राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के चीफ लालू यादव को मंगलवार (24 मार्च) को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाई कोर्ट ने आरजेडी प्रमुख और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव की याचिका खारिज कर दी है। इस याचिका में उन्होंने ‘लैंड-फॉर-जॉब्स’ मामले में सीबीआई की FIR रद्द करने की मांग की थी। कोर्ट ने साफ कहा कि इस याचिका में कोई ठोस आधार नहीं है, इसलिए इसे खारिज किया जाता है। लालू यादव ने अपनी याचिका में कहा था कि CBI ने मुकदमा चलाने के लिए आवश्यक मंज़ूरी हासिल नहीं की थी। हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि इस याचिका में कोई दम नहीं है।
बता दें कि, यह मामला आरोपों से जुड़ा है कि रेलवे में नौकरी देने के बदले जमीन ली गई थी, जिसकी जांच सीबीआई कर रही है। इस फैसले के बाद लालू यादव को फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है और इस मामले की जांच आगे भी जारी रहेगी। लालू यादव की ओर से उनके वकील ने दलील दी कि उन्हें एक “गैर-कानूनी और दुर्भावनापूर्ण जांच” के जरिए परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह उनके निष्पक्ष जांच के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। याचिका में कहा गया कि बिना जरूरी मंजूरी के की गई कोई भी जांच या पूछताछ शुरू से ही अमान्य मानी जानी चाहिए।
वकील ने यह भी बताया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A ऐसे मामलों में सुरक्षा देती है, ताकि किसी व्यक्ति को बेवजह परेशान न किया जाए। उन्होंने आगे कहा कि मौजूदा स्थिति में राजनीतिक बदले की भावना नजर आती है, जिसे रोकने के लिए ही धारा 17A बनाई गई है, ताकि निर्दोष लोगों की रक्षा हो सके। इसके साथ ही यह भी कहा गया कि बिना मंजूरी के जांच शुरू करना पूरी प्रक्रिया को शुरुआत से ही अवैध बना देता है और यह अधिकार-क्षेत्र से जुड़ी एक बड़ी गलती है। इससे पहले हाईकोर्ट ने सोमवार को नौकरी के बदले जमीन मामले में बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की याचिका पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जवाब मांगा। राबड़ी देवी की याचिका पर नोटिस जारी किया और मामले की अगली सुनवाई 1 अप्रैल को निर्धारित की है।