केंद्र सरकार ने शनिवार को जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत की गई हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया। गृह मंत्रालय ने कहा कि सरकार लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास का माहौल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि सभी हितधारकों के साथ रचनात्मक और सार्थक बातचीत की जा सके। मंत्रालय ने आगे कहा कि इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए और उचित विचार-विमर्श के बाद, सरकार और गृह मंत्रालय ने वांगचुक की हिरासत रद्द करने का निर्णय लिया है। सरकार ने लद्दाख की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी उपाय उपलब्ध कराने की अपनी प्रतिबद्धता को भी दोहराया।
राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा, जो सोनम वांगचुक की रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई का नेतृत्व कर रहे थे, उन्होंने कहा, “मुझे खुशी है कि भारत सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत सोनम वांगचुक की रिहाई की अधिसूचना जारी कर दी है। सोनम को 26 सितंबर को लद्दाख में हिरासत में लिया गया था। सोनम के कार्यों को गलत समझा गया। वे जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियरों के प्रतीक हैं। एक सच्चे राष्ट्रवादी।”
सरकार ने कहा कि वह लद्दाख के लोगों की उम्मीदों और चिंताओं को समझने के लिए वहां के नेताओं, समुदायों और अन्य हितधारकों से लगातार बातचीत कर रही है।
सरकार के अनुसार, बार-बार होने वाले बंद और विरोध-प्रदर्शन से समाज की शांति प्रभावित हो रही है और इसका असर छात्रों, नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं, कारोबारियों, टूर ऑपरेटरों, पर्यटकों और पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
सरकार ने दोहराया कि वह लद्दाख को जरूरी सुरक्षा और अधिकार देने के लिए प्रतिबद्ध है और उम्मीद है कि बातचीत और हाई-पावर्ड कमेटी जैसे मंचों के जरिए इस क्षेत्र के मुद्दों का समाधान निकलेगा।
पिछले 6 महीने से हिरासत में थे सोनम वांगचुक
पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पिछले साल 26 सितंबर को हिरासत में लिया गया था। यह कार्रवाई उस समय हुई जब लद्दाख के लेह में राज्य का दर्जा और संवैधानिक सुरक्षा की मांग को लेकर हिंसक प्रदर्शन हुए थे, जिनमें 4 लोगों की मौत और करीब 50 लोग घायल हो गए थे।
उन्हें जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत “कानून-व्यवस्था बनाए रखने” के लिए हिरासत में लिया गया और बाद में जोधपुर की जेल भेज दिया गया।
सोनम वांगचुक 2023 से लद्दाख के नाजुक पर्यावरण पर जलवायु परिवर्तन के असर को लेकर विरोध कर रहे थे और मांग कर रहे थे कि केंद्र शासित प्रदेश को संविधान की भारत के संविधान की छठी अनुसूची के तहत विशेष सुरक्षा दी जाए।
वांगचुक ने 35 दिन का उपवास भी रखा था
पिछले साल उन्होंने राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर 35 दिन का उपवास भी रखा था। बाद में प्रदर्शन हिंसक हो जाने पर उन्होंने यह कहते हुए अनशन खत्म कर दिया कि उनका “शांतिपूर्ण रास्ते का संदेश सफल नहीं हुआ।”
लद्दाख के अधिकारों को लेकर चल रहे आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले वांगचुक की गिरफ्तारी पर विपक्षी नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और इसके लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया।
उनकी पत्नी और शिक्षिका गीतांजलि अंगमो ने उनकी हिरासत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई और कहा कि जिस 3 मिनट के भाषण के आधार पर वांगचुक को हिरासत में लिया गया, उसका ट्रांसक्रिप्शन 7-8 मिनट का कैसे हो गया। कोर्ट ने इसमें “कुछ दुर्भावना” होने की भी आशंका जताई।