West Asia conflict: कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (SP) और कुछ अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने पश्चिम एशिया संकट और भारत पर इसके प्रभाव को लेकर सोमवार (9 मार्च) को संसद परिसर में प्रदर्शन किया। विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर देश हितों के साथ समझौता करने का आरोप लगाया। संसद भवन के पास हुए इस विरोध प्रदर्शन में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कुछ अन्य दलों के नेता शामिल हुए।
उन्होंने एक बड़ा बैनर ले रखा था, जिस पर 'इंडिया नीड्स लीडरशिप, नॉट साइलेंस' (भारत को नेतृत्व की जरूरत है, चुप्पी की नहीं)' लिखा हुआ था। विपक्षी सांसदों ने 'अमेरिका के सामने सरेंडर करना बंद करो' जैसे नारे लगाए। विपक्ष की मांग है कि संसद में पश्चिम एशिया संकट पर अल्पकालिक चर्चा होनी चाहिए।
कांग्रेस ने पश्चिम एशिया संकट पर संसद में विदेश मंत्री एस जयशंकर के बयान पर असंतोष जताते हुए कहा कि इस मामले पर तत्काल चर्चा होनी चाहिए। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि राज्यसभा में इस मुद्दे पर चर्चा की मांग को अस्वीकार कर दिया गया, जिसके बाद विपक्ष को वॉकआउट करना पड़ा।
रमेश ने X पर पोस्ट किया, "जैसा कि अपेक्षित था, विदेश मंत्री ने राज्यसभा में स्थिति पर स्वत: संज्ञान लेते हुए वक्तव्य दिया, जिस पर कोई सवाल नहीं पूछा जा सकता या स्पष्टीकरण नहीं मांगा जा सकता। संपूर्ण विपक्ष पश्चिम एशिया के हालात पर तत्काल चर्चा चाहता था। इसे अस्वीकार कर दिया गया और इसलिए विपक्ष ने विरोध के बाद वॉकआउट कर दिया।"
पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को कहा कि भारत शांति, संवाद और कूटनीति की ओर लौटने का पक्षधर है। उन्होंने कहा कि तनाव कम करने, संयम बरतने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की वकालत करता है। संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे पर अपनी ओर से दिए गए एक बयान में उन्होंने कहा कि क्षेत्र में रह रहे भारतीय समुदाय का कल्याण और सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता बनी हुई है।
संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन राज्यसभा में इस मुद्दे पर अपनी ओर से दिए गए एक बयान में उन्होंने कहा कि क्षेत्र में रह रहे भारतीय समुदाय का कल्याण और सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता बनी हुई है। उन्होंने कहा, "हम क्षेत्र के देशों की सरकारों के साथ काम करना जारी रखेंगे। हमारे राष्ट्रीय हित हमेशा सर्वोपरि रहेंगे, जिनमें ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक लक्ष्य शामिल हैं।"
उन्होंने कहा, "भारतीय उपभोक्ताओं का हित हमारे लिए हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता रहा है और आगे भी रहेगा। जहां आवश्यक हुआ है, वहां इस अस्थिर स्थिति में भारतीय कूटनीति ने हमारी ऊर्जा कंपनियों के प्रयासों का समर्थन किया है।"
विदेश मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर लगातार नजर रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से भारत सरकार वहां की स्थिति का लगातार आकलन कर रही है। साथ ही वहां फंसे भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।