अमेरिकी कांग्रेस ने डोनाल्ड ट्रंप के 'न्यू ब्यूटीफुल' बिल को पास कर दिया है। ट्रंप के हस्ताक्षर के बाद जल्द यह कानून लागू हो जाएगा। इस कानून का भारतीय लोगों पर काफी असर पड़ेगा। 900 पेज वाले इस बिल में टैक्स में कटौती, डिपॉर्टेशन पर खर्च बढ़ाने और सोशल स्कीम में खर्च में कमी के प्रस्ताव शामिल हैं। इसी बिल को लेकर ट्रंप और एलॉन मस्क के रिश्ते खराब हुए थे। मस्क ने यह कहते हुए ट्रंप सरकार से नाता तोड़ लिया था कि इस बिल को लेकर उन्हें अंधेरे में रखा गया।
भारत में परिवार को पैसे भेजना महंगा होगा
अमेरिका से इंडिया पैसे भेजने पर 1 फीसदी एक्साइज टैक्स लगेगा। यह नया टैक्स (Big Beautiful Bill) है, जिसके चलते अमेरिका से इंडिया पैसे भेजना महंगा हो जाएगा। अमेरिका में नौकरी या कारोबार करने वाला कोई भारतीय अगर इंडिया में अपने परिवार के जरूरी खर्चों के लिए पैसा चाहता है तो उसे 1 फीसदी एक्साइज टैक्स चुकाना होगा।
अमेरिका बैंक अकाउंट से पैसे भेजने पर टैक्स नहीं
GyanDhan के को-फाउंडर अंकित मेहरा ने कहा, "देखने में यह टैक्स कम दिखता है लेकिन जो लोग इंडिया में अपने परिवार को हमेशा पैसे भेजते हैं उन्हें यह काफी महंगा पड़ेगा। साथ ही इंडिया में एजुकेशन लोन के पैसे चुकाने के लिए अगर कोई पैसे भेजता है तो उसे अतिरिक्त 1 फीसदी टैक्स चुकाना होगा।" उन्होंने कहा कि यह टैक्स मुख्य रूप से कैश-आधारित ट्रांसफर पर लागू होगा। अगर कोई अमेरिकी बैंक अकाउंट या कार्ड्स के जरिए पैसे भेजता है तो उसे टैक्स चुकाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
माइग्रेंट के लिए 1,00,000 डिटेंशन बेड बनाए जाएंगे
इस बिल में नेशनल सिक्योरिटी के लिए 350 अरब डॉलर के खर्च का प्रस्ताव है। इस पैसे से 1,00,000 माइग्रेंट के लिए डिटेंशन बेड्स बनाए जाएंगे। 10,00 नई इमिग्रेशन ऑफिसर्स की नियुक्ति की जाएगी। अमेरिका में गैर-कानूनी तरीके से रह रहे कररीब 10 लाख विदेशियों को सरकार हर साल उनके देश भेजेगी। इसका असर उन भारतीय लोगों पर पड़ेगा, जो जिनका वीजा खत्म होगा या जिनके इमिग्रेशन में देरी हो रही होगी।
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इलाज कराना काफी महंगा हो जाएगा
ट्रंप के इस बिल में प्रस्ताव है कि मेडिकल सर्विसेज के लिए 35 डॉलर का पेमेंट करना पड़ेगा। इसका असर अमेरिका में रह रहे भारतीय परिवारों पर पड़ेगा। खासकर उन लोगों की दिक्कतें बढ़ जाएंगी जिनकी इनकम कम है। इस बिल में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स पर मिलने वाली टैक्स सब्सिडी को वापस लेने का प्रस्ताव है। रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स को मिल रही सब्सिडी में भी कमी होगी। इसका असर उन भारतीय लोगों पर पड़ेगा, जो क्लीन एनर्जी सेक्टर में नौकरियां करते हैं या क्लीन एनर्जी से जुड़े रिसर्च का काम करते हैं।