देश का आम बजट आज यानी एक फरवरी को लोकसभा में पेश किया गया है। वहीं इस बार के बजट में पहली बार चाबहार पोर्ट परियोजना के लिए कोई राशि नहीं रखी गई है। माना जा रहा है कि ईरान पर अमेरिका के नए प्रतिबंधों को देखते हुए भारत ने यह कदम सावधानी के तौर पर उठाया है। बता दें कि भारत के लिए ईरान का चाबहार बंदरगाह एक महत्वाकांक्षी परियोजना है। चाबहार पोर्ट, भारत की मध्य एशिया तक पहुंचने की उस ‘लाइफलाइन’ का सवाल है, जिसे लंबे समय की मेहनत के बाद तैयार किया गया है।
हर साल होता था बजट का प्रावधान
भारत और ईरान मिलकर चाबहार पोर्ट को इंटरनेशनल नॉर्थ–साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) से जोड़ने के लिए काफी लंबे समय से काम कर रहे हैं। INSTC एक करीब 7,200 किलोमीटर लंबा मल्टी-मोड ट्रांसपोर्ट नेटवर्क है, जो भारत को ईरान, अफगानिस्तान, रूस, मध्य एशिया और यूरोप से जोड़ता है और इन क्षेत्रों के बीच सामान की आवाजाही को आसान बनाता है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ईरान के दक्षिणी सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में चल रहे बड़े कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट के लिए हर साल करीब 100 करोड़ रुपये का प्रावधान करता रहा है, जहां वह एक महत्वपूर्ण विकास साझेदार रहा है।
हालांकि, पिछले सितंबर में अमेरिका ने ईरान पर सख्त आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन भारत को चाबहार परियोजना में काम जारी रखने के लिए छह महीने की छूट दी गई थी। यह छूट 26 अप्रैल को समाप्त होने वाली है।
पिछले महीने विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया था कि भारत चाबहार परियोजना से जुड़े मुद्दों पर अमेरिका से लगातार बातचीत कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, तेहरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की ट्रंप प्रशासन की चेतावनी के बाद भारत इस परियोजना को लेकर अलग-अलग विकल्पों पर विचार कर रहा है। इसके अलावा भारत की विदेशी सहायता में बांग्लादेश को सबसे बड़ी कटौती का सामना करना पड़ा है।
बजट में बांग्लादेश के लिए आवंटन 120 करोड़ रुपये से घटाकर 60 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो दोनों देशों के रिश्तों में आई नरमी को दर्शाता है। गौरतलब है कि पहले तय किए गए 120 करोड़ रुपये में से अब तक केवल 34.48 करोड़ रुपये ही जारी किए जा सके थे। भारत की विदेशी सहायता में सबसे ज्यादा हिस्सा भूटान को मिल रहा है, इसके बाद नेपाल, मालदीव और श्रीलंका का स्थान है। कुल मिलाकर दूसरे देशों को दी जाने वाली भारत की मदद का बजट बढ़कर 5,686 करोड़ रुपये हो गया है, जो पिछले साल के 5,483 करोड़ रुपये से करीब 4 प्रतिशत अधिक है।