ली। पुलिस के अनुसार, परिवार वालों ने उन्हें लड़कों के साथ घुलने-मिलने पर डांट लगाई थी, जिसके बाद उन्होंने यह कदम उठाया। 29 जनवरी को हसपुरा थाना क्षेत्र के एक दलित बस्ती में 10 से 14 साल की पांच लड़कियों ने जहरीला पदार्थ खा लिया। इनमें से चार की मौत हो गई, जबकि एक लड़की बच गई।
पुलिस अधीक्षक (SP) अंबरीश राहुल ने बताया कि बची हुई लड़की के बयान के मुताबिक, परिवार की डांट से परेशान होकर सभी ने खेत में जाकर जहर खाया। चार लड़कियों की मौत हो गई, जबकि पांचवीं घर लौट आई और परिवार को घटना की जानकारी दी। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था और अब वह खतरे से बाहर है।
लड़कियों का अंतिम संस्कार उसी दिन बिना पोस्टमार्टम के कर दिया गया। दो दिन बाद पुलिस को घटना की सूचना मिली, जिसके बाद जांच शुरू की गई। फिलहाल पुलिस को किसी और की संलिप्तता के सबूत नहीं मिले हैं। जांच जारी है।
परिवार के एक सदस्य ने बताया कि लड़कियां खेलने के लिए घर से निकली थीं। बाद में गांव वालों ने सूचना दी कि वे पास के खेत में मृत मिलीं।
गाजियाबाद में तीन बहनों ने दी जान
ये घटना ऐसे समय हुई, जब गाजियाबाद में पिछले हफ्ते तीन सौतेली बहनों एक इमारत की नौवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी। उनकी उम्र 16, 14 और 12 साल थी। घटना रात करीब 2 बजे हुई थी।
प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार, सबसे बड़ी बहन पहले खिड़की पर बैठी। दो छोटी बहनें उसे पकड़े खड़ी थीं। कुछ ही पलों बाद बड़ी बहन पीछे की ओर गिरी और फिर दोनों छोटी बहनों ने भी छलांग लगा दी।
तीनों बहनों ने अपने पिता के नाम एक पन्ने का नोट छोड़ा, जिसमें “सॉरी पापा” लिखा था और डायरी पढ़ने को कहा गया था। बताया गया कि वे उस समय स्कूल नहीं जा रही थीं।
डायरी में कोरियन कल्चर, के-पॉप और कोरियाई ड्रामा के प्रति उनका गहरा लगाव दिखा। उसमें यह भी लिखा था कि पिता उनके इस शौक का विरोध करते थे, जिससे वे परेशान थीं। पिता ने माना कि बेटियां कोरियन म्यूजिक और फिल्मों में बहुत रुचि रखती थीं और कोरिया जाना चाहती थीं।
दोनों घटनाओं ने लोगों को झकझोर दिया है। पुलिस फिलहाल दोनों मामलों की जांच कर रही है।