बीएसएनएल (BSNL) के डायरेक्टर विवेक बंसल के प्रयागराज दौरे के लिए जारी 'वीआईपी प्रोटोकॉल' को लेकर बवाल मचा हुआ है। 19 फरवरी को डीजीएम स्तर से जारी इस योजना में उनके संगम स्नान, तौलिया, कपड़ों और भोजन जैसी व्यक्तिगत व्यवस्थाओं के लिए 50 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारयों की तैनाती की गई थी। वहीं अब केंद्र सरकार ने इस मामले में एक्शन लिया है। केंद्र सरकार ने भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) के एक वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है। सरकारी सूत्रों ने इस पूरे मामले को “पूरी तरह अजीब और अस्वीकार्य” बताया है। वहीं इस शाही प्रोटोकॉल जारी करने वाले अधिकारी डीजीएम बृजेंद्र कुमार सिंह का तबादला कर दिया गया। उन्हें प्रयागराज से 1000 किलोमीटर दूर आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम भेजा गया है।
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कही ये बात
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि, BSNL के निदेशक विवेक बंसल के प्रस्तावित दौरे के लिए जो इंतजाम किए गए, वे तय नियमों और परंपराओं के खिलाफ थे। उन्होंने इस घटना को “गलत”, “हैरान करने वाला” और अस्वीकार्य करार दिया। प्रयागराज दौरे के लिए किए गए बड़े इंतज़ामों से जुड़े एक आंतरिक कार्यालय आदेश के सामने आने के बाद विवाद शुरू हुआ। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, “मैंने साफ कर दिया है कि यह पूरी तरह गलत है और तय नियमों व परंपराओं का उल्लंघन है। यह स्वीकार्य नहीं है और हैरान करने वाला है।”
उन्होंने बताया कि संबंधित निदेशक को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है और उन्हें जवाब देने के लिए सात दिन का समय दिया गया है। जवाब मिलने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। विवाद तब बढ़ा जब विवेक बंसल के प्रयागराज दौरे की विस्तृत तैयारियों से जुड़ा कार्यालय आदेश ऑनलाइन सामने आया। इसकी आलोचना इस आधार पर हुई कि सरकारी कर्मचारियों और संसाधनों का इस्तेमाल ऐसे कार्यक्रम के लिए किया गया, जो काफी हद तक निजी या धार्मिक यात्रा जैसा लग रहा था।
सरकारी सूत्रों ने बताया कि संबंधित निदेशक को कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर जवाब देने को कहा गया है। सूत्रों के अनुसार, इस मामले को हल्के में नहीं लिया जाएगा। बताया गया कि दौरे के लिए बनाए गए प्रोटोकॉल प्लान में जिस तरह के इंतज़ाम दिखाए गए, उन्हें “बेहद निंदनीय” माना गया। इसी वजह से तुरंत हस्तक्षेप किया गया। अधिकारियों ने कहा कि नोटिस के जवाब की समीक्षा करने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
सरकार का मानना है कि यह घटना पूरी तरह अनुचित और अस्वीकार्य है। सूत्रों ने साफ किया कि दिए गए स्पष्टीकरण के आधार पर जिम्मेदारी तय की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाएं संस्थागत विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाती हैं, इसलिए उचित कदम उठाना जरूरी है।
50 से ज्यादा कर्मचारियों को सौंपी गई जिम्मेदारी
प्रोटोकॉल दस्तावेज के अनुसार, दौरे को सुचारू रूप से कराने के लिए 50 से अधिक बीएसएनएल अधिकारियों और कर्मचारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं। अलग टीमों को आने-जाने की व्यवस्था, मेहमाननवाजी, नहाने से जुड़े इंतजाम और दौरे के बाद समन्वय का काम सौंपा गया था। निर्देश दिए गए थे कि प्रयागराज में त्रिवेणी संगम और आसपास के मंदिरों के प्रस्तावित दौरे के दौरान रिफ्रेशमेंट, एस्कॉर्ट सेवा और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इसके अलावा तौलिए, अंडरगारमेंट्स और निजी उपयोग की वस्तुओं के साथ कई “किट” तैयार रखने को भी कहा गया था।
योजना में यह भी शामिल था कि स्थानीय आवाजाही के लिए इस्तेमाल होने वाले वाहनों में पानी की बोतलें, स्नैक्स और अन्य जरूरी सुविधाएं रखी जाएं। कुछ कर्मचारियों को फोटोग्राफी से लेकर स्नान के बाद निजी सामान संभालने तक की जिम्मेदारी दी गई थी।