Cyclone Montha : चक्रवात 'मोंथा' मंगलवार शाम तक भारत के तटीय राज्यों में दस्तक देने वाला है। मौसम विभाग ने ओडिशा, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवाती तूफान ‘मोंथा’ सोमवार को आंध्र प्रदेश की ओर बढ़ रहा था। मौसम विभाग के मुताबिक, यह तूफान मंगलवार आधी रात के आसपास काकीनाडा के पास तट से टकराएगा और फिर मछलीपट्टनम और कलिंगपट्टनम के बीच से गुजरते हुए दक्षिणी ओडिशा की ओर बढ़ेगा।
यह इस मौसम का पहला बड़ा तूफान है, जो फिलहाल पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर केंद्रित है और उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ रहा है। इसके तट से टकराने से पहले इसके गंभीर चक्रवाती तूफान में बदलने की संभावना है। इसमें हवा की रफ्तार 90 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है। आंध्र प्रदेश सरकार ने काकीनाडा, कोनासीमा, पश्चिम गोदावरी, एलुरु और पूर्वी गोदावरी जिलों में हाई अलर्ट जारी किया है। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि चक्रवात से किसी भी जान-माल के नुकसान को रोकने के लिए पूरी तैयारी रखी जाए।
सेना और NDRF को अलर्ट पर
नगर प्रशासन मंत्री पी. नारायण, जो काकीनाडा के प्रभारी मंत्री हैं, स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और वहीं मौजूद हैं। वहीं नागरिक आपूर्ति मंत्री नादेंडला मनोहर, जो एलुरु के प्रभारी मंत्री हैं, भी शहर पहुंच चुके हैं। सोमवार को नारायण ने काकीनाडा कलेक्ट्रेट में समीक्षा बैठक की और बताया कि अब तक 269 पुनर्वास केंद्र सभी जरूरी सुविधाओं के साथ तैयार किए गए हैं। राहत कार्यों के लिए 30 NDRF टीमों और 50 SDRF टीमों को तैनात किया गया है। इसके अलावा अर्थमूवर, ट्रैक्टर और पर्याप्त ईंधन वाले जनरेटर भी तैयार रखे गए हैं।
उन्होंने बताया कि आसपास के गांवों से करीब 140 गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित रूप से अस्पतालों में शिफ्ट किया गया है। सभी जरूरी सामान और दवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। साथ ही, बुधवार तक सभी स्कूलों और कॉलेजों में छुट्टियां घोषित कर दी गई हैं। सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि सभी मछुआरे अपनी नावों के साथ समुद्र से लौट आएं, ताकि किसी तरह का नुकसान न हो।
राज्य सरकार ने की बड़े पैमाने पर तैयारी
कोनासीमा और पश्चिम गोदावरी जिलों में प्रशासन ने तटीय इलाकों में करीब 140 पुनर्वास केंद्र बनाए हैं, जहां भोजन, दूध, दवाइयों और मेडिकल स्टाफ की पूरी व्यवस्था की गई है। नगर अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि शहर और राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे लगे पुराने या कमजोर पेड़ों को काटकर या छांटकर हटाया जाए, ताकि तूफान के दौरान कोई हादसा न हो। लोगों से अपील की गई है कि वे तूफान के गुजरने तक घरों में ही रहें और बिना जरूरत बाहर न निकलें। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए कई सरकारी इमारतों को खाली कर स्टैंडबाय पर रखा गया है।
एलुरु जिले में प्रशासन ने 82 चक्रवात राहत केंद्र तैयार किए हैं। वहीं, करीब 130 छोटे सिंचाई तालाबों और जल निकायों को कमजोर बताया गया है। इन पर नजर रखने के लिए सरकारी कर्मचारियों और प्रशिक्षित तैराकों को तैनात किया गया है ताकि किसी भी खतरे की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
पूरे शहर से हटाए गए होर्डिंग्स और विज्ञापन बोर्ड
शहर से ज़्यादातर होर्डिंग्स और विज्ञापन बोर्ड हटा दिए गए हैं, ताकि तेज हवाओं में कोई हादसा न हो। ज़िले के 14 द्वीपीय गांवों में ज़रूरी सामान पहले ही भेज दिया गया है। सभी कॉज़वे और पुलों के पास सुरक्षा के लिए राजस्व और पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है। आंध्र प्रदेश में इस तूफान का सबसे ज़्यादा असर होने की संभावना है। राज्य के 23 ज़िलों में रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किए गए हैं। इसके साथ ही, ओडिशा के दक्षिणी तटीय इलाकों में भी भारी बारिश और तेज़ हवाओं की चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग के अनुसार, चेन्नई और तमिलनाडु के उत्तरी ज़िलों में भी आने वाले दिनों में भारी बारिश होने की संभावना है।
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