सीमा की सुरक्षा केवल सैनिकों के साहस से नहीं, बल्कि मजबूत सड़कों, बेहतर संपर्क और आधुनिक बुनियादी ढांचे से भी सुनिश्चित होती है। चीन की सीमा से लगा भारत का सीमावर्ती राज्य अरुणाचल प्रदेश इसका बड़ा उदाहरण है। 1962 के भारत और चीन युद्द को याद करें । ये एक ऐसा नासूर है जिसे वक्त भी नहीं मिटा पाया है। राजनेता हों, सेना हो या फिर जनता --1962 के भारत चीन युद्ध की हार सभी के मन में एक टीस के समान मौजुद रहती है। आजादी का बात 1962 में परीक्षा की एक ऐसी ही घड़ी थी। तब अरुणाचल प्रदेश की सीमा तक सड़कें नहीं थीं, सैनिकों को हवाई आपूर्ति पर निर्भर रहना पड़ता था। आज उसी सीमांत क्षेत्र में 13,000 फीट की ऊंचाई पर बनी सुरंग और हजारों किलोमीटर का पक्की सड़कों का नेटवर्क भारत की बदलती रणनीतिक और सामरिक प्राथमिकताओं को दर्शाता है।
