दिल्ली की हवा हर साल सर्दियों में बहुत खराब हो जाती है। इस समस्या को हल करने के लिए अब दिल्ली सरकार एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लेने जा रही है। सरकार का प्लान है कि अगले दो साल में दिल्ली में नए पेट्रोल वाले दोपहिया वाहन (बाइक और स्कूटर) पूरी तरह बंद कर दिए जाएंगे। इसके बजाय सिर्फ इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन ही बिक सकेंगे। यह प्रस्ताव दिल्ली सरकार के ड्राफ्ट इलेक्ट्रिक वाहन पॉलिसी 2026-2030 में रखा गया है। इस ड्राफ्ट को 30 दिनों के लिए आम लोगों और विशेषज्ञों की राय लेने के लिए सार्वजनिक किया गया है।
क्यों टारगेट किए जा रहे हैं पेट्रोल वाले दोपहिया वाहन?
दिल्ली में कुल वाहनों में दोपहिया वाहनों की संख्या लगभग 67% है। यानी दिल्ली की सड़कों पर चलने वाली हर 100 गाड़ियों में से 67 दोपहिया हैं।
इतनी बड़ी संख्या की वजह से ये वाहन प्रदूषण फैलाने में सबसे ज्यादा योगदान देते हैं। इसलिए सरकार ने इन्हें सबसे पहले इलेक्ट्रिक बनाने का फैसला किया है। ट्रांसपोर्ट विभाग का कहना है कि दोपहिया वाहनों को तेजी से इलेक्ट्रिक बनाना दिल्ली की हवा साफ करने के लिए बहुत जरूरी है।
क्या बंद हो रहा है और कब?
1 अप्रैल 2028 से दिल्ली में नई पेट्रोल और CNG बाइक-स्कूटर की रजिस्ट्रीशन बंद हो जाएगी। सिर्फ इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन ही नए सिरे से रजिस्टर किए जा सकेंगे।
पुरानी बाइकें और स्कूटर पहले की तरह चलते रहेंगे। यानी कोई अचानक बैन नहीं है, बदलाव धीरे-धीरे होगा।
तीनपहिया वाहनों (ऑटो) के लिए नया रजिस्ट्रीशन 1 जनवरी 2027 से सिर्फ इलेक्ट्रिक का होगा।
डिलीवरी और कैब जैसी कमर्शियल सर्विस में और भी पहले से बदलाव शुरू हो जाएगा।
वायु प्रदूषण की वजह से लिया गया फैसला
दिल्ली में हर सर्दी में धुंध और कोहरा इतना बढ़ जाता है कि सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है। वाहनों से निकलने वाला धुआं इसमें बड़ी भूमिका निभाता है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह नीति दिल्ली में “स्वच्छ, सुलभ और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था” बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
सिर्फ दोपहिया नहीं, बड़ा बदलाव
यह नीति सिर्फ बाइकों तक सीमित नहीं है। इसमें बसों, स्कूल बसों, सरकारी गाड़ियों, डिलीवरी वाहनों आदि को भी इलेक्ट्रिक बनाने के टारगेट रखे गए हैं। सरकारी विभागों की नई गाड़ियां सिर्फ इलेक्ट्रिक होंगी।
सरकार लोगों को इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए कई सुविधाएं दे रही है:
चार्जिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर
दिल्ली सरकार चार्जिंग स्टेशन बनाने की योजना बना रही है। दिल्ली ट्रांसको को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। डीलरशिप पर भी चार्जिंग पॉइंट लगाने होंगे। बैटरी रिसाइक्लिंग का भी ध्यान रखा जाएगा ताकि नया प्रदूषण न फैले।
क्यों लिया जा रहा है यह फैसला?
दिल्ली में सबसे ज्यादा संख्या दोपहिया वाहनों की है और ये सबसे ज्यादा प्रदूषण भी फैलाते हैं। इन्हें इलेक्ट्रिक बनाने से हवा सबसे तेजी से साफ हो सकती है।
यह फैसला सिर्फ पर्यावरण के लिए नहीं, बल्कि लोगों की सेहत और भविष्य की साफ हवा के लिए भी जरूरी है।