Congress: भारत और चीन के बीच सीमा पर जारी तनाव के बीच देश में सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। सोमवार, 12 जनवरी को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली स्थित भारतीय जनता पार्टी के मुख्यालय का दौरा किया। इस मुलाकात की तस्वीरें सामने आते ही कांग्रेस ने केंद्र सरकार और बीजेपी पर तीखा हमला बोला है, जिसे लेकर दोनों पार्टियों के बीच 'जुबानी जंग' शुरू हो गई है।
बीजेपी और CPC की क्यों हुई मुलाकात
चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व CPC की केंद्रीय समिति के अंतरराष्ट्रीय विभाग की उप-मंत्री सन हैयान (Sun Haiyan) ने किया। उनके साथ चीनी राजदूत जू फेइहोंग भी मौजूद थे। बीजेपी की ओर से राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह और विदेश विभाग के प्रभारी विजय चौथाईवाले ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। दोनों पक्षों ने दोनों पार्टियों के बीच संचार बढ़ाने और आपसी संवाद को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। गौरतलब है कि गलवन संघर्ष (2020) के बाद यह इस स्तर की पहली औपचारिक मुलाकात है।
'जवान शहीद हुए और यहां गलबहियां चल रही'
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने इस बैठक को लेकर सोशल मीडिया पर कड़े सवाल उठाए है। श्रीनेत ने कहा, 'गलवन में हमारे वीर जवान शहीद हुए और आज बीजेपी मुख्यालय में चीनी नेताओं के साथ गलबहियां चल रही है।' कांग्रेस ने आरोप लगाया कि चीन लद्दाख में भारतीय जमीन पर कब्जा जमाए बैठा है और अरुणाचल प्रदेश में गांव बसा रहा है, ऐसे में बीजेपी का उनसे मिलना देशद्रोह जैसा है। उन्होंने मीडिया की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या बीजेपी और चीन के बीच कोई 'गुप्त समझौता' हुआ है।
बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक 'रूटीन डिप्लोमैटिक एंगेजमेंट' बताया है। बीजेपी का तर्क है कि विदेशी राजनीतिक दलों के साथ संवाद करना एक सामान्य कूटनीतिक प्रक्रिया है और इसका देश की आधिकारिक विदेश नीति या राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं होता।
बीजेपी नेताओं ने याद दिलाया कि 2008 में कांग्रेस ने भी CPC के साथ एक समझौता (MoU) किया था, जिसे लेकर बीजेपी अक्सर राहुल गांधी और सोनिया गांधी को घेरती रही है।
द्विपक्षीय संबंधों में नरमी के बाद हुई मुलाकात
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में नरमी देखने को मिली है। 2024 के अंत से भारत-चीन संबंधों में थोड़ी नरमी देखी गई है, जिसके तहत सीधी उड़ानें और कैलाश मानसरोवर यात्रा बहाल हुई है। यह चीनी प्रतिनिधिमंडल बीजेपी के बाद RSS के नेताओं से भी मिलने वाला है, जो संघ के शताब्दी वर्ष (2025-26) के दौरान एक महत्वपूर्ण घटना मानी जा रही है।
वैसे रिपोर्ट्स के अनुसार, यह प्रतिनिधिमंडल कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल से भी मुलाकात कर सकता है।