Delhi Yamuna Flood Wall: दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला, यमुना किनारे बनेगी 4.7 KM लंबी ‘फ्लड प्रोटेक्शन वॉल’, इन इलाकों को होगा फायदा

Delhi Yamuna Flood Wall: दिल्ली सरकार ने यमुना नदी के किनारे 4.72 किलोमीटर लंबी ‘फ्लड प्रोटेक्शन वॉल’ बनाने को मंजूरी दे दी है। यह दीवार शहर के सबसे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में से एक को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है। रिंग रोड पर स्थित यह दीवार मजनू का टीला से पुराने रेलवे पुल तक बनेगी।

अपडेटेड Apr 15, 2026 पर 12:52 PM
दिल्ली में यमुना किनारे बनेगी 4.7 KM लंबी ‘फ्लड प्रोटेक्शन वॉल’

Delhi Yamuna Flood Wall: दिल्ली सरकार ने मंगलवार को यमुना नदी के किनारे 4.7 किलोमीटर लंबी ‘फ्लड प्रोटेक्शन वॉल’ के निर्माण को मंजूरी दे दी। यह दीवार रिंग रोड और सिविल लाइंस, कश्मीरी गेट और यमुना बाजार जैसे आसपास के इलाकों में बाढ़ के पानी को प्रवेश करने से रोकेगी।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की कि यह दीवार नदी के पश्चिमी तट पर मजनू का टीला और पुराने रेलवे पुल के बीच बनाई जाएगी और परियोजना अगले मानसून से पहले पूरी हो जाएगी।

"बार-बार आने वाली बाढ़ के कारण लिया गया निर्णय"


मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह कदम कई वर्षों से आ रही बाढ़ के बाद उठाया गया है। उन्होंने कहा, "यह निर्णय शहर में बार-बार आने वाली भीषण बाढ़ के अनुभव पर आधारित है।" उन्होंने आगे कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य अस्थायी उपायों से कहीं अधिक प्रभावी समाधान प्रदान करना है।

यह इलाका क्यों जरूरी है

जलस्तर बढ़ने पर सिविल लाइंस, कश्मीरी गेट, यमुना बाजार और मजनू का टीला जैसे निचले इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। यहां अक्सर बाढ़ का पानी रिंग रोड पर आ जाता है, जिससे ट्रैफिक और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है।

2023 की बाढ़ ने बढ़ाई चिंता

2023 की बाढ़ के बाद स्थिति और भी गंभीर हो गई है, जब यमुना नदी का जलस्तर रिकॉर्ड 208.66 मीटर तक पहुंच गया था, जो 1978 के उच्चतम स्तर को पार कर गया था और शहर के बड़े हिस्से को जलमग्न कर दिया था। 2025 में, नदी ने फिर से खतरे के निशान को पार कर लिया, 207.48 मीटर तक पहुंच गई, जो एक बार-बार होने वाले पैटर्न की ओर इशारा करता है।

एक्सपर्ट ने जताई बाढ़ की आशंका

यह योजना संयुक्त बाढ़ समिति की सिफारिशों के बाद बनाई गई है, जो केंद्रीय जल एवं विद्युत अनुसंधान केंद्र के अध्ययनों पर आधारित है। इन अध्ययनों में इस क्षेत्र को बाढ़ की चपेट में आने वाला बेहद संवेदनशील इलाका बताया गया है।

जमीनी स्तर पर क्या बदलाव होंगे?

अधिकारियों का कहना है कि इस दीवार से आसपास के इलाकों में पानी का रिसाव कम होने, नदी के किनारों का कटाव सीमित होने और इस क्षेत्र में सड़कों और इमारतों की सुरक्षा होने की उम्मीद है। मानसून से पहले प्राथमिकता के आधार पर काम शुरू किए जाने की उम्मीद है।

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