Budget session 2026: संसद के बजट सत्र शुरू होने से एक दिन पहले मंगलवार (27 जनवरी) को दोनों सदनों से जुड़े विधायी कामकाज और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक सर्वदलीय बैठक हुई। बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार का प्रतिनिधित्व किया। जबकि कांग्रेस नेता जयराम रमेश और कोडिकुनिल सुरेश, तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सागरिका घोष, समाजवादी पार्टी (SP) के राम गोपाल यादव, DMK के टी आर बालू और कई अन्य पार्टियों के नेताओं ने बैठक में हिस्सा लिया। संसद का बजट सत्र 28 जनवरी को शुरू होगा और 2 अप्रैल को खत्म होगा।
केंद्रीय आम बजट 1 फरवरी (रविवार) को पेश किया जाएगा। बजट सत्र का पहला चरण बुधवार को राष्ट्रपति के लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक को संबोधित करने के साथ शुरू होगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आर्थिक सर्वेक्षण और केंद्रीय बजट पेश करेंगी। संसदीय परंपरा के अनुसार, बजट 1 फरवरी को पेश किया जाएगा।
इस साल, 1 फरवरी को रविवार को पड़ रहा है। सत्र का पहला चरण 13 फरवरी तक चलेगा। इस दौरान राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा की जाएगी। फिर उसे पारित किया जाएगा। इस चरण के दौरान केंद्रीय बजट पर भी चर्चा की जाएगी। इसके बाद सदन 9 मार्च को फिर से शुरू होगा। सत्र का दूसरा चरण 2 अप्रैल को समाप्त होने वाला है।
इन मुद्दों को उठाएगा विपक्ष
कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों ने मंगलवार को कहा कि बुधवार से शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र में मनरेगा, सरकार की विदेश नीति, अमेरिकी टैरिफ, डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में गिरावट, वायु प्रदूषण और जनहित के कई अन्य विषयों को उठाया जाएगा। सर्वदलीय बैठक में बजट सत्र को लेकर चर्चा की गई। हालांकि कांग्रेस ने इसे लेकर विरोध दर्ज कराया कि सरकार ने कोई विधायी एजेंडा सामने नहीं रखा है।
सरकार का कहना है कि एजेंडा बाद में दिया जाएगा। सत्र का पहला भाग राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए जाने वाले धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा और केंद्रीय बजट पर चर्चा पर केंद्रित होगा। राज्यसभा में कांग्रेस के उप नेता प्रमोद तिवारी ने यह आरोप भी लगाया कि सरकार संविधान से मिले अधिकारों को खत्म कर रही है।
उन्होंने कहा, 'विपक्ष विदेश नीति का विषय भी उठाएगा। हमारी विदेश नीति कहां पहुंच गई? कोई हमारे साथ खड़ा नहीं है। हमें यह भी नहीं पता चल रहा कि किसके साथ चलें, कौन हमारे साथ चलेगा।" उनका कहना था कि सरकार की आर्थिक नीति की बात करें तो रुपया सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि मनरेगा का मुद्दा भी बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस योजना की जगह नया कानून लाकर न केवल इसके नाम से महात्मा गांधी का नाम हटाया गया है। बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार खत्म किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि इसके अलावा जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली, 'वोट चोरी' और बेरोजगारी के मुद्दों को भी इस सत्र के दौरान उठाया जाएगा। कांग्रेस सांसद कोडिकुनिल सुरेश ने कहा कि विपक्ष की मांग है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को बहाल किया जाए।
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तेलुगू देसम पार्टी (TDP) के सांसद लावू श्रीकृष्ण देवरायालू ने कहा कि भारत जिन अलग-अलग मुक्त व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर कर रहा है, उन पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने हैदराबाद की तर्ज पर अमरावती को कानूनी दर्जा देने की भी मांग की।