सोशल मीडिया पर सरकार की और सख्ती, अब कई मंत्रालय दे सकेंगे कंटेंट हटाने का आदेश; नियमों में बदलाव की तैयारी

Social Media Content: अभी तक भारत में आईटी एक्ट, 2000 की धारा 69A के तहत किसी भी कंटेंट को ब्लॉक करने का अंतिम अधिकार सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के पास है। अन्य मंत्रालय केवल सिफारिश भेजते हैं, जिसकी जांच के बाद आईटी मंत्रालय आदेश जारी करता है

अपडेटेड Mar 18, 2026 पर 11:19 AM
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सरकार का मानना है कि AI के जरिए फैलाई जा रही भ्रामक खबरों और डीपफेक वीडियो पर तुरंत एक्शन लेने की जरूरत है

Social Media Content Takedown: भारत सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद कंटेंट को कंट्रोल करने के नियमों में बड़ा बदलाव करने जा रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार, अब केवल आईटी मंत्रालय (MeitY) ही नहीं, बल्कि कई अन्य मंत्रालय भी सीधे तौर पर आपत्तिजनक पोस्ट या वीडियो को हटाने का आदेश दे सकेंगे।

क्या है मौजूदा नियम और प्रस्तावित बदलाव?

अभी तक भारत में आईटी एक्ट, 2000 की धारा 69A के तहत किसी भी कंटेंट को ब्लॉक करने का अंतिम अधिकार सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के पास है। अन्य मंत्रालय केवल सिफारिश भेजते हैं, जिसकी जांच के बाद आईटी मंत्रालय आदेश जारी करता है।


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नए प्रस्ताव के तहत अब गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को भी सीधे ब्लॉकिंग ऑर्डर जारी करने की शक्ति दी जा सकती है।इसके साथ शेयर बाजार नियामक SEBI को भी यह अधिकार मिल सकता है ताकि सोशल मीडिया पर 'फर्जी वित्तीय सलाह' देने वाले इन्फ्लुएंसर्स पर लगाम कसी जा सके।

क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत?

सरकार का मानना है कि मौजूदा सिस्टम के तहत कंटेन्ट हटाने में ज्यादा वक्त लगता है, जबकि आज के दौर में चुनौतियां बढ़ गई हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए फैलाई जा रही भ्रामक खबरों और डीपफेक वीडियो पर तुरंत एक्शन लेने की जरूरत है। वर्तमान में कंटेंट हटाने की समयसीमा को 24-36 घंटों से घटाकर मात्र 2-3 घंटे कर दिया गया है। ऐसे में विकेंद्रीकरण से काम तेजी से होगा। देश की संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़े मामलों में संबंधित मंत्रालय सीधे और तुरंत फैसला ले सकेंगे।

वैसे आपको बता दें कि भारत में फिलहाल सोशल मीडिया से आपत्तिजनक कंटेंट हटाने के दो तरीके हैं:

धारा 69A: राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए अंतिम फैसला आईटी मंत्रालय का।

धारा 79(3)(b): एजेंसियां सीधे कंटेंट हटाने का अनुरोध करती हैं।

नए प्रस्ताव का उद्देश्य इन दोनों प्रणालियों के बीच 'समानता' लाना है ताकि हर मंत्रालय स्वतंत्र रूप से कार्य कर सके।

क्या है चिंताएं?

जहां सरकार इसे सुरक्षा और तेजी के लिहाज से जरूरी बता रही है, वहीं कुछ जानकार और यूजर्स चिंता भी जता रहे हैं। यूजर्स का मानना है कि सख्त नियमों के कारण व्यंग्य या आलोचनात्मक पोस्ट भी हटाए जा सकते हैं। कंपनियों को बहुत कम समय में फैसला लेना होगा, जिससे वे बिना गहरी जांच के कंटेंट हटा सकती हैं ताकि कानूनी कार्रवाई से बच सकें। इसमें इन्फ्लुएंसर्स को बड़ा नुकसान झेलना पद सकता है।

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