Delhi Budget 2026-27: दिल्ली सरकार ने पेश किया ₹1,03,700 करोड़ का 'ग्रीन बजट', जानें- किसे क्या मिला

Delhi Budget 2026-27: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार (24 मार्च) को दिल्ली विधानसभा में ₹1,03,700 करोड़ का बजट पेश किया। इस बजट में पर्यावरण को बढ़ावा देने के साथ-साथ इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च में भारी बढ़ोतरी और अहम सेक्टरों में रिकॉर्ड आवंटन शामिल है

अपडेटेड Mar 24, 2026 पर 2:06 PM
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Delhi Budget 2026-27: दिल्ली सरकार ने 2026-27 के लिए कुल 1,03,700 करोड़ रुपये का बजट पेश किया

Delhi Budget 2026-27: दिल्ली की मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री रेखा गुप्ता ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए करीब 1,03,700 करोड़ रुपये का बजट मंगलवार (24 मार्च) को पेश किया। मुख्यमंत्री ने इसे 'ग्रीन बजट' करार दिया। गुप्ता ने कहा कि शहर इस समय बदलाव के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि 'ट्रिपल इंजन' सरकार के साथ राष्ट्रीय राजधानी तेजी से प्रगति कर रही है।

गुप्ता ने साथ ही कहा कि मुफ्त सुविधाओं की संस्कृति से वृद्धि दर प्रभावित हुई। इस दौरान 2018 से 2020 के बीच राजस्व में गिरावट देखी गई। बजट में 74,000 करोड़ रुपये टैक्स रेवेन्यू का अनुमान लगाया गया है। जबकि दिल्ली नगर निगम (MCD) के लिए 11,666 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

गुप्ता ने कहा कि दिल्ली की प्रति व्यक्ति आय देश में तीसरे स्थान पर है। बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) को 5,921 करोड़ रुपये जबकि शहरी विकास एवं आवास परियोजनाओं के लिए 7,887 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।


उन्होंने कहा, "हमारा लक्ष्य सुरक्षित सड़कें, क्लाइमेट कॉरिडोर और बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना है।" बिजली विभाग के लिए 3,942 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही, 'ओवरहेड' बिजली तारों को हटाने के लिए अलग से 200 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने यमुना पार क्षेत्र के विकास के लिए 300 करोड़ रुपये, जबकि दिल्ली ग्राम विकास बोर्ड के लिए 787 करोड़ रुपये देने की घोषणा की। शहर में धूल-मुक्त सड़कों के विकास के लिए 1,352 करोड़ रुपये रखे गए हैं। इसके तहत 750 किलोमीटर सड़कों की 'एंड-टू-एंड रिकार्पेटिंग' (एक छोर से दूसरे छोर तक पूरी सतह को उखाड़कर या उसके ऊपर डामर की एक नई एवं मजबूत परत बिछाना) की जाएगी।

बजट में औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिए 160 करोड़ रुपये का भी प्रावधान किया गया है। नॉन-कन्फॉर्मिंग क्षेत्रों के लिए यह पहली बार ऐसा आवंटन है। नॉन-कन्फॉर्मिंग क्षेत्र से तात्पर्य उन शहरी या औद्योगिक क्षेत्रों से है जो मौजूदा मास्टर प्लान, जोनिंग नियमों या भूमि उपयोग मानकों के अनुरूप नहीं हैं।

इसके अलावा नजफगढ़ नाले के लिए 454 करोड़ रुपये जबकि MLA लोकल एरिया डेवलपमेंट (MLALAD) के लिए 350 करोड़ रुपये रखे गए हैं। चालू वित्त वर्ष 2025-26 में मोदी मिल फ्लाईओवर को कालकाजी और सावित्री सिनेमा चौराहे तक बढ़ाने के लिए 151 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इस परियोजना की कुल लागत 371 करोड़ रुपये अनुमानित है।

दिल्ली सरकार अपने कर्मचारियों के लिए एक इंटीग्रेटेड सेक्रेटेरिएट और रिहायशी कॉम्प्लेक्स भी बनाएगी। पालम आग दुर्घटना का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि संकरी गलियों एवं संकीर्ण अनधिकृत कॉलोनी के कारण आग बुझाने में कठिनाई होती है। इसे देखते हुए आग बुझाने के इंफ़्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए 674 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

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पानी से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए दिल्ली जल बोर्ड को 9,000 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इसके साथ ही चंद्रावल वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए 475 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है ताकि लोगों को पानी के लिए टैंकर की कतार में न लगना पड़े।

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