गैंगस्टर से राजनेता बने अरुण गावली को दोहरा झटका लगा है, क्योंकि उनकी दोनों बेटियां - गीता और योगिता गावली - बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के 2026 के चुनावों में हार गई हैं। दोनों बहनें अखिल भारतीय सेना की उम्मीदवार थीं, जिसकी स्थापना उनके पिता ने की थी। बायकुला के वार्ड 212 में गीता गावली को समाजवादी पार्टी के अमरीन शहजान अब्राहानी ने हरा दिया। वहीं, वार्ड 207 में योगिता गावली BJP के रोहिदास लोखंडे से हार गईं।
इन दोहरी हार से मुंबई में गावली परिवार के घटते राजनीतिक प्रभाव का संकेत मिलता है। NDTV के मुताबिक, इससे पहले गावली बहनों ने कहा था कि लोग उन्हें "डॉन की बेटियां" नहीं, बल्कि "डैडी की बेटियां" मानते हैं।
उन्होंने कहा, "लोग 'डैडी' की ओर आशा और विश्वास से देखते हैं। उन्होंने उनकी कई समस्याओं का समाधान किया है।" वे अपने पिता अरुण गावली का जिक्र कर रही थीं, जिन्हें बायकुला के दगड़ी चॉल में उनके समर्थक प्यार से 'डैडी' कहकर पुकारते हैं।
अरुण गावली एक कुख्यात गैंगस्टर था, जिसने 1970 के दशक में मुंबई के अंडरवर्ल्ड में प्रवेश किया था। वह और उसका भाई किशोर 'बायकुला कंपनी' नाम का एक आपराधिक गैंग का हिस्सा थे, जो सेंट्रल मुंबई के बायकुला, परेल और सात रास्ता इलाकों में एक्टिव था।
अरुण गावली ने 1988 में गिरोह की बागडोर संभाली और 80 के दशक के आखिर और 90 के दशक के दौरान अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के गैंग के साथ सत्ता संघर्ष में शामिल रहा।
अरुण गावली को मुंबई के एक शिवसेना पार्षद की हत्या के आरोप में 2008 में जेल भेजा गया था। 17 साल जेल में बिताने के बाद उन्हें पिछले सितंबर में जमानत पर रिहा कर दिया गया था।