Corporate Fraud: आर्थिक मामलों की जांच करने वाली दिल्ली पुलिस की विंग EOW ने बड़े पैमाने के कॉरपोरेट फ्रॉड को लेकर एक मामला दर्ज किया है। इस फ्रॉड में फर्जी डॉक्यूमेंट्स और शेयरों के अवैध तरीके से लेन-देन हुआ। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह शिकायत जायन यूनिवर्सल (Zion Universal) की तरफ से उनके पावर ऑफ अटॉर्नीहोल्डर सिद्धार्थ शर्मा ने दर्ज कराई है। इस मामले में आरोपी के तौर पर सदर हिमालयन पैराडाइज़ प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का नाम शामिल है, जिसने बाद में अपना नाम बदलकर IHHR हॉस्पिटैलिटी (हिमाचल) प्राइवेट लिमिटेड कर लिया। इसके अलावा मामले में इसके डायरेक्टर और वरिष्ठ अधिकारी भी आरोपी बनाए गए हैं।
शिकायत के मुताबिक सभी आरोपियों ने साजिश कर कंपनी के शेयरों को अवैध तरीके से बेचने, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और गैरकानूनी तरीके से कंपनी पर नियंत्रण हासिल करने की योजना बनाई। आरोपों के मुताबिक इसमें करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग हुई। EOW के पास दर्ज एफआईआर में कई आरोपियों के नाम शामिल हैं; जिनमें धैर्य चौधरी, सुमंत कपूर, राजेश रोहितभाई मेहता, प्रकाश लाल कपूर, संजीव त्रेहन, ममता पंवार, नवजोत मेहता, अशोक खन्ना, घनश्याम सेठ, मनप्रीत कौर टक्कर और दिलीप चिनुभाई चोकसी समेत अन्य शामिल हैं।
एफआईआर के हिसाब से फरवरी 2025 में कंपनी में 99.98% हिस्सेदारी जायन इंटरनेशननल की थी और सभी अहम फैसले में इसके मंजूरी की जरूरत पड़ती थी। हालांकि इसके बावजूद आरोप है कि अगस्त 2024 से ही आरोपी कंपनी का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की साज़िश रचने लगे थे। आरोप है कि दिसंबर 2024 में कथित तौर पर जाली दस्तावेजों के ज़रिये एक इंटेरेस्ट-फ्री लोन एग्रीमेंट तैयार किया गया, जिसे बाद में बिना उचित मंजूरी के इक्विटी में बदलने की योजना थी।
आरोपों के मुताबिक रिकॉर्ड्स में 3 दिसंबर 2024 और 13 फरवरी 2025 को एक्स्ट्राऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) और बोर्ड की बैठकें आयोजित करने का दावा किया गया लेकिन इन बैठकों में किसी भी आरोपी या उनके किसी प्रतिनिधि की मौजूदगी का कोई सबूत नहीं है, जिससे इनके फर्जी होने का संदेह बना है। आरोप है कि इन सबके जरिये ऑथराइज्ड शेयर कैपिटल को ₹80 करोड़ से बढ़ाकर ₹170 करोड़ कर दिया गया और M/S IHRR हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड को 8.7 करोड़ से अधिक शेयर आवंटित कर दिए गए। इससे जायन यूनिवर्सल की हिस्सेदारी घटकर 47.67% रह गई, जबकि IHRR हॉस्पिटैलिटी की हिस्सेदारी बढ़कर 52.34% हो गई।
बढ़ा जांच का दायरा, होगी ईडी की एंट्री?
एफआईआर में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़े आरोप लगाए गए हैं और दिल्ली पुलिस की EOW ने मामले की बड़े पैमाने पर जांच शुरू भी कर दी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय तौर पर कथित गड़बड़ियों और मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका को देखते हुए इस मामले को आगे की जांच के लिए केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी को भी सौंपा जा सकता है।