Delhi Pollution: देश की राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण का संकट 'गंभीर' श्रेणी में बना हुआ है। धुंध की मोटी चादर ने पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे विजिबिलिटी बेहद कम हो गई है। दिल्ली की रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली सरकार ने प्रदूषण पर काबू पाने के लिए कड़े कदम उठाए हैं, लेकिन ग्राउंड पर स्थिति अब भी चिंताजनक है। दिल्ली में आज सुबह का AQI 360 दर्ज किया गया जो 'बेहद खराब' श्रेणी में आता है।
हवा की गुणवत्ता में हुआ थोड़ा सुधार
मंगलवार को दिल्ली की वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में मामूली सुधार हुआ, यह पिछले दिन के 498 से घटकर 377 ('बहुत खराब' श्रेणी) पर आ गया। इसके बावजूद, सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के अनुसार, 40 निगरानी स्टेशनों में से 11 में हवा की गुणवत्ता 'गंभीर' श्रेणी में दर्ज की गई। जहांगीरपुरी, मुंडका और वजीरपुर जैसे इलाकों में AQI 426 रिकॉर्ड किया गया। घना स्मॉग और कम विजिबिलिटी लगातार बनी हुई है, जिससे जनजीवन और यातायात प्रभावित हो रहा है।
प्रदूषण रोकने के लिए नई सरकारी सख्ती
बढ़ते प्रदूषण स्तर को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली सरकार ने वाहनों से संबंधित सख्त नियम लागू किए हैं। अब बिना प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) वाले वाहनों को पेट्रोल या डीजल खरीदने की अनुमति नहीं होगी। यह नियम वाहनों से होने वाले प्रदूषण को सीधे नियंत्रित करने के लिए लाया गया है। शहर की सीमाओं के भीतर केवल BS VI वाहनों को ही चलने की अनुमति दी जाएगी, जबकि पुराने वाहनों पर प्रतिबंध जारी रहेगा।
GRAP-4 के कड़े उपाय भी बेअसर
कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने पहले ग्रैप-3 और फिर शनिवार को सबसे कड़े ग्रैप-4 नियमों को लागू किया था, लेकिन इसके बाद भी प्रदूषण के हालात में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। ये है ग्रैप-4 के प्रमुख प्रतिबंध: