Parliament Budget Session 2.0: पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार (9 मार्च) को कहा कि भारत शांति, संवाद और कूटनीति की ओर लौटने का पक्षधर है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत तनाव कम करने, संयम बरतने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की वकालत करता है। संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन राज्यसभा में इस मुद्दे पर अपनी ओर से दिए गए एक बयान में उन्होंने कहा कि क्षेत्र में रह रहे भारतीय समुदाय का कल्याण और सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता बनी हुई है।
इस दौरान जयशंकर ने कहा कि पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रम हम सभी (भारत) के लिए गहरी चिंता का कारण हैं। पश्चिम एशिया में संघर्ष पर जयशंकर ने कहा कि हमारा मानना है कि सभी मुद्दों के समाधान के लिए संवाद और विचार-विमर्श किया जाना चाहिए। हालांकि, एस. जयशंकर के राज्यसभा में बयान देने के दौरान विपक्षी सांसदों ने आपत्ति जताई।
जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा, "ईरान से जुड़े चल रहे झगड़े को सुलझाने के लिए बातचीत और डिप्लोमेसी जारी रहनी चाहिए।" उन्होंने कहा कि यह स्थिति भारत के लिए गहरी चिंता का विषय है। विपक्ष की नारेबाजी के बीच राज्यसभा में बोलते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि इस झगड़े में कई लोग मारे गए हैं, जिसमें ईरान के लीडरशिप के लोग भी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी ने नरेंद्र मोदी को इलाके के डेवलपमेंट के बारे में जानकारी दी है। जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत सरकार हालात पर करीब से नजर रख रही है। उन्होंने कहा कि तनाव जारी रहने के कारण प्रभावित इलाके में रहने वाले भारतीय समुदाय की सुरक्षा और भलाई पर चर्चा कर रही है।
जयशंकर के संबोधन की बड़ी बातें
विपक्ष ने की युद्ध के हालात पर चर्चा की मांग
कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने सोमवार को संसद के बजट सत्र के दूसरे भाग के लिए अपनी रणनीति पर चर्चा की। विपक्ष ने ईरान एवं अमेरिका-इजरायल के बीच युद्ध से जुड़े हालात को लेकर चर्चा की मांग पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ विदेश मंत्री एस जयशंकर के वक्तव्य देने भर से विषय का समाधान नहीं होगा।
कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के संसद भवन स्थित कक्ष में हुई विपक्षी नेताओं की बैठक में कांग्रेस के अलावा समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और कई अन्य दलों के नेता शामिल हुए। बैठक के बाद खड़गे ने X पर पोस्ट किया, "बजट सत्र के दूसरे भाग की बैठक उस वक्त हो रही है, जब ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल का युद्ध हमारी दहलीज तक पहुंच गया है। ऐसे में मौजूदा भू-राजनीतिक संकट पर संपूर्ण चर्चा होना जरूरी है।"
उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री का एकतरफा बयान समाधान नहीं है। खड़गे ने कहा, "हमें सामूहिक रूप से देश को विश्वास में लेने की जरूरत है। भारत सरकार को हमारी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने, हमारे व्यापारियों की सहायता करने, हमारे निर्यात के लिए आपूर्ति शृंखलाओं में विविधता लाने और महंगाई की मार को रोकने के लिए एक विस्तृत योजना बनानी चाहिए।" उन्होंने कहा कि विपक्ष भारत के लोगों के प्रति संवेदनशीलता दिखाए जाने की मांग करता है।