विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस बार कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। भाजपा नेता लगातार चुनाव को लेकर राज्य का दौरा और रैलियां कर रहें है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर बंगाल आने वाले हैं। जानकारी के मुताबिक, चुनाव से पहले कोलकाता के ब्रिगेड मैदान में उनकी एक बड़ी जनसभा होगी।
कुछ दिन पहले ही प्रधानमंत्री उत्तर बंगाल का दौरा कर चुके हैं। अब उनका दोबारा बंगाल आना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि भाजपा राज्य में पूरी ताकत झोंकने की तैयारी कर रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, मार्च में ब्रिगेड रैली आयोजित की जाएगी। हालांकि तारीख अभी तय नहीं हुई है, लेकिन उससे पहले दक्षिण बंगाल के अलग-अलग इलाकों में रथ यात्राएं निकाली जाएंगी। ये रथ यात्राएं अंत में ब्रिगेड रैली में जाकर मिलेंगी।
भाजपा का प्लान है कि परीक्षा और अन्य कार्यक्रम खत्म होने के बाद मार्च के पहले हफ्ते से बड़े पैमाने पर जनसभाएं की जाएं। पार्टी नेताओं का माने तो, फरवरी के बाद प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित कई बड़े नेता बंगाल का दौरा करेंगे। भाजपा का लक्ष्य है कि संगठन को मजबूत कर 2026 के विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन किया जाए।
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा के इस कार्यक्रम पर तंज कसा है। तृणमूल नेताओं का कहना है कि बाहर से लोगों को बसों में भरकर लाकर भीड़ दिखाने से चुनाव नहीं जीता जा सकता। उनका दावा है कि बंगाल की जनता विकास के आधार पर वोट देती है, न कि सिर्फ रैलियों से प्रभावित होती है।
अगर बात करें पिछले चुनाव की तो भाजपा के लिए बंगाल हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है। 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 18 सीटें जीतकर बड़ी सफलता हासिल की थी। लेकिन 2021 के विधानसभा चुनाव में वह 77 सीटों पर सिमट गई। हाल के लोकसभा चुनाव में भी उसकी सीटें घटकर 12 रह गईं। ऐसे में अब पार्टी की नजर 2026 पर है और वह संगठन को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में रक्षा बजट और विकास योजनाओं का भी जिक्र किया और कहा कि देश को हर स्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए। भाजपा इन मुद्दों को भी बंगाल चुनाव में उठाने की तैयारी में है।
कुल मिलाकर, चुनाव नजदीक आते ही बंगाल में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। एक तरफ भाजपा बड़े नेताओं और रथ यात्राओं के जरिए माहौल बनाने में जुटी है, तो दूसरी तरफ तृणमूल अपने संगठन और सरकारी योजनाओं के सहारे मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।