सरकार की पारदर्शिता तो पीएम मोदी सरकार की पहचान बन गयी है। लेकिन इसी पारदर्शिता का एक ऐसा उदाहरण है जो वाकई आम आदमी को अचरज में जरुर डाल देगा। इस पूरी तरह से पारदर्शी कमरे की तस्वीर को देखिए। शीशे के अंदर बैठा मंत्री क्या कर रहा है ये वहां से गुजरता हर कर्मचारी और मंत्री से मिलने पहुंचा हर व्यक्ति देख सकता है। अब कहा तो ये भी जा सकता है कि अंदर बैठा मंत्री बाहर चल रही हर हरकत पर नजर पर रख रहा है। आलम ये है कि अगर कोई मिलने वाला बाहर से इशारा भी कर दे तो मंत्री चाहे तो उसे अंदर बुलाकर दो बातें कर सकता है। जी हां—-हम बात कर हैं संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के संचार भवन के कार्यालय की। संचार मंत्री का पद संभालने के बाद सिंधिया ने अपने इस कार्यालय कुछ ऐसा कायाकल्प किया है कि कर्मचारी भी तारीफ करते नही थक रहे कि ऐसा खुला दरबार नहीं देखा।
पद संभालने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किया ये बदलाव
संचार मंत्री का पद संभालने का बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया जब संचार मंत्रालय पहुंचे तो इसे चारो तरफ से इतना बंद पाया। संचार मंत्रालय में मंत्री के कार्यालय स्थित कमरे का आलम ये था कि कहीं से हवा धूप पहुंच ही नहीं पाती थी। ऊपर से कमरे के अंदर ही एक कमरा रेस्ट रुम भी बनाया हुआ था जो दशको से चला आ रहा था। चारो तरफ इतने ज्यदा फर्नीचर लगे थे कि खाली स्थान नजर नहीं आता था। ऐसे मेंज्योतिरादित्य सिंधिया ने सबसे पहले ये फैसला लिया कि अब कमरा ऐसा बंद कोठरी जैसा नजर नहीं आना चाहिए जहां न तो धूप आए और न ही हवा। सिंधियाजी को लगा कि ऐसे बंद वाले माहौल में सिर्फ दम ही घुटता है । इसलिए फैसला ये हुआ कि संचार भवन के पहले माले का पूरा का पूरा कायाकल्प जल्दी से जल्दी हो।
जल्दी ही मंत्री जी के कमरे का पूरा ढांचा हो गया। सिंधिया साहब के कमरे के सामने बना कांफ्रेंस रुम भी अब पूरी तरह से शीशे का बना दिया गया है।दरवाजे शीशे के, खिडकियां शीशे की, दीवारें शीशे की--- वहां मंत्रीजी बैठक भी करते हैं तो टीम का हाल और मंत्री का मूड बाहर से भी नजर आ सकता है। वहां उनसे मिलने आए लोगों को भी ये पता चल जाता है कि मंत्रीजी कितने व्यस्त हैं कि उनसे मिल सकें। संचार भवन के कर्मचारी अब बाहर से ही देख सकते है की ज्योतिरादित्य सिंधिया क्या कर रहे हैं। स्टाफ के सदस्य अब नजर बचा कर इधर उधर भी नहीं जा सकते। ये पारदर्शिता सिर्फ काम मे ही नही अनुशासन में भी पारदर्शिता ला रही है।
इस कायाकल्प का फायदा ये हुआ कि पूरे दिन पूरे मंत्रालय में धूप खिली नजर आती है। इस बदलाव के बारे में सिंधियाजी से पुछा तो तपाक से जवाब आया कि वो पहले भी नागरिक उड्डयन मंत्रालय मे ये प्रयोग कर चुके थे लेकिन संचार मंत्रालय में उससे बड़ा प्रयोग किया। ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्वालियर के महाराजा परिवार से आते हैं लेकिन जनता के बीच से चुन कर लोकसभा भी आते हैं। उनकी कार्यशैली का आलम ये है कि अब कॉल ड्रॉप की शिकायतें कम होने लगीं हैं और साथ ही बीएसएनएल और कुछ टेलीकॉम कंपनियां भी मुनाफे मे जाने लगीं हैं। पोस्टल विभाग के कायाकल्प में भी सिंधिया लग गए हैं। इसलिए ये पारदर्शिता उनकी कार्यशैली पर ही असर नहीं डाल रही उनकी उनकी लोकप्रियता को भी खासा बढा रही है।