Indian Mountaineers Death: दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट से एक बेहद ही दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। एवरेस्ट से नीचे उतरते समय दो भारतीय पर्वतारोहियों की दर्दनाक मौत हो गई है। नेपाल के एक अधिकारी ने शुक्रवार को इस बेहद दुखद घटना की आधिकारिक पुष्टि की है।
कौन थे ये दोनों भारतीय पर्वतारोही?
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक माउंट एवरेस्ट की चोटी से उतरते समय जान गंवाने वाले इन दोनों भारतीय पर्वतारोहियों की पहचान अरुण कुमार तिवारी और संदीप आरे के रूप में हुई है। नेपाल के एक्सपीडिशन ऑपरेटर्स असोसिएशन के महासचिव ऋषि भंडारी ने घटना की जानकारी साझा की है। ऋषि भंडारी के मुताबिक संदीप आरे ने बुधवार को एवरेस्ट की चोटी पर सफलतापूर्वक कदम रखा था, जबकि अरुण कुमार तिवारी ने गुरुवार को शाम करीब 5:30 बजे एवरेस्ट समिट को फतह किया था।
गाइड्स की कड़ी मेहनत भी नहीं आ सकी का
न्यूज एजेंसी पीटीआई (PTI) से बात करते हुए ऋषि भंडारी ने बताया कि इन पर्वतारोहियों के साथ मौजूद गाइड्स ने उन्हें बचाने की बहुत कोशिश की थी। लेकिन वे उन्हें बचाने में सफल नहीं हो सके। अधिकारियों के मुताबिक, संदीप आरे की मौत गुरुवार को हुई, जबकि अरुण कुमार तिवारी का निधन कब हुआ, इस बात की पूरी स्पष्टता अभी सामने नहीं आ पाई है। इस दुखद हादसे के संबंध में अभी और विस्तृत विवरणों का इंतजार किया जा रहा है।
मौसम ठीक होने पर बना था एवरेस्ट फतह का रिकॉर्ड
यह दुखद घटना ऐसे समय में सामने आई है जब बुधवार को ही माउंट एवरेस्ट पर एक नया रिकॉर्ड दर्ज हुआ था। अनुकूल और अच्छे मौसम के चलते बुधवार को रिकॉर्ड 274 लोगों ने माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई पूरी की थी। यह किसी एक सिंगल डे (एक ही दिन) में पर्वत के दक्षिणी हिस्से से चोटी तक पहुंचने वाले लोगों की अब तक की सबसे बड़ी संख्या है।
CNN ने ऋषि भंडारी के हवाले से बताया कि यह नया रिकॉर्ड साल 2019 के 22 मई को बने पिछले उच्च स्तर (223 लोग) से करीब 50 अधिक है। हालांकि, उस साल कुल संख्या इसलिए ज्यादा थी क्योंकि कुछ पर्वतारोहियों ने पहाड़ के उत्तरी हिस्से से भी चोटी फतह की थी। भंडारी ने बताया था कि 29029 फीट ऊंची चोटी पर इतनी बड़ी संख्या में पर्वतारोहियों के चढ़ने की मुख्य वजह अच्छा मौसम था, जबकि हफ्ते के अंत में तेज हवाएं चलने का पूर्वानुमान भी जताया गया था।
इस साल नेपाल ने जारी किए रिकॉर्ड परमिट
एवरेस्ट पर्वतारोहण के इतिहास पर नजर डालें तो इस चोटी को सबसे पहले साल 1953 में तेनजिंग नोर्गे और न्यूजीलैंड के पर्वतारोही एडमंड हिलेरी ने फतह किया था। गैर-शेरपा पर्वतारोहियों में ब्रिटिश गाइड केंटन कूल के नाम सबसे अधिक 19 बार एवरेस्ट फतह करने का रिकॉर्ड है, जबकि अमेरिकी पर्वतारोही डेव हान और गैरेट मैडिसन 15-15 बार इस चोटी पर चढ़ चुके हैं। इस साल की बात करें तो जहां एक तरफ चीन ने एवरेस्ट के उत्तरी हिस्से से चढ़ाई करने के लिए इस साल कोई परमिट जारी नहीं किया है, वहीं दूसरी तरफ नेपाल ने इस साल पहाड़ पर चढ़ने के लिए दुनिया भर के पर्वतारोहियों को करीब 500 परमिट जारी किए हैं। इसी सीजन के बीच दो भारतीय पर्वतारोहियों की मौत की इस खबर ने पूरे पर्वतारोहण जगत को गमगीन कर दिया है।