घर के रेंट पर टीडीएस के नियम सेक्शन 194-आई के तहत आते हैं। फाइनेंस एक्ट, 2025 के जरिए इसमें बड़ा बदलाव किया गया। FY25 तक घर का सालाना किराया 2.4 लाख रुपये से ज्यादा होने पर 10 फीसदी के रेट से टीडीएस लागू होता था। FY26 से घर का रेंट किसी महीने 50,000 रुपये से ज्यादा होने पर टीडीएस लागू होता है। अगर यह अमाउंट (50,000 से ज्यादा) पूरे महीने के लिए हो या महीने के कुछ हिस्से को लिए टीडीएस लागू होगा।
टीडीएस-फ्री हाउस रेंट की लिमिट 2.4 लाख से बढ़कर 6 लाख
इस बदलाव से टीडीएस-फ्री रेंट की लिमिट 2.4 लाख रुपये से बढ़कर 6 लाख रुपये हो गई है। इससे मकानमालिक को टीडीएस के बगैर हर महीने ज्यादा रेंट मिलने का रास्ता खुल गया। सेक्शन 194-IB के तहत इंडिविजुअल या एचयूएफ की तरफ से टैक्स ऑडिट के तहत कवर नहीं होने वाले टीडीएस रेट को 5 फीसदी से घटाकर 2 फीसदी कर दिया गया है। इससे मकानमालिक को राहत मिली है।
एजुकेशन के लिए विदेश पैसे भेजने पर टीसीएस के पुराने नियम
सेक्शन 206सी (1जी) में भी पिछले दो फाइनेंशियल ईयर्स में बदलाव हुए हैं। इस सेक्शन का संबंध लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (एलआरएस) के तहत देश से बाहर भेजे जाने वाले पैसे पर टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (टीसीएस) पर लागू होता है। इस सेक्शन के तहत FY25 तक एजुकेशन के लिए विदेश भेजे जाने वाले पैसे पर कुछ राहत मिलती थी। एजुकेशन के लिए 7 लाख रुपये तक विदेश भेजने पर टीसीएस नहीं लगता था। इससे ज्यादा पैसे भेजने (सेल्फ-फंडेड एजुकेशन एक्सपेंसेज) पर 5 फीसदी टीसीएस लगता था। एजुकेशन लोन से 7 लाख रुपये से ज्यादा पैसे विदेश भेजने पर 0.5 फीसदी टीसीएस लागू होता था।
FY26 से पढ़ाई के लिए विदेश पैसे भेजने पर टीसीएस के नियम हुए आसान
FY26 की शुरुआत से सरकार ने उन परिवारों को और राहत दी थी, जो विदेश में पढ़ाई के लिए पैसे भेजते हैं। अब सेल्फ फंडेड एजुकेशन के लिए 10 लाख रुपये से ज्यादा पैसे भेजने पर 5 फीसदी टीसीएस लगता है। टीसीएस सिर्फ 10 लाख रुपये से ऊपर के अमाउंट पर लगता है। इससे बड़ी राहत यह है कि एजुकेशन लोन के पैसे को विदेश भेजने पर टीसीएस लागू नहीं होगा। यह अमाउंट कितना भी हो सकता है। शर्त यह है कि यह लोन एक मान्यता प्राप्त फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन से लिया गया होना चाहिए।
यह भी पढ़ें: Budget 2026 Expectations: यूनियन बजट में ये ऐलान हुए तो गोल्ड निवेशकों की होगी चांदी
टीसीएस के अमाउंट को दूसरे इनकम के साथ सेट-ऑफ करने की इजाजत
इसके अलावा टीसीएस को सैलरी पर लगने वाले टैक्स के साथ सेट-ऑफ किया जा सकता है। इसके लिए एंप्लॉयर को जरूरी डॉक्युमेंट्स देने होंगे। एंप्लॉयर सैलरी से काटे गए टैक्स के साथ टीसीए के अमाउंट को एडजस्ट कर सकता है। यह भी विकल्प है कि टीसीएस को दूसरी इनकम के साथ सेट-ऑफ किया जाए। ऐसा तिमाही एडवान्स टैक्स चुकाने के वक्त या इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते वक्त किया जा सकता है। कुल मिलाकर इन बदलावों से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बढ़ा है। टैक्सपेयर्स के लिए कंप्लायंस आसान हुआ है। लिक्विडिटी बढ़ी है और अपफ्रंट टैक्स आउटफ्लो में कमी आई है।
रत्ना के-एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर, डेलॉयट इंडिया