यह किसी रोंगटे खड़े कर देने वाली डार्क क्राइम फिल्म की स्क्रिप्ट जैसी लगती है, लेकिन हकीकत उससे कहीं ज्यादा खौफनाक है। एक पूर्व नौकर, जो कभी घर का भरोसेमंद हिस्सा था, वह अपनी सनक, कर्ज और ऑनलाइन सट्टेबाजी की लत के कारण एक ऐसा 'सीरियल किलर' बन गया, जिसने अलवर से दिल्ली तक तबाही का मंजर छोड़ दिया। एक होनहार छात्रा, जो देश की सेवा के लिए UPSC की तैयारी कर रही थी, वह इस वहशी दरिंदगी का शिकार हो गई।
अलवर में हमला, दिल्ली में कत्ल: वो 'खूनी' चंद घंटे
आरोपी राहुल मीणा की हिंसा का तांडव दिल्ली से शुरू नहीं हुआ। दिल्ली पहुंचने से कुछ घंटे पहले उसने राजस्थान के अलवर में अपने ही दोस्त की पत्नी के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की और उसे जान से मारने का प्रयास किया। वहां से भागकर उसने एक एम्बुलेंस को रोका, ड्राइवर को 6,000 रुपए का लालच देकर दिल्ली पहुंचा, लेकिन बिना पैसे दिए फरार हो गया। पुलिस का मानना है कि यह उसके भीतर बढ़ती जा रही हिंसा का पहला संकेत था।
घर की रग-रग से वाकिफ था राहुल!
साउथ दिल्ली के पॉश इलाके में रहने वाले IRS अधिकारी के घर की रग-रग से राहुल वाकिफ था, क्योंकि वह उनके यहां पहले काम कर चुका था।
सुबह 6:30 बजे: CCTV में राहुल कॉलोनी में दाखिल होता दिखा। उसे पता था कि घर के मालिक कब बाहर जाते हैं।
बिना ताला तोड़े एंट्री: उसे पता था कि घर की 'स्पेयर चाबी' कहां रहती है और सिक्योरिटी कोड क्या हैं। वह चुपचाप दाखिल हुआ और सीधे छत पर बने स्टडी रूम की तरफ बढ़ा।
बॉयोमेट्रिक लॉक और 'लाश' का इस्तेमाल
पुलिस पूछताछ में जो खुलासा हुआ वो कलेजा कंपा देने वाला है। आरोपी ने IIT दिल्ली की ग्रेजुएट छात्रा को लूटने की कोशिश की। जब उसने विरोध किया और बॉयोमेट्रिक लॉकर खोलने से मना कर दिया, तो राहुल ने उसके साथ मारपीट की, उसका रेप किया और फिर उसे बेदर्दी से मौत के घाट उतार दिया।
कत्ल के बाद राहुल ने लॉकर खोलने के लिए छात्रा की बेजान उंगलियों (Fingerprints) का इस्तेमाल करने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहा क्योंकि शरीर में खून का संचार रुकते ही बायोमेट्रिक सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया था। बाद में उसने औजारों से लॉकर तोड़ा और कैश लेकर फरार हो गया।
कर्ज, सट्टा और 'एस्कॉर्ट्स' की लत
जांच में राहुल की जो प्रोफाइल सामने आई है, वह किसी गहरे अंधकार से कम नहीं है:
मायूस चेहरा और 'डिजिटल' चालबाजी
गिरफ्तारी के बाद राहुल के चेहरे पर पछतावे की एक लकीर तक नहीं थी। उसने पुलिस से बेरुखी से कहा, "ये सब बस हो गया, अगर दीदी पैसे दे देतीं तो ये सब नहीं होता।" कत्ल के बाद उसने घर के अंदर ही अपने खून से सने कपड़े बदले और बाहर निकलते वक्त मोबाइल पर 'फेक कॉल' की एक्टिंग की ताकि किसी को शक न हो।
खुद को शातिर समझने वाले राहुल ने अपने सभी मोबाइल फोन बेच दिए थे, ताकि पुलिस उसे ट्रैक न कर सके। लेकिन पुलिस की स्पेशल टीम ने IPDR (इंटरनेट प्रोटोकॉल डिटेल रिकॉर्ड) और इंस्टाग्राम एक्टिविटी के जरिए उसका पीछा किया। आखिरकार, द्वारका के एक होटल से उसे धर दबोचा गया।
यह मामला केवल एक हत्या का नहीं, बल्कि इस बात का भी सबूत है कि कैसे ऑनलाइन सट्टेबाजी की लत और बदलती मानसिक प्रवृत्ति किसी शांत दिखने वाले शख्स को एक खतरनाक शिकारी में तब्दील कर देती है।