Delhi University Bans Protests: दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) ने कैंपस में विरोध-प्रदर्शन करने पर एक महीने के लिए रोक लगा दी है। यह फैसला लॉ एंड ऑर्डर की चिंताओं का हवाला देते हुए लिया गया है। यूनिवर्सिटी ने नॉर्थ दिल्ली के मौरिस नगर इलाके के पास स्टूडेंट ग्रुप्स के बीच हिंसक झड़प के बाद अपने कैंपस में प्रोटेस्ट, पब्लिक मीटिंग, रैलियों और पांच या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर एक महीने तक के लिए बैन लगा दिया है। NDTV के मुताबिक, आज यानी 17 फरवरी से लागू होने वाला यह आदेश प्रदर्शन, नारे लगाने और ऐसी किसी भी एक्टिविटी पर रोक लगाता है।
आदेश में कहा गया है कि इससे ट्रैफिक या पब्लिक शांति में रुकावट आ सकती है। डीयू प्रॉक्टर के नोटिफिकेशन में असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस की एडवाइजरी का हवाला देते हुए कहा गया है कि कैंपस में बिना रोक-टोक के पब्लिक जमावड़े ट्रैफिक में रुकावट डाल सकते हैं। ये पब्लिक सेफ्टी को खतरा पहुंचा सकते हैं। शांति भंग कर सकते हैं। इसलिए यह आदेश एक महीने तक लागू रहेगा, जब तक कि इसे पहले वापस नहीं ले लिया जाता।
यह बैन 13 और 14 फरवरी को आर्ट्स फैकल्टी के पास और नॉर्थ दिल्ली में मौरिस नगर पुलिस स्टेशन के बाहर यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) इक्विटी रेगुलेशंस 2026 के विरोध में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद लगाया गया है। इन रेगुलेशंस का मकसद कैंपस में जाति के आधार पर भेदभाव को दूर करना है। लेकिन इससे स्टूडेंट ग्रुप्स के बीच तीखे मतभेद पैदा हो गए हैं।
रेगुलेशंस के सपोर्ट में शुरू हुआ प्रदर्शन स्टूडेंट ग्रुप्स के बीच हिंसक झड़पों में बदल गया। इसमें आर्ट्स फैकल्टी गेट के बाहर धक्का-मुक्की और हाथापाई की खबरें आईं। इस टकराव के वीडियो सोशल मीडिया पर फैल गए। इससे पुलिस को दखल देना पड़ा। बाद में पुलिस ने दोनों तरफ से शिकायतों के बाद क्रॉस FIR दर्ज कीं।
विरोध-प्रदर्शन को कवर करने के लिए मौजूद एक महिला YouTuber ने आरोप लगाया कि एक ग्रुप के सदस्यों ने उसके साथ बदसलूकी की। इसमें उसके कपड़े खींचे गए और उसे बुरी तरह धक्का दिया गया। इससे कैंपस विरोध प्रदर्शनों में मीडियाकर्मियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। पुलिस ने कहा है कि जांच के हिस्से के तौर पर CCTV फुटेज की जांच की जा रही है।
स्टूडेंट एक्टिविस्ट ने यह भी दावा किया कि जब कुछ सदस्य मौरिस नगर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराने गए, तो कथित तौर पर दूसरों ने उनका सामना किया। रेप और हत्या की धमकियों सहित मौखिक धमकियां दी गई। इससे तनाव की स्थिति और बढ़ गई। पुलिस ने कहा कि बड़ी संख्या में तैनाती ने आगे की हिंसा को रोका।
दिल्ली यूनिवर्सिटी की एग्जीक्यूटिव काउंसिल के चुने हुए सदस्य मिथुराज धुसिया ने इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताई। NDTV के मुताबिक, उनका तर्क है कि विरोध शांतिपूर्ण होना चाहिए। लेकिन पूरी तरह से रोक लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति पर एक अस्वीकार्य प्रतिबंध है।
उन्होंने कहा, "यह सच है कि सरकार, यूनिवर्सिटी और उसके घटक कॉलेजों की गलत नीतियों के खिलाफ सभी विरोध और आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण होने चाहिए। यह सुनिश्चित करना यूनिवर्सिटी का कर्तव्य है। हालांकि, यूनिवर्सिटी में ट्रैफिक में रुकावट आदि की आड़ में विरोध और आंदोलनों पर रोक बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।"
धुसिया ने सवाल किया कि क्या एडमिनिस्ट्रेशन फैकल्टी अपॉइंटमेंट में कथित गड़बड़ियों, नेशनल एजुकेशन पॉलिसी फ्रेमवर्क को लागू करने और प्रस्तावित रेगुलेटरी बदलावों जैसे मुद्दों पर असहमति को रोकने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने आगे कहा, "इस आदेश को तुरंत वापस लेने की जरूरत है।"