अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) अस्थाई रूप से बंद होने की स्थिति में दुनिया के कई देशों पर बुरा असर पड़ा है। दुनियाभर में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने की सबसे बड़ी वजह स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही थमना है। भारत समेत दुनिया के कई देश फिलहाल इस जंग की वजह से उर्जा संकट का सामना कर रहे हैं। सप्लाई चेन में रुकावट आने से सिर्फ ऊर्जा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि दूसरे सामानों की कमी भी हो सकती है और इसका असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ सकता है। यहीं नहीं मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और युद्ध का असर अब कंडोम की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
इन कंपनियों पर जंग का पड़ रहा असर
भारत की बड़ी दवा कंपनी मैनकाइंड फार्मा (Mankind Pharma) ने 21 मई को संकेत दिया कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव और युद्ध लंबे समय तक जारी रहता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो कंडोम की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, मैनफोर्स कंडोम बनाने वाली कंपनी के पास अगले कुछ महीनों की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ज्यादा बनी रहती हैं, तो कंपनी को बढ़ती लागत का कुछ बोझ ग्राहकों पर डालना पड़ सकता है।
कंपनियों के सामने ये हैं बड़ी दिक्कत
कंडोम बनाने वाली कंपनियां कई ऐसे सामान इस्तेमाल करती हैं जो पेट्रोलियम यानी तेल से जुड़े कच्चे माल से बनते हैं। इनमें रसायन, लुब्रिकेंट और पैकेजिंग सामग्री शामिल हैं। हालांकि कंडोम बनाने में मुख्य रूप से प्राकृतिक लेटेक्स का इस्तेमाल होता है, लेकिन बाकी चीजों के लिए तेल आधारित उत्पादों पर निर्भर रहना पड़ता है। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव की वजह से दुनियाभर के बाजार प्रभावित हुए हैं। सप्लाई में रुकावट आने से 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में करीब 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है और इसकी कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है।
बढ़ सकती हैं कंडोम की कीमतें
मैनफोर्स (Manforce) को भारत के सस्ते और लोकप्रिय कंडोम ब्रांडों में गिना जाता है। इसके 10 कंडोम वाले एक पैकेट की कीमत आमतौर पर 100 से 150 रुपये के बीच होती है। वहीं मैनकाइंड (Mankind Pharma) अकेली ऐसी कंपनी नहीं है जो बढ़ती लागत की परेशानी झेल रही है। पिछले महीने ड्यूरेक्स जैसे ब्रांडों के लिए कंडोम सप्लाई करने वाली मलेशिया की कंपनी Karex ने भी मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और सप्लाई-चेन में आई रुकावटों के कारण कीमतों में करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करने की बात कही थी।
फरवरी में संघर्ष शुरू होने के बाद से कैरेक्स को अपनी पूरी सप्लाई-चेन में लागत बढ़ने का सामना करना पड़ा है। कंडोम बनाने में इस्तेमाल होने वाले सिंथेटिक रबर और नाइट्राइल से लेकर पैकेजिंग सामग्री, एल्युमिनियम फॉयल और सिलिकॉन ऑयल जैसे लुब्रिकेंट तक, लगभग हर चीज महंगी हो गई है।
सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज के बढ़ने का खतरा
कंडोम की कीमतों में बढ़ोतरी का असर लोगों की सेहत पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कंडोम महंगे हुए, तो उनका इस्तेमाल कम हो सकता है, जिससे सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज यानी एसटीआई के मामले बढ़ने का खतरा रहेगा। भारत का कंडोम बाजार काफी बड़ा और अहम माना जाता है। इसकी अनुमानित कीमत हजारों करोड़ रुपये है और देश में हर साल 400 करोड़ से ज्यादा कंडोम बनाए जाते हैं। सरकारी कंपनी HLL Lifecare अकेले हर साल करीब 221 करोड़ कंडोम तैयार करती है। वहीं Mankind Pharma और Cupid Limited जैसी बड़ी निजी कंपनियां भारत के साथ-साथ विदेशों की मांग भी पूरी करती हैं।