Chhattisgarh Liquor Scam: 'बिग बॉस' बनकर शराब का सिंडिकेट चला रहे थे भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल, ₹250 करोड़ के फ्रॉड को लेकर चार्जशीट दाखिल

Chaitanya Baghel: ED ने इस मामले में चैतन्य को 18 जुलाई 2025 को गिरफ्तार किया था और सितंबर में उन्हें ACB/EOW ने भी अपनी हिरासत में ले लिया था। अब तक इस मामले में कुल 8 चार्जशीट दाखिल हो चुकी हैं। जहां जांच एजेंसियां इसे राज्य के खजाने को 3,500 करोड़ रुपये से ज्यादा का चूना लगाने वाला सुनियोजित घोटाला बता रही है

अपडेटेड Dec 23, 2025 पर 11:18 AM
चैतन्य बघेल न केवल इस सिंडिकेट के 'मास्टरमाइंड' थे, बल्कि उन्हें इस अवैध धंधे में हिस्से के रूप में 200 से 250 करोड़ रुपये मिले थे

Chhattisgarh Liquor Scam: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 3,000 करोड़ रुपये से अधिक के शराब घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की मुश्किलें और बढ़ गई है। राज्य की एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) और इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) ने सोमवार को रायपुर की विशेष अदालत में सातवीं सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है। 3,800 पन्नों के इस भारी-भरकम दस्तावेज में दावा किया गया है कि चैतन्य बघेल न केवल इस सिंडिकेट के 'मास्टरमाइंड' थे, बल्कि उन्हें इस अवैध धंधे में हिस्से के रूप में 200 से 250 करोड़ रुपये मिले थे।

'बिग बॉस' संभलता था वसूली का सिंडिकेट

जांच एजेंसी के अनुसार, 2018 से 2023 के बीच कांग्रेस सरकार के दौरान आबकारी विभाग में चल रहे जबरन वसूली रैकेट को स्थापित करने और उसे संरक्षण देने में चैतन्य की मुख्य भूमिका थी। चार्जशीट में एक सीक्रेट व्हाट्सएप ग्रुप 'BIG BOSS' का जिक्र है, जिसके जरिए पूरा सिंडिकेट संचालित होता था। चैतन्य इस नेटवर्क में शीर्ष अधिकारियों और जमीनी स्तर के गुर्गों के बीच एक 'कोऑर्डिनेटर' की तरह काम कर रहे थे। उन्हीं के इशारे पर अवैध वसूली और पैसो का बंटवारा तय होता था।


कैसे सफेद किया गया घोटाले का पैसा?

जांच एजेंसी का आरोप है कि चैतन्य ने घोटाले से मिली करोड़ों की रकम को ठिकाने लगाने के लिए अपने भरोसेमंद साथियों और बैंकिंग चैनलों का इस्तेमाल किया। चार्जशीट के मुताबिक, शराब कारोबारी त्रिलोक सिंह ढिल्लों की फर्मों के जरिए पैसा चैतन्य की पारिवारिक कंपनियों तक पहुंचाया गया। इस काली कमाई का एक बड़ा हिस्सा 'विट्ठल ग्रीन' और 'बघेल डेवलपर्स' जैसे रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में निवेश किया गया। ईडी (ED) पहले ही चैतन्य की 61.20 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच कर चुकी है, जिसमें 364 आवासीय प्लॉट और कृषि भूमि शामिल है।

राजनीतिक साजिश या करोड़ों का खेल?

ED ने इस मामले में चैतन्य को 18 जुलाई 2025 को गिरफ्तार किया था और सितंबर में उन्हें ACB/EOW ने भी अपनी हिरासत में ले लिया था। अब तक इस मामले में कुल 8 चार्जशीट दाखिल हो चुकी हैं। जहां जांच एजेंसियां इसे राज्य के खजाने को 3,500 करोड़ रुपये से ज्यादा का चूना लगाने वाला सुनियोजित घोटाला बता रही है, वहीं पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है और इन आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है।

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