Chhagan Bhujbal: फडणवीस कैबिनेट में NCP नेता छगन भुजबल की वापसी, BMC चुनावों से पहले 'महायुति' ने बनाया मास्टर प्लान

Chhagan Bhujbal Comeback: वरिष्ठ NCP नेता और समता परिषद के संस्थापक छगन भुजबल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस मंत्रिमंडल का हिस्सा बन गए हैं। महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने मंगलवार (20 मई) को एक समारोह में उन्हें मंत्री पद की शपथ दिलाई। पिछले साल नासिक लोकसभा सीट से टिकट न मिलने पर वह काफी निराश दिखे थे

अपडेटेड May 20, 2025 पर 5:22 PM
Story continues below Advertisement
Chhagan Bhujbal Comeback: क्या छगन भुजबल की वापसी BMC चुनावों से पहले 'महायुति' के मास्टर प्लान का हिस्सा है?

Chhagan Bhujbal Comeback: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपने पांच महीने पुराने राज्य मंत्रिमंडल का मंगलवार (20 मई) को विस्तार किया। इसमें राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता छगन भुजबल को मंत्री के तौर पर शामिल किया गया। मंत्रिमंडल में भुजबल के शामिल होने के साथ ही राज्य सरकार में अब कुल 39 मंत्री हो गए हैं, जिनमें भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 19 मंत्री, शिवसेना के 11 और NCP के 9 मंत्री शामिल हैं। 77 वर्षीय भुजबल को राजभवन में महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्ण ने उपमुख्यमंत्री अजित पवार और एकनाथ शिंदे समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में पद की शपथ दिलाई।

इस अवसर पर वरिष्ठ NCP नेता ने कहा, "अंत भला तो सब भला।" उन्होंने कहा कि वह किसी विशेष विभाग की आकांक्षा नहीं रखते। राज्य में जाना-माना ओबीसी चेहरा माने जाने वाले भुजबल का राजनीतिक करियर दशकों पुराना और उतार-चढ़ाव भरा रहा है। पिछले साल दिसंबर में फडणवीस ने जब पहली बार अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया था उस समय उन्हें इसमें शामिल नहीं किया गया था। तब भुजबल ने सार्वजनिक रूप से नाराजगी जाहिर की थी।

NCP के दिग्गज नेता धनंजय मुंडे के इस्तीफे के बाद भुजबल को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। सरपंच संतोष देशमुख हत्याकांड में करीबी सहयोगी वाल्मिक कराड की गिरफ्तारी के बाद मार्च में मुंडे ने खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। पिछले साल नासिक लोकसभा सीट से टिकट न मिलने पर भुजबल काफी निराश दिखे थे।


उन्होंने 'महायुति' गठबंधन के सत्ता में लौटने पर भी इसी तरह की नाराजगी जताई थी। बाद में मंत्रियों की लिस्ट में उनका नाम नहीं था। दोनों ही मौकों पर भुजबल अपनी निराशा जनता से नहीं छिपा पाए। हालांकि, सोमवार शाम को उनकी किस्मत बदल गई, जब एनसीपी कोटे से उन्हें मंत्री बनाने का फैसला किया गया।

उन्हें नागरिक आपूर्ति विभाग दिए जाने की संभावना है, जो पहले धनंजय मुंडे के पास था। जुलाई 2023 में जब अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार के खिलाफ बगावत की, तो भुजबल उनके साथ हो गए। पहले शरद पवार के कट्टर वफादार माने जाने वाले भुजबल ने 1991 में शिवसेना में पहली बगावत की और कांग्रेस में शामिल हो गए।

1999 में जब शरद पवार ने कांग्रेस से अलग होकर एनसीपी की स्थापना की, तो भुजबल उनके साथ चले गए। पार्टी के भीतर पवार ने भुजबल को उनके भतीजे अजित से ज्यादा अहमियत दी। पवार ने कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन सरकार में भुजबल को उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री नियुक्त किया।

हालांकि, करोड़ों रुपये के फर्जी स्टांप पेपर घोटाले में नाम आने के बाद भुजबल को इस्तीफा देना पड़ा। गठबंधन सरकार के दूसरे कार्यकाल के दौरान भुजबल को फिर से लोक निर्माण विभाग की देखरेख करते हुए मंत्री नियुक्त किया गया। हालांकि, 2016 में उन्हें और उनके भतीजे समीर को महाराष्ट्र सदन घोटाला मामले में गिरफ्तार कर लिया गया।

क्या है 'महायुति' की रणनीति?

छगनभुजबल को वापस कैबिनेट में लाना राज्य भर में आगामी नगर निकाय चुनावों से पहले 'महायुति' गठबंधन द्वारा एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है। भुजबल ने खुद को महाराष्ट्र के सबसे बड़े ओबीसी नेताओं में से एक के रूप में स्थापित किया है। पिछले साल जब महायुति मराठा आरक्षण मुद्दे पर आंदोलनकारियों को शांत करने का प्रयास कर रही थी, तब भुजबल ने आक्रामक रुख अपनाया था।

उन्होंने मराठा नेता मनोज जरांगे पाटिल पर निशाना साधा और दंगाइयों के प्रति नरम रुख अपनाने के लिए अपनी ही सरकार की आलोचना की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना ​​है कि भुजबल के शामिल होने से गठबंधन को उत्तरी महाराष्ट्र में ओबीसी वोट हासिल करने में मदद मिलेगी।

ये भी पढ़ें- Delhi School Fees Row: दिल्ली के नामी स्कूल के बाहर तैनात हुए बाउंसर, फीस न भरने पर 32 छात्रों को नहीं मिली एंट्री

धनंजय मुंडे के बाहर निकलने से भुजबल की वापसी आसान हो गई। मुंडे नागरिक आपूर्ति मंत्री थे। भुजबल के भी वही विभाग संभालने की संभावना है। हालांकि, विभाग पर अंतिम फैसला मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस करेंगे। भुजबल को फिर से शामिल करने के फैसले ने उन अटकलों पर विराम लगा दिया है कि वह एनसीपी छोड़कर स्वतंत्र संगठन बनाने पर विचार कर रहे थे।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।